23 सितंबर 2026
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राष्ट्रकवि दिनकर जयंती: PM मोदी ने किया नमन, कहा — शौर्य और आत्मगौरव की ओजस्वी आवाज़ थे दिनकर

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राष्ट्रकवि दिनकर जयंती: PM मोदी ने किया नमन, कहा — शौर्य और आत्मगौरव की ओजस्वी आवाज़ थे दिनकर

सारांश

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर PM मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान ने श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने कहा कि उनकी ओजस्वी कविताएं आज भी शौर्य और आत्मगौरव का संचार करती हैं — ज्ञानपीठ विजेता दिनकर का साहित्य राष्ट्रचिंतन का अमर स्तंभ है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2026 को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
मोदी ने कहा कि दिनकर की रचनाएं जनचेतना, राष्ट्रीय स्वाभिमान, शौर्य और आत्मगौरव का संचार करती हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 'रश्मिरथी', 'कुरुक्षेत्र', 'उर्वशी' सहित दिनकर की कालजयी कृतियों का विशेष उल्लेख किया।
नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान ने भी दिनकर को पद्म भूषण और 'हिंदी के अनन्य सेवक' के रूप में नमन किया।
दिनकर तीन बार राज्यसभा सदस्य रहे; 1972 में 'उर्वशी' के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2026 को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और कहा कि उनकी ओजस्वी कविताएं आज भी देशवासियों के हृदय में शौर्य, तेज और आत्मगौरव का संचार करती हैं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी श्रद्धांजलि साझा करते हुए दिनकर के व्यक्तित्व और कृतित्व को कालजयी बताया।

प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, 'राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उन्हें मेरा शत-शत नमन। जनचेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान के भावों से भरी उनकी ओजस्वी कविताएं आज भी देशवासियों के हृदय में शौर्य, तेज और आत्मगौरव का संचार करती हैं।' उन्होंने आगे कहा कि दिनकर की रचनाएं साहित्य को समृद्ध करने के साथ-साथ मातृभूमि के प्रति समर्पण को भी प्रेरित करती हैं और उनका विराट व्यक्तित्व एवं कालजयी कृतित्व युगों-युगों तक भारतवासियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।

लोकसभा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्रियों की भावांजलि

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी एक्स पर भावपूर्ण नमन करते हुए लिखा कि हिंदी साहित्य के आकाश में दिनकर जी का स्थान केवल एक महान कवि के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे साहित्यकार के रूप में है जिनकी लेखनी ने राष्ट्र की चेतना, जनभावनाओं और सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया।

बिरला ने विशेष रूप से दिनकर की कृतियों — 'रश्मिरथी', 'कुरुक्षेत्र', 'उर्वशी', 'रेणुका' और 'संस्कृति के चार अध्याय' — का उल्लेख करते हुए कहा कि इन रचनाओं ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया और भारतीय समाज एवं राष्ट्रचिंतन को नई दृष्टि प्रदान की। उन्होंने यह भी स्मरण किया कि दिनकर तीन बार राज्यसभा के सदस्य रहे और संसद के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पद्म भूषण से विभूषित दिनकर जी को 'श्रेष्ठ कवि और लेखक' बताते हुए विनम्र अभिवादन किया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें 'हिन्दी के अनन्य सेवक' की संज्ञा देते हुए कहा कि उनकी ओजस्वी रचनाएं राष्ट्रीय चेतना को सदैव स्वर देती रहेंगी।

दिनकर की साहित्यिक विरासत

रामधारी सिंह दिनकर हिंदी साहित्य के उन विरले कवियों में गिने जाते हैं जिन्होंने एक साथ वीर रस और करुण रस दोनों में महारत हासिल की। उनकी 'रश्मिरथी' और 'कुरुक्षेत्र' महाभारत की पृष्ठभूमि पर रचित महाकाव्य हैं, जबकि 'उर्वशी' के लिए उन्हें 1972 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था — हिंदी साहित्य का यह सर्वोच्च सम्मान उनकी अमर रचनाशीलता का प्रमाण है।

गौरतलब है कि दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के सिमरिया में हुआ था और उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत के निर्माण तक अपनी लेखनी से जनचेतना को जागृत किया। यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी साहित्य और भाषाई गौरव को लेकर राष्ट्रीय विमर्श तेज हो रहा है।

राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व

दिनकर जी का व्यक्तित्व केवल साहित्यिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक भी था। तीन बार राज्यसभा सदस्य रहे दिनकर ने संसद में भी राष्ट्र की आवाज़ उठाई। प्रधानमंत्री मोदी सहित कई नेताओं का उनकी जयंती पर एक साथ श्रद्धांजलि अर्पित करना, हिंदी साहित्य की उस परंपरा के प्रति सम्मान को दर्शाता है जो राष्ट्रीय भावना की नींव रही है। दिनकर की रचनाएं आज भी स्कूलों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक मंचों पर उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी स्वतंत्रता संग्राम के दौर में थीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हिंदी भाषा और राष्ट्रवादी साहित्य को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रखने की सचेत कोशिश है। यह ऐसे दौर में उल्लेखनीय है जब हिंदी बनाम क्षेत्रीय भाषाओं पर बहस तेज़ है — दिनकर का नाम लेना एक सांस्कृतिक संदेश भी देता है। हालाँकि, असली श्रद्धांजलि तब होगी जब उनकी रचनाओं को पाठ्यक्रम में पर्याप्त स्थान मिले और उनके सामाजिक न्याय के विमर्श को भी उतनी ही प्रमुखता दी जाए जितनी उनके वीर रस को।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर कौन थे?
रामधारी सिंह दिनकर हिंदी साहित्य के महान कवि थे जिनका जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के सिमरिया में हुआ था। उन्हें 'रश्मिरथी', 'कुरुक्षेत्र' और 'उर्वशी' जैसी कालजयी रचनाओं के लिए जाना जाता है और 1972 में 'उर्वशी' के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
PM मोदी ने दिनकर जयंती पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि दिनकर की ओजस्वी कविताएं जनचेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान से भरी हैं और आज भी देशवासियों के हृदय में शौर्य, तेज और आत्मगौरव का संचार करती हैं। उन्होंने दिनकर के विराट व्यक्तित्व को युगों-युगों तक मार्गदर्शक बताया।
दिनकर की प्रमुख रचनाएं कौन-सी हैं?
दिनकर की प्रमुख कृतियों में 'रश्मिरथी', 'कुरुक्षेत्र', 'उर्वशी', 'रेणुका' और 'संस्कृति के चार अध्याय' शामिल हैं। इन रचनाओं ने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने के साथ-साथ भारतीय समाज और राष्ट्रचिंतन को भी नई दृष्टि प्रदान की।
दिनकर को कौन-से पुरस्कार मिले थे?
रामधारी सिंह दिनकर को 1972 में 'उर्वशी' के लिए हिंदी साहित्य का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था। इसके अलावा उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था और वे तीन बार राज्यसभा के सदस्य रहे।
दिनकर जयंती 2026 पर किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
23 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट कर दिनकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उनकी साहित्यिक विरासत और राष्ट्रीय चेतना में उनके योगदान को रेखांकित किया।
राष्ट्र प्रेस
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