के. कामराज जयंती: PM मोदी, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और खड़गे ने स्वतंत्रता सेनानी को दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
स्वतंत्रता सेनानी और भारत रत्न थिरु के. कामराज की जयंती पर 15 जुलाई को देश के शीर्ष नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कामराज के जीवन और योगदान को याद किया।
प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा कि कामराज भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक दिग्गज और असाधारण जन-नेता थे, जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र-निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा, "शिक्षा, समावेशी विकास और वंचितों के कल्याण जैसे क्षेत्रों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता आज भी पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती है।"
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का संदेश
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एक्स पर पोस्ट कर कामराज को सादगी, ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि कामराज ने हर बच्चे को शिक्षा मिले, इस उद्देश्य से हज़ारों स्कूल खोले और गरीब व ग्रामीण छात्रों की शिक्षा का रास्ता तैयार किया।
राधाकृष्णन ने आगे कहा कि औद्योगिक विकास, सिंचाई सुविधाओं, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण के लिए कामराज की दूरदर्शी पहल ने तमिलनाडु की प्रगति की मज़बूत नींव रखी। उनके अनुसार, कामराज के उच्च आदर्श और निस्वार्थ सार्वजनिक जीवन देश की प्रगति के लिए काम करने वालों के लिए प्रेरणा की किरण बने रहेंगे।
खड़गे ने याद किए मिड-डे मील के सूत्रधार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर लिखा कि कामराज अपनी सादगी और ईमानदारी के लिए जाने जाते थे और तमिलनाडु के लोगों द्वारा बेहद सम्मानित थे। खड़गे ने कहा, "कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और भारत रत्न से सम्मानित के. कामराज ने 'मिड-डे मील' जैसी क्रांतिकारी योजनाएं शुरू कीं, जिनसे वंचित बच्चों को आज भी मुफ्त शिक्षा मिल रही है।" उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र-निर्माण में कामराज के योगदान ने भारत के कल्याणकारी ढाँचे पर गहरा और स्थायी प्रभाव डाला है।
के. कामराज: एक परिचय
के. कामराज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। उन्हें 'किंगमेकर' के रूप में भी जाना जाता था। शिक्षा के प्रसार, विशेषकर मिड-डे मील योजना के ज़रिए स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक मानी जाती है। उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। गौरतलब है कि उनकी जयंती हर वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर मनाई जाती है और सर्वदलीय श्रद्धांजलि इस बात की पुष्टि करती है कि उनकी विरासत राजनीतिक सीमाओं से परे है।
आगे की राह
कामराज की जयंती पर इस सर्वदलीय श्रद्धांजलि ने एक बार फिर उनकी शिक्षा और सामाजिक न्याय की विरासत को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। उनके द्वारा शुरू की गई मिड-डे मील जैसी योजनाएँ आज भी करोड़ों बच्चों के जीवन को प्रभावित कर रही हैं।