खड़गे की मोदी पर टिप्पणी को रवि किशन ने बताया कांग्रेस की खीझ और ओछी राजनीति
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद रवि किशन ने 26 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणी की कड़ी आलोचना करते हुए इसे कांग्रेस की राजनीतिक खीझ और निराशा का परिणाम बताया। गोरखपुर से BJP सांसद रवि किशन ने दावा किया कि कांग्रेस ने राजनीति को उस स्तर पर ला खड़ा किया है जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।
रवि किशन का आरोप: वरिष्ठ नेता से अपेक्षित नहीं ऐसी भाषा
रवि किशन ने कहा कि खड़गे जैसे वरिष्ठ नेता से इस तरह के शब्दों की उम्मीद नहीं थी। उनके अनुसार, वरिष्ठ नेताओं की ओर से ऐसी भाषा का इस्तेमाल उनकी नाराज़गी और गहरी निराशा को उजागर करता है। रवि किशन ने यह भी कहा कि राजनीतिक नाराज़गी में एक दिवंगत पिता को चर्चा में घसीटना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
पटना सभाओं का हवाला: जनसमर्थन का अंतर
BJP सांसद ने पटना में हुई सभाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रम में लगभग 500 लोग उपस्थित थे, जबकि प्रधानमंत्री मोदी को देखने के लिए लगभग 10 लाख लोग पहुँचे थे। रवि किशन ने तर्क दिया कि यही जनसमर्थन का यह भारी अंतर खड़गे की निराशा की असली वजह है।
कांग्रेस की राजनीति पर निशाना
रवि किशन ने कहा कि कांग्रेस कभी एक बड़ी राजनीतिक शक्ति हुआ करती थी, लेकिन अब उसकी राजनीति खत्म हो चुकी है और पार्टी ओछी राजनीति पर उतर आई है। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कांग्रेस के 'राजकुमार' का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उन्हें 99 बार चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। BJP सांसद ने कहा कि पार्टी के नेता बार-बार राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाते हैं, जबकि राजनीति में भाषा की मर्यादा बनाए रखना ज़रूरी है।
जनता देगी जवाब: रवि किशन का दावा
रवि किशन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पर किए गए हमले से देश की जनता दुखी होती है और लोग इसका जवाब अपने वोट के ज़रिए देते हैं। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री को जनता जिताती है, न कि पार्टी के नेता — और कांग्रेस के नेता इस लोकतांत्रिक सच्चाई को समझने में विफल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनावों में कांग्रेस को जनता के कड़े जवाब का सामना करना पड़ेगा।
यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब देश में चुनावी माहौल तेज़ी से गर्म हो रहा है। BJP और कांग्रेस के बीच बयानों की यह तीखी नोकझोंक आने वाले चुनावों में राजनीतिक रणनीति की दिशा तय कर सकती है।