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पवन खेड़ा का आरोप: 12 साल के कुशासन ने भारत की शिक्षा प्रणाली को खोखला किया, CBSE पर उठाए सवाल

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पवन खेड़ा का आरोप: 12 साल के कुशासन ने भारत की शिक्षा प्रणाली को खोखला किया, CBSE पर उठाए सवाल

सारांश

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर 12 साल में भारत की शिक्षा व्यवस्था को खोखला करने का आरोप लगाया। CBSE की डिजिटल प्रणाली में 36 खामियाँ जानते हुए भी उसे जल्दबाज़ी में लागू करने और 9 करोड़ से अधिक छात्रों को पेपर लीक की मार झेलने पर छोड़ देने का आरोप है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 1 जून 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को 12 वर्षों में बर्बाद करने का आरोप लगाया।
पेपर लीक की 90 से अधिक घटनाओं में 9 करोड़ से ज़्यादा छात्र और अभिभावक प्रभावित होने का दावा किया गया।
जनवरी 2026 के 'ड्राई रन' में CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में 36 गंभीर खामियाँ मिली थीं, फिर भी इसे जल्दबाज़ी में लागू किया गया।
खेड़ा ने माँग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तत्काल शिक्षा मंत्री को पद से हटाएँ।
NCERT पाठ्यक्रम में बदलाव, UGC को कमज़ोर करने और RSS द्वारा कुलपति नियुक्ति के आरोप भी लगाए गए।

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने 1 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 12 वर्षों के कुशासन ने भारत की शिक्षा प्रणाली की बुनियाद को खोखला कर दिया है और पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं ने सरकार को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।

शिक्षा व्यवस्था पर खेड़ा के आरोप

खेड़ा ने कहा कि सीबीएसई (CBSE) की साख से समझौता किया गया, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को कमज़ोर किया गया और वैज्ञानिक सोच को जानबूझकर दबाया गया। उनके अनुसार, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों को एक विशेष विचारधारा के अनुरूप बदला गया और कुलपतियों की नियुक्ति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का हस्तक्षेप हुआ।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन को दबाया गया और अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS) तथा अल्पसंख्यक युवाओं के अधिकारों का हनन किया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षा बजट में लगातार कटौती और बेरोज़गारी के चरम पर पहुँचने ने युवाओं की स्थिति और बिगाड़ी है।

CBSE की डिजिटल प्रणाली में खामियों का खुलासा

खेड़ा ने दावा किया कि सीबीएसई ने अपनी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू करने से पहले आंतरिक चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया। उनके अनुसार, जनवरी 2026 में किए गए एक परीक्षण ('ड्राई रन') में 36 गंभीर खामियाँ सामने आई थीं — जिनमें सतही मूल्यांकन का जोखिम, निगरानी की कमी और बड़ी तकनीकी विफलताएँ शामिल थीं। शिक्षकों ने चेतावनी दी थी कि इस प्रणाली को तैयार होने में कम से कम एक से दो साल और लगेंगे, लेकिन इसे कुछ ही हफ्तों में जल्दबाज़ी में लागू कर दिया गया।

पेपर लीक माफिया पर निशाना

खेड़ा ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की 90 से अधिक घटनाओं में 9 करोड़ से ज़्यादा छात्र और उनके अभिभावक बेसहारा छोड़ दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने 'पेपर लीक माफिया' के साथ सत्तारूढ़ दल के कथित संबंधों को उजागर किया है। उन्होंने व्यापम घोटाले का उल्लेख करते हुए इसे युवाओं के भविष्य को नष्ट करने की एक सुनियोजित कोशिश बताया।

खेड़ा ने माँग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तत्काल प्रभाव से शिक्षा मंत्री को उनके पद से हटाएँ और इस संकट की जिम्मेदारी स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि जहाँ प्रधानमंत्री 'परीक्षा पे चर्चा' और 'एग्जाम वॉरियर्स' जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए अपनी छवि बनाने में लगे हैं, वहीं करोड़ों छात्र और उनके परिवार रोज़ाना तकलीफें झेल रहे हैं।

राहुल गांधी और विपक्ष की भूमिका

खेड़ा ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार छात्रों की ओर से आवाज़ उठा रहे हैं और सीबीएसई से जुड़े पूरे मामले का खुलासा कर रहे हैं। उन्होंने इसे 'बेहद शर्मनाक' बताया कि केंद्रीय मंत्री और सत्तारूढ़ दल का तंत्र 17 वर्षीय छात्रों को कथित तौर पर 'डीप स्टेट एजेंट्स', 'पाकिस्तानी' और 'सोरोस के लिए काम करने वाले' जैसे आरोपों से निशाना बना रहा है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को संसद में उठाएगी और छात्रों के लिए न्याय की माँग जारी रखेगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक को लेकर छात्र आंदोलन तेज़ हो रहे हैं और सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अगर सत्यापित होता है, तो यह महज राजनीतिक बयानबाज़ी से आगे की बात है। असली सवाल यह है कि 90 से अधिक पेपर लीक की घटनाओं के बावजूद जवाबदेही का कोई ठोस ढाँचा क्यों नहीं बना। विपक्ष की माँगें जायज़ हैं, लेकिन यह भी देखना होगा कि कांग्रेस शासित राज्यों में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति कितनी बेहतर है — जवाबदेही की माँग सर्वदलीय होनी चाहिए।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पवन खेड़ा ने CBSE पर क्या आरोप लगाए हैं?
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि CBSE ने जनवरी 2026 के 'ड्राई रन' में 36 गंभीर खामियाँ सामने आने के बावजूद अपनी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को जल्दबाज़ी में लागू किया। उनके अनुसार शिक्षकों ने चेतावनी दी थी कि इस प्रणाली को तैयार होने में कम से कम एक से दो साल और लगेंगे।
पेपर लीक से कितने छात्र प्रभावित हुए हैं?
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दावे के अनुसार पेपर लीक की 90 से अधिक घटनाओं में 9 करोड़ से ज़्यादा छात्र और उनके अभिभावक प्रभावित हुए हैं। हालाँकि इन आँकड़ों का स्वतंत्र सत्यापन अभी तक सामने नहीं आया है।
कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री को हटाने की माँग क्यों की?
खेड़ा का तर्क है कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं और CBSE की डिजिटल प्रणाली की विफलता की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री पर बनती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अब तक इस संकट की कोई जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।
NCERT पाठ्यक्रम पर कांग्रेस का क्या आरोप है?
खेड़ा ने आरोप लगाया कि NCERT की पाठ्यपुस्तकों को एक विशेष विचारधारा के अनुरूप बदला गया और RSS द्वारा विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति की गई। इन आरोपों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है।
राहुल गांधी इस मामले में क्या भूमिका निभा रहे हैं?
पवन खेड़ा के अनुसार विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार छात्रों की ओर से आवाज़ उठा रहे हैं और CBSE से जुड़े मामले का खुलासा कर रहे हैं। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि यह मुद्दा संसद में भी उठाया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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