मोदी का अपमान देश का अपमान है: मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी की कड़ी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया इमाम संगठन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी ने 2 अगस्त को एक वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध हाल के विरोध प्रदर्शनों में इस्तेमाल किए गए अपशब्दों की कड़ी निंदा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री इस देश के अभिभावक हैं और उनका अपमान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे भारत का अपमान है।
मुख्य इमाम का बयान
इमाम इलियासी ने अपने वीडियो संदेश में कहा, 'मेरी भी एक जिम्मेदारी है और एक इमाम के तौर पर मैं अपना फर्ज निभाना चाहता हूँ।' उन्होंने कहा कि 20 जुलाई से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों को पूरी दुनिया ने देखा। उनके अनुसार, 'हर किसी को विरोध करने का अधिकार है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन यह सब शालीनता के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।'
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पर चिंता
इमाम इलियासी ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को पहुँचाए गए नुकसान पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी बसों और गाड़ियों में आग लगाई गई, सड़कें जाम की गईं और आगजनी की घटनाएँ हुईं। उनके शब्दों में, 'सरकारी संपत्ति हम सबकी है, इसलिए ऐसी हरकतें आखिरकार जनता का ही नुकसान करती हैं।'
भारतीय संस्कृति और बड़ों के सम्मान की दलील
मुख्य इमाम ने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का हवाला देते हुए कहा कि परिवारों के भीतर भी मतभेद होते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बड़ों का अपमान किया जाए। उन्होंने आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और उनकी माताजी के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों को 'अमर्यादित' बताया और कहा कि यह देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ।
मोदी की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का संदर्भ
इमाम इलियासी ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री मोदी को 37 देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हैं — एक ऐसी उपलब्धि जो भारत के इतिहास में किसी अन्य प्रधानमंत्री को नहीं मिली। उन्होंने कहा, 'जब आप उनका अपमान करते हैं, तो क्या हमारे संस्कार हमें यही सिखाते हैं? हम क्या संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं?'
आगे क्या
इमाम इलियासी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब 20 जुलाई से जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज है। गौरतलब है कि मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व की ओर से इस तरह की सार्वजनिक अपील असामान्य मानी जाती है और इसे व्यापक सामाजिक सामंजस्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठन इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।