22 जुलाई 2026
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पटना हाई कोर्ट ने राजद विधायक ओसामा शहाब को सिवान जमीन विवाद में दी अग्रिम जमानत

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पटना हाई कोर्ट ने राजद विधायक ओसामा शहाब को सिवान जमीन विवाद में दी अग्रिम जमानत

सारांश

पटना हाई कोर्ट ने सिवान के रघुनाथपुर से राजद विधायक ओसामा शहाब को झूनापुर जमीन विवाद मामले में अग्रिम जमानत दे दी। निचली अदालत ने 28 अप्रैल को याचिका खारिज की थी। पुलिस जाँच और स्वामित्व विवाद की सुनवाई जारी रहेगी।

मुख्य बातें

पटना हाई कोर्ट ने राजद विधायक ओसामा शहाब को सिवान के झूनापुर गांव की जमीन से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत प्रदान की।
15 अप्रैल 2026 को गोपालगंज की सुधा सिंह और विनय कुमार सिंह ने महादेवा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
आरोप है कि 30-40 लोगों के समूह ने निर्माण मजदूरों से मारपीट की, सीसीटीवी कैमरे तोड़े और सामान छीना।
सिवान सत्र अदालत ने 28 अप्रैल 2026 को अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी, जिसके बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
शहाब का दावा है कि विवादित जमीन जनवरी 2023 में उनकी पत्नी आयशा के नाम पंजीकृत है।
अग्रिम जमानत के बावजूद पुलिस जाँच और स्वामित्व विवाद की सुनवाई जारी रहेगी।

पटना हाई कोर्ट ने 22 जुलाई 2026 को सिवान जिले की रघुनाथपुर विधानसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक ओसामा शहाब को झूनापुर गांव की विवादित जमीन से जुड़े एक आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। इस आदेश के साथ ही उनकी तत्काल गिरफ्तारी की संभावना समाप्त हो गई है और पहले से मिली अंतरिम सुरक्षा अब नियमित कानूनी राहत में परिवर्तित हो गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद सिवान जिले के महादेवा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले झूनापुर गांव में स्थित एक भूखंड को लेकर है। 15 अप्रैल 2026 को गोपालगंज निवासी सुधा सिंह और उनके पति विनय कुमार सिंह ने महादेवा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने यह जमीन सितंबर 2024 में खरीदी थी और जब उन्होंने वहाँ निर्माण कार्य शुरू किया, तो विधायक शहाब ने उसे रुकवाने का प्रयास किया और संपत्ति पर अपना स्वामित्व जताया।

आरोपों का ब्यौरा

शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ताओं को पहले फोन कॉल कर निर्माण कार्य बंद करने की चेतावनी दी गई। इसके बाद कथित तौर पर 30 से 40 लोगों का एक समूह निर्माण स्थल पर पहुँचा। आरोप है कि इस भीड़ ने वहाँ काम कर रहे मजदूरों के साथ मारपीट की, सीसीटीवी कैमरे तोड़े और मोबाइल फोन तथा एक कटर मशीन छीन ली। इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने ओसामा शहाब, फरहान, साबिर और 30-35 अज्ञात लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया।

निचली अदालत से हाई कोर्ट तक का सफर

सिवान की एक सत्र अदालत ने 28 अप्रैल 2026 को शहाब की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने पटना हाई कोर्ट में राहत के लिए अर्जी दी। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस केस डायरी तलब की और उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई। गौरतलब है कि हाई कोर्ट से यह अंतरिम सुरक्षा मिलने से पहले ही एसडीपीओ अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र में स्थित शहाब के आवास पर पहुँच चुकी थी, लेकिन विधायक वहाँ उपस्थित नहीं थे। उनके सहयोगियों ने पुलिस को कोर्ट का आदेश दिखाया।

विधायक का पक्ष

कोर्ट के समक्ष ओसामा शहाब ने तर्क दिया कि विवादित भूखंड जनवरी 2023 में उनकी पत्नी आयशा के नाम पर पंजीकृत है और चूँकि स्वामित्व का मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन था, इसलिए निर्माण कार्य रोका गया। शहाब के अनुसार, बाद में विनय कुमार सिंह और सुधा सिंह के पक्ष में एक दूसरी सेल डीड तैयार की गई, जिससे यह विवाद उत्पन्न हुआ।

आगे क्या होगा

पटना हाई कोर्ट का अग्रिम जमानत का यह आदेश मामले का अंत नहीं है। महादेवा पुलिस की जाँच जारी रहेगी और जमीन के स्वामित्व से जुड़ी दीवानी व आपराधिक कार्यवाहियाँ कानून के अनुसार आगे बढ़ेंगी। जमानत की शर्तों का पालन करते हुए शहाब को इस मामले में गिरफ्तार नहीं किया जा सकेगा, हालाँकि जाँच एजेंसी किसी भी समय पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो पुलिस एफआईआर दर्ज होने तक की देरी और फिर गिरफ्तारी की कोशिश — दोनों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। निचली अदालत द्वारा जमानत अस्वीकार करने के बाद हाई कोर्ट का राहत देना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि पुलिस जाँच बिना दबाव के आगे बढ़ती है या नहीं।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओसामा शहाब को किस मामले में अग्रिम जमानत मिली है?
पटना हाई कोर्ट ने उन्हें सिवान जिले के झूनापुर गांव में स्थित एक विवादित भूखंड से जुड़े आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत दी है। 15 अप्रैल 2026 को दर्ज इस एफआईआर में उन पर निर्माण कार्य में बाधा, मजदूरों से मारपीट और संपत्ति नुकसान के आरोप हैं।
इस जमीन विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
गोपालगंज की सुधा सिंह और विनय कुमार सिंह ने सितंबर 2024 में झूनापुर की यह जमीन खरीदी थी। जब उन्होंने निर्माण शुरू किया, तो विधायक शहाब ने कथित तौर पर उसे रुकवाया और जमीन पर अपना स्वामित्व जताया। शहाब का कहना है कि यह भूखंड जनवरी 2023 से उनकी पत्नी आयशा के नाम पंजीकृत है।
निचली अदालत ने जमानत क्यों खारिज की थी?
सिवान की सत्र अदालत ने 28 अप्रैल 2026 को ओसामा शहाब की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने मामले की गंभीरता और लंबित जाँच को देखते हुए राहत देने से इनकार किया, जिसके बाद शहाब ने पटना हाई कोर्ट का रुख किया।
क्या अग्रिम जमानत मिलने से मामला बंद हो जाएगा?
नहीं। अग्रिम जमानत केवल गिरफ्तारी से सुरक्षा देती है, मामले को समाप्त नहीं करती। महादेवा पुलिस की जाँच जारी रहेगी और जमीन के स्वामित्व से संबंधित दीवानी व आपराधिक कार्यवाहियाँ अदालत में आगे बढ़ती रहेंगी।
पटना पुलिस ने शहाब के घर छापा क्यों मारा था?
हाई कोर्ट से अंतरिम सुरक्षा मिलने से पहले एसडीपीओ अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित शहाब के पटना आवास पर पहुँची थी। विधायक वहाँ उपस्थित नहीं थे और सहयोगियों ने हाई कोर्ट का आदेश दिखाकर पुलिस को वापस किया।
राष्ट्र प्रेस
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