कोलकाता पुलिस ने धारा-144 एडवाइजरी को बताया फर्जी, चुनाव बाद हिंसा के बीच अफवाहों पर सख्त चेतावनी

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कोलकाता पुलिस ने धारा-144 एडवाइजरी को बताया फर्जी, चुनाव बाद हिंसा के बीच अफवाहों पर सख्त चेतावनी

सारांश

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा के बीच सोशल मीडिया पर धारा-144 की फर्जी एडवाइजरी वायरल हुई — कोलकाता पुलिस ने इसे सिरे से खारिज किया और अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। इसी दौरान बारासात में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

मुख्य बातें

कोलकाता पुलिस ने 7 मई 2026 को खिदिरपुर और टॉपसिया समेत कई इलाकों में धारा-144 लागू होने की एडवाइजरी को फर्जी और भ्रामक घोषित किया।
पुलिस ने कोलकाता पुलिस आयुक्त के नाम पर झूठी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल बाद सत्ता से बाहर होने के बाद राज्य में हिंसा की घटनाएँ सामने आई हैं।
बारासात के मध्यग्राम इलाके में BJP नेता सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई; हत्या का आरोप TMC कार्यकर्ताओं पर लगाया गया है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि केवल आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित जानकारी पर ही भरोसा करें।

कोलकाता पुलिस ने 7 मई 2026 को स्पष्ट किया कि खिदिरपुर और टॉपसिया समेत राजधानी के कई इलाकों में धारा-144 लागू किए जाने संबंधी जो एडवाइजरी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, वह पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद भड़की हिंसा के बीच यह फर्जी सूचना तेज़ी से फैली, जिसके बाद पुलिस को आधिकारिक खंडन जारी करना पड़ा।

क्या था वायरल दावा

सोशल मीडिया पर एक एडवाइजरी शेयर की जा रही थी, जिसमें दावा किया गया था कि यह कोलकाता पुलिस हेडक्वार्टर से जारी की गई है और शहर के कई संवेदनशील इलाकों में धारा-144 लागू कर दी गई है। यह दावा तब सामने आया जब राज्य में चुनाव बाद हिंसा की खबरें लगातार आ रही थीं और नागरिकों में भय का माहौल था।

पुलिस का आधिकारिक खंडन

कोलकाता पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक परिचित पैटर्न है। जब राजनीतिक तनाव चरम पर हो, तो सोशल मीडिया पर अफवाहें आग में घी का काम करती हैं। कोलकाता पुलिस का त्वरित खंडन सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर जो विश्वसनीयता का संकट है, उसे केवल 'एक्स' पोस्ट से नहीं सुलझाया जा सकता। चंद्रनाथ रथ की हत्या और TMC पर लगे आरोप — बिना न्यायिक जाँच के — यह दर्शाते हैं कि राजनीतिक हिंसा की जवाबदेही का ढाँचा अभी भी कमज़ोर है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में धारा-144 की फर्जी एडवाइजरी क्या थी?
सोशल मीडिया पर एक एडवाइजरी वायरल हुई जिसमें दावा था कि कोलकाता पुलिस हेडक्वार्टर ने खिदिरपुर और टॉपसिया समेत कई इलाकों में धारा-144 लागू की है। कोलकाता पुलिस ने 7 मई 2026 को इसे पूरी तरह फर्जी और भ्रामक घोषित किया।
कोलकाता पुलिस ने फर्जी एडवाइजरी फैलाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने 'एक्स' पर आधिकारिक पोस्ट के ज़रिए कोलकाता पुलिस आयुक्त के नाम पर झूठी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू करने की घोषणा की है। नागरिकों से केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील भी की गई।
पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा क्यों हुई?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल बाद सत्ता से बाहर होने के बाद राज्य के विभिन्न इलाकों में हिंसक घटनाएँ सामने आई हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और सत्ता परिवर्तन के तनाव को इसका कारण बताया जा रहा है।
चंद्रनाथ रथ कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
चंद्रनाथ रथ BJP नेता सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (पीए) थे। बारासात के मध्यग्राम इलाके में उन्हें गोली मारी गई, जिसके बाद उन्हें डायवर्सिटी नर्सिंग होम ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। हत्या का आरोप TMC कार्यकर्ताओं पर लगाया गया है।
क्या कोलकाता में अभी धारा-144 लागू है?
नहीं। कोलकाता पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उनके अधिकार क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह सामान्य है और धारा-144 लागू होने की कोई भी एडवाइजरी आधिकारिक नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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