PM मोदी 20 जून को ओडिशा में ₹25,016 करोड़ के कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की रखेंगे आधारशिला
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून 2025 को ओडिशा के झारसुगुडा जिले के लखनपुर में ₹25,016 करोड़ के कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे। यह परियोजना भारत की पहली वाणिज्यिक-स्तरीय (कमर्शियल-स्केल) कोयले से अमोनियम नाइट्रेट उत्पादन सुविधा होगी, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी साझा की गई।
परियोजना का स्वरूप और तकनीक
लखनपुर कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट को भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) — भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड — द्वारा विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना BHEL द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित कोयला गैसीफिकेशन तकनीक का उपयोग करेगी और प्रतिदिन 2,000 टन अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन करने में सक्षम होगी।
इस प्रक्रिया में कोयले को सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में परिवर्तित किया जाता है, जिससे मेथनॉल, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, सिंथेटिक नेचुरल गैस और अन्य रासायनिक फीडस्टॉक जैसे मूल्य-वर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। यह परियोजना भविष्य के कोयला गैसीफिकेशन उद्यमों के लिए एक मॉडल के रूप में भी काम करेगी।
आयात निर्भरता घटाने का लक्ष्य
आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग ₹2.7 लाख करोड़ मूल्य के अंतिम-उपयोग और इंटरमीडिएट रासायनिक उत्पादों का आयात करता है। कोल गैसीफिकेशन के माध्यम से इन आयातों में कटौती करके विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत की जा सकती है और घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूती मिल सकती है।
गौरतलब है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक और उपभोक्ता देश है, और कोल इंडिया लिमिटेड विश्व की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है। भारत के पास दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा कोयला भंडार है, जो 400 अरब टन से अधिक है।
सरकार की व्यापक प्रोत्साहन योजना
केंद्र सरकार ने देशभर में सरफेस कोल और लिग्नाइट गैसीफिकेशन परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कुल ₹46,000 करोड़ तक की प्रोत्साहन राशि को मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक गैस, मेथनॉल, अमोनिया और अन्य आवश्यक फीडस्टॉक के आयात पर निर्भरता घटाना और रणनीतिक औद्योगिक उत्पादन को घरेलू स्तर पर स्थापित करना है।
निवेश और रोज़गार की संभावनाएँ
कोयला गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने की इस पहल से ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक का निवेश आने की उम्मीद है। इसके अलावा, कोयला-उत्पादक क्षेत्रों में 25 परियोजनाओं के ज़रिए लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। यह पहल 'आत्मनिर्भर भारत' के विज़न को औद्योगिक धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।