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मोदी सरकार के 12 वर्ष: मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी बोले — भारत 'विश्व गुरु' की राह पर

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मोदी सरकार के 12 वर्ष: मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी बोले — भारत 'विश्व गुरु' की राह पर

सारांश

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी ने भारत को 'विश्व गुरु' की दिशा में बढ़ता बताया। साथ ही सड़कों पर नमाज को अनुचित कहते हुए ईद-उल-अजहा पर कानून-सम्मत उत्सव की अपील की।

मुख्य बातें

उमर अहमद इलियासी ने कहा कि मोदी सरकार के 12 वर्षों में भारत 'विश्व गुरु' बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' को उन्होंने देश की एकता और समावेशी विकास की भावना का प्रतीक बताया।
सड़कों पर नमाज को इस्लामी नियमों और सरकारी आदेशों दोनों के विरुद्ध बताते हुए मस्जिदों या निर्धारित स्थानों पर नमाज पढ़ने की अपील की।
ईद-उल-अजहा पर प्रतिबंधित मवेशियों की कुर्बानी न करने और सरकारी दिशा-निर्देशों के पालन की बात कही।
उन्होंने देशवासियों से शांति, सौहार्द और जिम्मेदारी के साथ पर्व मनाने की अपील की।

ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी ने 27 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर 'विश्व गुरु' बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। उन्होंने मोदी सरकार की समावेशी विकास नीति की सराहना करते हुए देशवासियों से राष्ट्र को प्राथमिकता देने की अपील की।

विकास और एकता पर इलियासी का बयान

इलियासी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' का नारा केवल राजनीतिक संदेश नहीं, बल्कि देश की एकता और समावेशी विकास की भावना का प्रतिबिंब है। उनके अनुसार, प्रत्येक भारतीय को मिलकर देश को सशक्त बनाने और भारतीयता को आगे बढ़ाने में योगदान देना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "राष्ट्र सर्वोपरि है, और हम सभी को मिलकर भारत की एकता, अखंडता और विकास के लिए योगदान देना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है।"

सड़कों पर नमाज के मुद्दे पर स्पष्ट रुख

सड़कों पर नमाज पढ़ने के विवादास्पद मुद्दे पर इलियासी ने सुलझा हुआ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि दिन में पाँच बार नमाज पढ़ना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है, किंतु नमाज के लिए साफ-सुथरी और अनुमति प्राप्त जगह होना इस्लामी नियमों के अनुसार भी ज़रूरी है।

उन्होंने कहा कि चाहे सरकारी भूमि हो या निजी संपत्ति — बिना अनुमति के वहाँ नमाज अदा करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, "जब केंद्र और राज्य सरकारों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सड़कों पर नमाज की अनुमति नहीं है, तो सभी को इन नियमों का पालन करना चाहिए। नमाज मस्जिदों या निर्धारित स्थानों पर ही अदा की जानी चाहिए।"

ईद-उल-अजहा पर संदेश और कुर्बानी के दिशा-निर्देश

आगामी ईद-उल-अजहा के अवसर पर इलियासी ने कहा कि यह पर्व त्याग, समर्पण और भक्ति का प्रतीक है तथा इस्लाम में कुर्बानी की परंपरा 'सुन्नत-ए-इब्राहीमी' के रूप में सदियों से चली आ रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकारों के निर्देशों के अनुसार प्रतिबंधित मवेशियों की कुर्बानी नहीं दी जा सकती।

उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे कानून और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए शांति, सौहार्द और जिम्मेदारी के साथ पर्व मनाएँ।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सड़कों पर नमाज और धार्मिक स्थलों के उपयोग को लेकर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि इलियासी पहले भी राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द के पक्ष में मुखर रहे हैं। उनका यह बयान मोदी सरकार की नीतियों के प्रति एक प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठन के प्रमुख का सार्वजनिक समर्थन माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए इसे सर्वसम्मत मुस्लिम राय नहीं माना जाना चाहिए। असली सवाल यह है कि क्या जमीनी स्तर पर धार्मिक नेताओं की यह अपील प्रभावी होगी, या यह केवल एक प्रतीकात्मक संदेश बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर अहमद इलियासी ने मोदी सरकार के 12 वर्षों पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत 'विश्व गुरु' बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री मोदी का 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा देश की एकता की भावना को दर्शाता है।
सड़कों पर नमाज के बारे में इलियासी का क्या कहना है?
इलियासी ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति के सरकारी या निजी ज़मीन पर नमाज पढ़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के आदेश का पालन करते हुए नमाज मस्जिदों या निर्धारित स्थानों पर ही अदा की जानी चाहिए।
ईद-उल-अजहा 2025 पर उन्होंने क्या अपील की?
उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे शांति, सौहार्द और जिम्मेदारी के साथ पर्व मनाएँ और प्रतिबंधित मवेशियों की कुर्बानी न दें। सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन सभी की जिम्मेदारी बताई।
ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन क्या है?
ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन भारत का एक प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठन है जो देशभर की मस्जिदों के इमामों का प्रतिनिधित्व करता है। उमर अहमद इलियासी इसके मुख्य इमाम हैं और राष्ट्रीय मुद्दों पर समुदाय का मार्गदर्शन करते हैं।
इलियासी के बयान का राजनीतिक महत्व क्या है?
मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक प्रमुख मुस्लिम धार्मिक नेता का सरकारी नीतियों के समर्थन में बयान सांप्रदायिक सौहार्द और समावेशी शासन की छवि को रेखांकित करता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब सड़कों पर नमाज और कुर्बानी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर देश में बहस चल रही है।
राष्ट्र प्रेस
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