गणेश चतुर्थी पर PM मोदी ने 'गणेश पञ्चरत्नम्' का श्लोक साझा कर दी देशवासियों को शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए आठवीं शताब्दी के महान दार्शनिक आदि शंकराचार्य द्वारा रचित 'गणेश पञ्चरत्नम्' स्तोत्र का पहला श्लोक एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया। उन्होंने कामना की कि विघ्नहर्ता के दिव्य आशीर्वाद से सभी के प्रयास सफल हों और राष्ट्र निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे।
पीएम मोदी का संदेश
मोदी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'देशवासियों को गणेश चतुर्थी की अनंत शुभकामनाएं। विघ्नहर्ता के दर्शन और पूजन का यह पावन पर्व सबके जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करे। उनके दिव्य आशीर्वाद से सभी के प्रयास सफल हों और राष्ट्र निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे, यही कामना है। गणपति बाप्पा मोरया!'
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने आदि शंकराचार्य रचित स्तोत्र का प्रथम पद — 'मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं, कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम्। अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं, नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम्॥' — भी पोस्ट के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया।
'गणेश पञ्चरत्नम्' का महत्व
गणेश पञ्चरत्नम् की रचना आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने की थी। इस स्तोत्र में पाँच श्लोक हैं — जिन्हें 'पंचरत्न' अर्थात पाँच बहुमूल्य रत्नों की संज्ञा दी गई है — और इनके माध्यम से भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि-प्रदाता तथा मुक्ति के दाता के रूप में स्तुति की गई है।
गौरतलब है कि इस स्तोत्र के प्रथम पद को ब्रह्ममुहूर्त में श्रद्धापूर्वक पाठ करने का विशेष विधान है। धार्मिक परंपरा में इसे अत्यंत फलदायी माना जाता है।
श्लोक का अर्थ
इस श्लोक में भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है — जो अपने हाथों में सदा आनंदरूपी मोदक (लड्डू) धारण करते हैं, जो भक्तों को मोक्ष प्रदान करने वाले हैं, जिनके मस्तक पर चंद्रमा का आभूषण सुशोभित है, और जो समस्त संसार एवं भक्तों के रक्षक हैं।
इसके अतिरिक्त श्लोक में उन्हें गजासुर (महासुर) का संहार करने वाले और शरण में आए भक्तों के समस्त अशुभों एवं संकटों का तत्काल नाश करने वाले के रूप में भी वर्णित किया गया है। अंत में कवि श्री विनायक को प्रणाम अर्पित करते हैं।
राष्ट्रीय पर्व और परंपरा
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में बड़े-बड़े पंडाल सजाए गए हैं और विसर्जन की तैयारियाँ जोरों पर हैं। प्रधानमंत्री का यह सांस्कृतिक संदेश इस पर्व की धार्मिक एवं सामाजिक गहराई को और अधिक रेखांकित करता है।
आने वाले दिनों में गणेश उत्सव अपने चरम पर पहुँचेगा और देश के विभिन्न हिस्सों में विसर्जन जुलूस निकाले जाएंगे, जो भारतीय संस्कृति की एकता और विविधता का प्रतीक हैं।