ओपी राजभर का दावा: पीडीए और इंडी गठबंधन के सहारे यूपी नहीं जीत पाएंगे अखिलेश यादव
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओपी राजभर ने 1 नवंबर 2026 को लखनऊ में स्पष्ट कहा कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव न तो पीडीए और न ही इंडी गठबंधन की एकता के दम पर उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव जीत सकते हैं। राजभर ने गठबंधन की व्यावहारिकता, वोट चोरी के आरोपों, युवा मतदाताओं की भावनाओं और आजम खान की ईडी गिरफ्तारी — सभी मुद्दों पर सपा की कड़ी आलोचना की।
इंडी गठबंधन पर राजभर की दलील
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के इंडी गठबंधन की एकजुटता के दावे पर पलटवार करते हुए मंत्री ओपी राजभर ने कहा, 'एक समूह है जो दिल्ली में आकर प्रदर्शन कर रहा था, जिसमें पूरे देश से लोग आए थे, वे यहां उत्तर प्रदेश में आकर वोट नहीं डालेंगे। चाहे वे राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़ या दिल्ली के लोग हों, जो लोग इकट्ठा हुए थे, वे यूपी में आकर वोट नहीं देंगे।' राजभर ने यह भी याद दिलाया कि यूपी में कांग्रेस के पास मात्र दो विधायक हैं, और 2017 में सपा-कांग्रेस गठबंधन का हश्र सबके सामने है।
वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार
अखिलेश यादव के बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों में वोट चोरी के दावों को राजभर ने सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा, 'चुनाव आयोग से लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) तक, सभी कह रहे हैं कि हमें आकर इस पर चर्चा करनी चाहिए — चाहे वह लोकसभा में हो या विधानसभा। कम से कम वोट चोरी का कोई सबूत तो दीजिए।' राजभर ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सपा ने झूठ बोलने का ठेका ले रखा है।
जेनजी और एबीवीपी की जीत का तर्क
सपा प्रमुख के इस दावे पर कि युवा पीढ़ी (जेनजी) भाजपा से नाराज है, मंत्री राजभर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि युवा भाजपा से नाराज हैं तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) हर जगह छात्रसंघ चुनाव क्यों जीत रही है। राजभर ने यह भी जोड़ा कि चार राज्यों के एमएलसी चुनावों में कांग्रेस को शून्य सीटें मिली हैं, जो गठबंधन की ज़मीनी हकीकत बताता है।
आजम खान की ईडी गिरफ्तारी पर तीखी प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को रिहाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फिर से गिरफ्तार किया, और उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अखिलेश यादव का कहना है कि आजम खान को मुसलमान होने और विश्वविद्यालय बनाने की सज़ा मिल रही है। इस पर राजभर ने कहा कि विश्वविद्यालय तो भाजपा ने बनाया, लेकिन इसकी नींव सपा के कार्यकाल में रखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय निर्माण की वास्तविक लागत ₹600 करोड़ थी, जबकि सपा ने सरकारी अभिलेखों में मात्र ₹80 करोड़ दर्शाई। राजभर के अनुसार, शेष ₹520 करोड़ की जवाबदेही सपा सरकार को देनी होगी, और इसकी नैतिक ज़िम्मेदारी अखिलेश यादव पर है।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
गौरतलब है कि यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो रही हैं और सपा गठबंधन को धार देने में जुटी है। राजभर के तीखे हमले यह संकेत देते हैं कि सत्तारूढ़ भाजपा गठबंधन विपक्ष के हर कथन को चुनौती देने की रणनीति पर चल रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, पीडीए की परीक्षा असली चुनाव तक बूथ स्तर पर होगी — जहाँ आँकड़े ही अंतिम फैसला करेंगे।