स्लोवाकिया में PM मोदी ने भेंट किया बिहार का 'ठेकुआ', स्थानीय कारोबारियों को वैश्विक बाज़ार की उम्मीद जगी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया दौरे के दौरान वहाँ की संसद के स्पीकर को बिहार का पारंपरिक व्यंजन 'ठेकुआ' भेंट किया, जिससे पटना सहित पूरे बिहार में उत्साह की लहर दौड़ गई है। इस कदम को बिहार की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों और ग्राहकों का मानना है कि इससे 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को नई ऊर्जा मिलेगी।
ठेकुआ की सांस्कृतिक पहचान
ठेकुआ बिहार का एक परंपरागत मीठा व्यंजन है, जिसका छठ पर्व पर विशेष धार्मिक महत्त्व है। श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। गौरतलब है कि यह व्यंजन केवल त्योहारों तक सीमित नहीं — सामान्य दिनों में भी इसकी बिक्री होती है और शादी-विवाह जैसे आयोजनों में भी इसे विशेष स्थान प्राप्त है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उन सैकड़ों स्थानीय खाद्य परंपराओं में से एक है जो वैश्वीकरण की आँधी में धीरे-धीरे विस्मृत होती जा रही थीं।
स्थानीय कारोबारियों की प्रतिक्रिया
ठेकुआ विक्रेता अनिल कुमार ठाकुर ने कहा, 'यह बहुत बड़ी अचीवमेंट है। हमारा बिहार का ठेकुआ वहाँ सर्व किया गया, यह बहुत अच्छी बात है। ठेकुआ को बहुत बड़ा महत्व मिलेगा। जैसे विदेश के लोग उसको पहचानेंगे, वैसे ही हम लोगों की भी पहचान बनेगी।' उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के इस कदम से बिहार के पारंपरिक खाद्य उत्पादों की माँग देश-विदेश में बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ छोटे दुकानदारों, महिला स्वयं सहायता समूहों और कुटीर उद्योगों को मिलेगा।
ठेकुआ खरीदार शंकर शाह ने उत्साहित होते हुए कहा, 'फायदा होगा, हम लोगों का धंधा चलेगा, देश-विदेश में भी यहाँ से एक्सपोर्ट होगा। जैसे ब्रिटानिया बिस्कुट बेचता है, हम लोग ठेकुआ बेचेंगे।' उन्होंने बताया कि उन्हें पटना स्टेशन के पास स्थित इस दुकान के बारे में पता चला, जहाँ शादी-विवाह के लिए विशेष मिठाइयाँ मिलती हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
आईआईटी के प्रोफेसर डॉ. प्रवीण कुमार ने इस घटनाक्रम को 'गाँव से ग्लोबल' की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि स्थानीय उत्पाद हज़ारों वर्षों की परंपरा के वाहक हैं, लेकिन प्रचार के अभाव में वे विलुप्त होते जा रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ठेकुआ भेंट किए जाने के बाद अब लोग इसे गूगल पर सर्च करेंगे, इसकी उत्पत्ति और बनाने की विधि जानना चाहेंगे, और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ज़रिये इसे मँगाना शुरू कर देंगे। उनके अनुसार, 'पीएम मोदी के द्वारा ठेकुआ देने पर उत्पाद का महत्व वैश्विक स्तर पर पहुँच जाता है।'
आम जनता पर असर
स्थानीय व्यापारियों और ग्राहकों का मानना है कि यह कदम विकसित भारत और अमृत काल के उस विज़न के अनुरूप है जिसमें स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाज़ार में उचित स्थान दिलाने की परिकल्पना है। यदि ठेकुआ निर्यात की राह पकड़ता है, तो इसका सबसे अधिक लाभ उन महिला उद्यमियों और छोटे कारीगरों को होगा जो वर्षों से इसे बनाते आ रहे हैं।
क्या होगा आगे
कारोबारी वर्ग को उम्मीद है कि इस अंतरराष्ट्रीय चर्चा के बाद सरकार ठेकुआ सहित बिहार के अन्य पारंपरिक खाद्य उत्पादों को GI टैग और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने के लिए कई नीतिगत पहल कर रही है।