संजय निरुपम का विपक्ष पर हमला: 'मोदी की मितव्ययिता अपील के बाद विपक्ष मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने 12 मई 2026 को मुंबई में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील के बाद से पूरा विपक्ष "मानसिक रूप से विक्षिप्त" हो गया है। निरुपम ने यह बयान उस संदर्भ में दिया जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने प्रधानमंत्री की उक्त अपील की आलोचना की थी।
मोदी की अपील और विपक्ष की प्रतिक्रिया
निरुपम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की स्थिति को देखते हुए खर्च पर लगाम लगाने और यथासंभव विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की थी। उन्होंने कहा, "देश की जनता ने प्रधानमंत्री की अपील को स्वीकार कर लिया है, लेकिन विपक्ष के नेता विरोध कर रहे हैं। इस विरोध के कारण विपक्ष का और भी बुरा हाल होगा।"
निरुपम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जबसे देशवासियों से मितव्ययी होने की अपील की है और कहा कि एक साल सोना मत खरीदिए, डीजल-पेट्रोल और खाने के तेल की खपत कम करिए, तब से पूरा विपक्ष मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया है। दिल्ली से लेकर मुंबई तक सारे विपक्षी कभी प्रधानमंत्री के प्रोटोकॉल पर सवाल उठा रहे हैं, कभी अर्थव्यवस्था के आसन्न संकट के लिए सरकार को दोष दे रहे हैं।"
विपक्ष पर निशाना: प्रोटोकॉल और सुरक्षा सवाल
निरुपम ने विपक्ष से तीखे सवाल किए — "क्या पश्चिम एशिया का युद्ध हमने शुरू किया? वैश्विक अर्थव्यवस्था के इस दौर में युद्ध कहीं भी हो, उसका साया क्या हम पर नहीं पड़ेगा?" उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी कुंठा के कारण प्रधानमंत्री के प्रोटोकॉल पर सवाल उठाकर उनकी सुरक्षा का महत्व कम कर रहा है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, "क्या प्रधानमंत्री भी पैदल चलें? क्या वे अपनी गाड़ी खुद चलाएं या वे भी वर्क फ्रॉम होम करें?"
अर्थव्यवस्था पर निरुपम का पक्ष
निरुपम ने स्पष्ट किया कि फिलहाल देश में कोई संकट नहीं है — डीजल-पेट्रोल पर्याप्त है और विदेशी मुद्रा भंडार भी ठीक है। उन्होंने कहा कि विदेशी संस्थाएँ बाज़ार से हाथ खींच रही हैं, इसलिए भविष्य में विदेशी मुद्रा का संकट पैदा हो सकता है और इसी कारण सोने की खरीद टालने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने कहा, "यह चिंता सिर्फ प्रधानमंत्री की नहीं, देश के हर नागरिक की होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष मानसिक रूप से इतना दिवालिया हो गया है कि संकट की इस घड़ी में भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहा है।"
सुजीत बोस की ईडी गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया
इसी बयान में संजय निरुपम ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस की प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तारी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बोस ने नगरपालिकाओं में नौकरियों के नाम पर एक बड़ा रैकेट चलाया था और कथित तौर पर उनकी तरफ से करीब 150 सिफारिशें मिली हैं। निरुपम के अनुसार, हर नौकरी के लिए पैसे लिए गए और बोस के बैंक खाते में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मामले में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की भूमिका संदिग्ध लग रही है और ममता सरकार में हुए घोटालों की व्यापक जाँच होनी चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पहले से ही कई भ्रष्टाचार मामलों को लेकर केंद्रीय एजेंसियों के निशाने पर है। निरुपम के इस बयान से आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।