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पीएमसीएच प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह हटाए गए: निजी क्लिनिक में मिले, सरकारी गाड़ी भी खड़ी थी बाहर

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पीएमसीएच प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह हटाए गए: निजी क्लिनिक में मिले, सरकारी गाड़ी भी खड़ी थी बाहर

सारांश

बिहार स्वास्थ्य विभाग ने पीएमसीएच के प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को हटा दिया — मंत्री के दौरे पर बिना सूचना गायब रहे, और सत्यापन में निजी क्लिनिक के बाहर सरकारी गाड़ी खड़ी मिली। उन्हें बेतिया मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित किया गया।

मुख्य बातें

बिहार स्वास्थ्य विभाग ने 25 जून 2026 को पीएमसीएच, पटना के प्रभारी प्राचार्य डॉ.
नरेंद्र प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से हटाया।
23 जून को मंत्री निशांत कुमार के दौरे पर डॉ.
सिंह बिना सूचना, अवकाश आवेदन या प्रभार हस्तांतरण के अनुपस्थित पाए गए।
सत्यापन में पाया गया कि वे कार्यालय अवधि में अपने निजी क्लिनिक में थे और बाहर सरकारी वाहन खड़ा था।
विभाग ने इसे प्रशासनिक लापरवाही, कर्तव्यहीनता और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में रखा।
सिंह को राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में मनोरोग विभाग में प्राध्यापक के रूप में पदस्थापित किया गया।

बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने 25 जून 2026 को पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) के प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से उनके पद के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया है। विभाग ने प्रशासनिक लापरवाही, अनधिकृत अनुपस्थिति और सरकारी संसाधनों के निजी दुरुपयोग को इस कार्रवाई का आधार बताया है।

मंत्री के दौरे पर क्या हुआ

23 जून को पीएमसीएच, पटना में एक पूर्व निर्धारित आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित था, जिसमें मंत्री निशांत कुमार का दौरा शामिल था। इस दौरे के दौरान प्राचार्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक विषयों पर स्थलीय विचार-विमर्श किया जाना था। विभागीय अधिसूचना के अनुसार, डॉ. सिंह बिना किसी पूर्व सूचना, अवकाश आवेदन या प्रभार हस्तांतरण के अनुपस्थित पाए गए।

अधिकारियों ने उनके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। यह स्थिति विभाग के लिए गंभीर प्रशासनिक चूक मानी गई।

निजी क्लिनिक में मिले, सरकारी वाहन भी खड़ा था

स्वास्थ्य विभाग ने जब अनुपस्थिति का सत्यापन कराया, तो पाया गया कि डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह कार्यालय अवधि के दौरान अपने निजी क्लिनिक में मौजूद थे। इससे भी अधिक गंभीर बात यह रही कि उनके क्लिनिक के बाहर विभागीय सरकारी वाहन खड़ा पाया गया।

विभाग ने इसे सरकारी संसाधनों के स्पष्ट निजी दुरुपयोग की श्रेणी में रखा है। अधिसूचना में कहा गया है कि यह कृत्य पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही और कर्तव्यहीनता को दर्शाता है।

विभागीय कार्रवाई और नई पदस्थापना

स्वास्थ्य विभाग ने सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के साथ डॉ. सिंह को पीएमसीएच के प्रभारी प्राचार्य पद के अतिरिक्त प्रभार से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया। उन्हें अब राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में मनोरोग विभाग में प्राध्यापक के पद पर पदस्थापित किया गया है।

गौरतलब है कि पीएमसीएच बिहार का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण सरकारी चिकित्सा संस्थान है, जहाँ प्राचार्य पद की जवाबदेही अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है।

आम जनता और अस्पताल प्रशासन पर असर

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई को पीएमसीएच प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी अस्पतालों में प्रशासनिक अनुशासन और उपस्थिति को लेकर राज्य सरकार सख्त रुख अपना रही है।

नए प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर विभाग की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन शीघ्र व्यवस्था किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह संसाधन दुरुपयोग का प्रत्यक्ष प्रमाण है। असली सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई एकबारगी उदाहरण बनेगी या बिहार के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में व्यवस्थागत जवाबदेही की शुरुआत।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को पीएमसीएच से क्यों हटाया गया?
बिहार स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासनिक लापरवाही, अनधिकृत अनुपस्थिति और सरकारी वाहन के निजी उपयोग के आधार पर उन्हें हटाया। 23 जून को मंत्री के दौरे पर वे बिना किसी सूचना के अनुपस्थित थे और सत्यापन में अपने निजी क्लिनिक में पाए गए।
डॉ. सिंह को अब कहाँ पदस्थापित किया गया है?
उन्हें राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में मनोरोग विभाग में प्राध्यापक के पद पर स्थानांतरित किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है।
सरकारी वाहन दुरुपयोग का मामला क्या है?
सत्यापन के दौरान पाया गया कि कार्यालय अवधि में डॉ. सिंह के निजी क्लिनिक के बाहर विभागीय सरकारी वाहन खड़ा था। स्वास्थ्य विभाग ने इसे सरकारी संसाधनों के निजी उपयोग के लिए दुरुपयोग माना है।
पीएमसीएच में अब प्रभारी प्राचार्य कौन होगा?
विभाग की ओर से नए प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। शीघ्र व्यवस्था किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या इस कार्रवाई को सक्षम प्राधिकार की मंजूरी मिली है?
हाँ, स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के साथ जारी किया गया है और यह पीएमसीएच में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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