26 अक्टूबर 2026
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बीजिंग में चीन-दक्षिण एशिया संबंधों पर 5वीं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी, 30 से अधिक संस्थानों के 70 विशेषज्ञ शामिल

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बीजिंग में चीन-दक्षिण एशिया संबंधों पर 5वीं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी, 30 से अधिक संस्थानों के 70 विशेषज्ञ शामिल

सारांश

बीजिंग में चीन-दक्षिण एशिया संबंधों पर 5वीं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत, नेपाल और चीन के 30 से अधिक संस्थानों के 70 से अधिक विशेषज्ञ एकत्रित हुए। 'महान परिवर्तनों के दौर में दक्षिण एशियाई सुरक्षा' विषय पर हुई चर्चाओं में चीन-भारत संबंध, इंडो-पैसिफिक रणनीति और चीन-नेपाल रेलवे जैसे अहम मुद्दे केंद्र में रहे।

मुख्य बातें

शीत्सांग मिनत्सु विश्वविद्यालय, बीजिंग में 26 अक्टूबर 2026 को चीन-दक्षिण एशिया संबंधों पर 5वीं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई।
30 से अधिक संस्थानों के 70 से अधिक विशेषज्ञ शामिल; भारत से दिल्ली विश्वविद्यालय और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ ने भागीदारी की।
संगोष्ठी का विषय: 'महान परिवर्तनों के दौर में दक्षिण एशियाई सुरक्षा और सतत विकास।' चर्चा में चीन-भारत संबंध, अमेरिकी इंडो-पैसिफिक रणनीति, चीन-नेपाल रेलवे और भारत की सीमा नीति शामिल।
उपाध्यक्ष त्सेतेन युझेन ने शीत्सांग के दक्षिण एशिया उन्मुख खुलेपन के लिए दक्षिण एशिया संस्थान के पूर्ण समर्थन की घोषणा की।

बीजिंग स्थित शीत्सांग मिनत्सु विश्वविद्यालय में 26 अक्टूबर 2026 को चीन (शीत्सांग)-दक्षिण एशिया संबंधों पर 5वीं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। भारत, नेपाल और चीन सहित 30 से अधिक घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के 70 से अधिक विशेषज्ञों तथा विद्वानों ने इस संगोष्ठी में सहभागिता की।

भाग लेने वाले संस्थान

इस संगोष्ठी में भारत से दिल्ली विश्वविद्यालय और मेरठ चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, नेपाल से त्रिभुवन विश्वविद्यालय, तथा चीन से छिंगहुआ विश्वविद्यालय और पेइचिंग विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह विविध अकादमिक भागीदारी दक्षिण एशिया अध्ययन के क्षेत्र में बढ़ती बहुपक्षीय रुचि को दर्शाती है।

उद्घाटन समारोह और मुख्य वक्तव्य

उद्घाटन समारोह में शीत्सांग मिनत्सु विश्वविद्यालय की उपाध्यक्ष त्सेतेन युझेन ने कहा कि विश्वविद्यालय दक्षिण एशिया अध्ययन, चीन-दक्षिण एशिया संबंध, दक्षिण एशियाई भाषाएँ एवं संस्कृति, तथा सीमा प्रशासन और सुरक्षा जैसे विषयों में गहन शोध के लिए दक्षिण एशिया संस्थान का पूर्ण समर्थन करता है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस पहल से शीत्सांग के लिए दक्षिण एशिया की ओर उन्मुख खुलेपन का एक महत्वपूर्ण मार्ग तैयार होगा और क्षेत्र के उच्च स्तरीय आर्थिक, सामाजिक विकास तथा व्यापक खुलेपन को बौद्धिक आधार मिलेगा।

संगोष्ठी का विषय और चर्चाएँ

इस वर्ष संगोष्ठी का केंद्रीय विषय था — 'महान परिवर्तनों के दौर में दक्षिण एशियाई सुरक्षा और सतत विकास।' विशेषज्ञों ने निम्नलिखित विषयों पर विचार-विमर्श किया:

चीन-भारत संबंध, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सुरक्षा सहयोग, दक्षिण एशियाई सुरक्षा परिदृश्य, भारत की सीमा नीति, सीमा पार आपदा प्रबंधन, अमेरिकी 'इंडो-पैसिफिक' साझेदारी प्रणाली, यूरोपीय संघ-भारत संबंध, तथा चीन-नेपाल रेलवे निर्माण।

