पीएम मोदी ने लोकसभा में बताया: होर्मुज से भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी
सारांश
Key Takeaways
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित वापसी महत्वपूर्ण है।
- सरकार विभिन्न देशों के सप्लायरों के साथ सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है।
- भारत 60 प्रतिशत एलपीजी का आयात करता है।
- कच्चे तेल के भंडारण पर ध्यान दिया गया है।
- इथेनॉल के उत्पादन में वृद्धि से तेल आयात में कमी आ रही है।
नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में यह बताया कि हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट में फंसे कई भारतीय जहाज अब भारत पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न देशों के सप्लायर के साथ संपर्क में है, ताकि तेल और गैस की सप्लाई निरंतर बनी रहे।
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "सरकार दुनिया के विभिन्न सप्लायरों के साथ लगातार संवाद कर रही है। हमारा लक्ष्य है कि जहां से भी संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई सुनिश्चित की जाए। भारत सरकार गल्फ और उसके आस-पास के शिपिंग रूट्स पर नजर बनाए हुए है। हमारा ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि आवश्यक वस्तुओं से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचें।"
उन्होंने बताया कि इसी प्रयास के कारण हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट में फंसे कई जहाज भारत लौट आए हैं।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न स्थितियों पर पीएम मोदी ने कहा, "भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी आवश्यक वस्तुएं होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से आती हैं। युद्ध के बाद से, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों का आवागमन काफी कठिन हो गया है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े, ताकि देश के सामान्य परिवारों को कम से कम परेशानी हो।"
पीएम मोदी ने कहा कि देश अपनी आवश्यकताओं के लिए 60 प्रतिशत एलपीजी का आयात करता है। उन्होंने कहा कि सप्लाई में अस्थिरता के कारण सरकार ने घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी को प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही, एलपीजी के उत्पादन को भी बढ़ाया जा रहा है। भारत में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, "एनएसडी सिक्योरिटी के संदर्भ में पिछले एक दशक में उठाए गए कदम और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। भारत ने पिछले 11 वर्षों में अपनी ऊर्जा आयात की विविधता को बढ़ाया है। पहले क्रूड ऑयल, एलएनजी और एलपीजी की सप्लाई के लिए 27 देशों से आयात किया जाता था, जबकि आज भारत 41 देशों से ऊर्जा का आयात कर रहा है।"
सदन में पीएम मोदी ने कहा कि पिछले दशक में संकट के ऐसे समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता दी गई है। आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व है। 65 लाख से अधिक मीट्रिक टन के रिजर्व की व्यवस्था पर भारत काम कर रहा है। हमारी तेल कंपनियों के पास जो रिजर्व रहता है, वह अलग है। पिछले 11 वर्षों में हमारी रिफाइनिंग क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा, "इस संकट के समय में भारत की एक और तैयारी भी काम आ रही है। पिछले 10-11 वर्षों में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्रैंडिंग पर अभूतपूर्व काम हुआ है। एक दशक पहले तक देश में केवल 1-1.5 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग क्षमता थी। आज पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रति वर्ष लगभग 4.5 करोड़ बैरल कम तेल का आयात करना पड़ रहा है। इसी तरह, रेलवे के बिजलीकरण से भी लाभ हो रहा है।"