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नीट-यूजी पेपर लीक: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दें इस्तीफा, 22 लाख छात्र प्रभावित — अरविंद सावंत

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नीट-यूजी पेपर लीक: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दें इस्तीफा, 22 लाख छात्र प्रभावित — अरविंद सावंत

सारांश

नीट-यूजी पेपर लीक और सीबीएसई विवाद ने 22 लाख छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत और कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने एकजुट होकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा है — यह सवाल उठाते हुए कि भारत में आखिर कौन सी परीक्षा अब पूरी तरह निष्पक्ष है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफे की माँग की।
नीट-यूजी पेपर लीक और सीबीएसई मूल्यांकन विवाद से कथित तौर पर 22 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी जवाबदेही की माँग की और कहा कि BJP में जिम्मेदारी स्वीकार करने की परंपरा नहीं रही।
विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार गड़बड़ी आना पूरे शिक्षा तंत्र की संरचनात्मक विफलता है।
विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद में उठाने की तैयारी में हैं।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने नीट-यूजी पेपर लीक और सीबीएसई मूल्यांकन विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए माँग की है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। उनके अनुसार, इस गड़बड़ी के कारण करीब 22 लाख छात्रों का भविष्य दाँव पर लग गया है, जो किसी भी सभ्य लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं है। मुंबई से बोलते हुए सावंत ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के करियर के साथ खिलवाड़ सरकार की घोर विफलता है।

मुख्य आरोप और माँगें

सांसद सावंत ने कहा कि जब इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षा और करियर दाँव पर हो, तो सरकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार गड़बड़ियाँ सामने आ रही हैं, फिर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। उनके अनुसार, यह स्थिति छात्रों और उनके परिवारों के लिए भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का कारण बन रही है।

सावंत ने सवाल उठाया कि आखिर देश में कौन सी परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित हो रही है। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक और अनियमितताओं की खबरें आना पूरे शिक्षा तंत्र की बड़ी विफलता को उजागर करता है और केवल जाँच के नाम पर समय निकालना पर्याप्त नहीं है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी इस मामले पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले नीट परीक्षा में पेपर लीक के आरोप सामने आए और अब सीबीएसई परीक्षा को लेकर भी इसी तरह के सवाल उठ रहे हैं। अनवर के अनुसार, एक के बाद एक परीक्षाओं में अनियमितता की बात सामने आना पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने माँग की कि सरकार को जवाबदेही दिखानी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों को अपने पद से हटकर जाँच में सहयोग करना चाहिए। अनवर ने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने टिप्पणी की कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जिम्मेदारी स्वीकार करने की परंपरा नहीं रही है।

आम छात्रों पर असर

विपक्षी नेताओं के अनुसार, 22 लाख से अधिक नीट-यूजी परीक्षार्थी सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता पर उठे सवालों ने मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को अनिश्चितता में डाल दिया है। छात्र संगठनों का कहना है कि महीनों की मेहनत के बाद भी निष्पक्ष मूल्यांकन की गारंटी न मिलना मानसिक रूप से विध्वंसकारी है।

क्या होगा आगे

विपक्ष संसद में इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में है। आलोचकों का कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय नहीं होती और परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार नहीं होते, तब तक छात्रों का भरोसा बहाल करना मुश्किल होगा। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पहले से ही सवालों के घेरे में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यूपीएससी और राज्य-स्तरीय परीक्षाओं में भी इसी तरह के विवाद उठ चुके हैं, जो बताते हैं कि समस्या किसी एक मंत्री की नहीं, बल्कि परीक्षा संचालन के पूरे ढाँचे की है। इस्तीफे की माँग राजनीतिक दृष्टि से स्वाभाविक है, लेकिन असली सवाल यह है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं में पारदर्शिता और तकनीकी सुरक्षा के लिए क्या ठोस सुधार होंगे। 22 लाख छात्रों का भविष्य किसी एक नेता के जाने-रहने से नहीं, बल्कि प्रणालीगत जवाबदेही से तय होगा।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी पेपर लीक विवाद क्या है?
नीट-यूजी (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिससे मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। इसके साथ ही सीबीएसई मूल्यांकन को लेकर भी विवाद चल रहा है, जिसने मिलकर लाखों छात्रों की परीक्षाओं को अनिश्चितता में डाल दिया है।
अरविंद सावंत ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों माँगा?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत का कहना है कि नीट-यूजी पेपर लीक और सीबीएसई विवाद के कारण करीब 22 लाख छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उनके अनुसार, इतनी बड़ी विफलता की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर बनती है और उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
इस विवाद से कितने छात्र प्रभावित हुए हैं?
विपक्षी नेताओं के अनुसार, नीट-यूजी पेपर लीक और संबंधित अनियमितताओं से करीब 22 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं। यह संख्या उन परीक्षार्थियों की है जिनकी परीक्षा और मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया इस विवाद के कारण अनिश्चितता में पड़ गई है।
कांग्रेस का इस मामले में क्या रुख है?
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी शिक्षा मंत्री की जवाबदेही की माँग की है। उन्होंने कहा कि नीट के बाद सीबीएसई परीक्षा में भी अनियमितताओं के आरोप आना पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़ा करता है और जिम्मेदार अधिकारियों को पद छोड़कर जाँच में सहयोग करना चाहिए।
परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आगे क्या होने की उम्मीद है?
विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद में उठाने की तैयारी में हैं। आलोचकों का कहना है कि केवल मंत्री के इस्तीफे से नहीं, बल्कि परीक्षा संचालन में संरचनात्मक सुधार और स्वतंत्र जाँच तंत्र से ही छात्रों का भरोसा बहाल किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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