गौरतलब है कि यह संगोष्ठी ऐसे समय में आयोजित हुई जब भारत-चीन संबंधों में हाल के महीनों में कूटनीतिक गतिविधियाँ बढ़ी हैं और दक्षिण एशियाई सुरक्षा समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं।

शोध और अकादमिक योगदान

विशेषज्ञों की चर्चाओं में दक्षिण एशियाई सुरक्षा और विकास से जुड़ी समसामयिक चुनौतियों को केंद्र में रखा गया। इसके साथ ही, चीन-दक्षिण एशिया संबंधों पर गहन शोध के लिए विविध दृष्टिकोण और अकादमिक आधार प्रस्तुत किए गए। यह संगोष्ठी इस श्रृंखला की 5वीं कड़ी है, जो दर्शाती है कि यह मंच धीरे-धीरे क्षेत्रीय कूटनीति और नीति-अनुसंधान के बीच एक नियमित संवाद-स्थल बनता जा रहा है।

आगे की दिशा

अकादमिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के बहुपक्षीय मंच दक्षिण एशिया में उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियों को समझने और नीति-निर्माताओं को शोध-आधारित विकल्प सुझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संगोष्ठी के निष्कर्षों को शोध प्रकाशनों के रूप में सार्वजनिक किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चीन-नेपाल रेलवे और 'इंडो-पैसिफिक' साझेदारी जैसे संवेदनशील विषयों का एक मंच पर चर्चा में आना बताता है कि चीन इस क्षेत्र में कूटनीतिक आख्यान गढ़ने के लिए अकादमिक माध्यम का भरपूर उपयोग कर रहा है। भारत के दो विश्वविद्यालयों की भागीदारी उल्लेखनीय है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह प्रश्न अनुत्तरित छोड़ देती है कि भारतीय प्रतिभागियों ने किन दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व किया।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शीत्सांग मिनत्सु विश्वविद्यालय में आयोजित यह संगोष्ठी किस विषय पर थी?
यह संगोष्ठी 'महान परिवर्तनों के दौर में दक्षिण एशियाई सुरक्षा और सतत विकास' विषय पर केंद्रित थी। इसमें चीन-भारत संबंध, अफगानिस्तान-पाकिस्तान सुरक्षा सहयोग, अमेरिकी इंडो-पैसिफिक रणनीति और चीन-नेपाल रेलवे जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
इस संगोष्ठी में किन देशों और संस्थानों ने भाग लिया?
संगोष्ठी में भारत के दिल्ली विश्वविद्यालय और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (मेरठ), नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय, तथा चीन के छिंगहुआ और पेइचिंग विश्वविद्यालय सहित 30 से अधिक संस्थानों के 70 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हुए।
शीत्सांग मिनत्सु विश्वविद्यालय दक्षिण एशिया अध्ययन में क्या भूमिका निभा रहा है?
विश्वविद्यालय का दक्षिण एशिया संस्थान दक्षिण एशिया अध्ययन, चीन-दक्षिण एशिया संबंध, दक्षिण एशियाई भाषाएँ-संस्कृति और सीमा प्रशासन-सुरक्षा में शोध को बढ़ावा दे रहा है। उपाध्यक्ष त्सेतेन युझेन के अनुसार, इससे शीत्सांग के दक्षिण एशिया-उन्मुख खुलेपन के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग तैयार होगा।
चीन-दक्षिण एशिया संबंधों पर यह कौन-सी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी थी?
यह इस श्रृंखला की 5वीं संगोष्ठी थी, जो 26 अक्टूबर 2026 को बीजिंग के शीत्सांग मिनत्सु विश्वविद्यालय में आयोजित की गई। इस नियमित आयोजन का उद्देश्य चीन और दक्षिण एशियाई देशों के बीच अकादमिक संवाद को बढ़ावा देना है।
इस संगोष्ठी में चीन-नेपाल रेलवे पर क्या चर्चा हुई?
चीन-नेपाल रेलवे निर्माण संगोष्ठी के प्रमुख विषयों में से एक था, जिस पर विशेषज्ञों ने क्षेत्रीय संपर्क और सुरक्षा के नज़रिए से विचार-विमर्श किया। हालाँकि चर्चाओं का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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