अजय राय के बयान पर प्रवीण खंडेलवाल का पलटवार: 'यह कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति का आईना है'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने 22 मई 2026 को कांग्रेस नेता अजय राय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह बयान केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की समूची राजनीतिक मानसिकता और संस्कृति को उजागर करता है। नई दिल्ली में दिए गए इस बयान में खंडेलवाल ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी पर भी तीखे सवाल उठाए।
कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल
खंडेलवाल ने कहा कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी — तीनों में से किसी ने भी अजय राय के विवादित बयान पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह चुप्पी पार्टी की मौन सहमति मानी जाए। उनके अनुसार, ऐसे बयानों पर नेतृत्व का मौन रहना लोकतांत्रिक राजनीतिक मर्यादाओं के लिए शुभ संकेत नहीं है।
खंडेलवाल ने यह भी कहा कि इसी तरह के विवादित बयान कांग्रेस को जनता के बीच कमज़ोर करते रहे हैं और चुनावी प्रदर्शन पर भी इसका असर पड़ रहा है।
विपक्षी गठबंधन पर निशाना
सांसद खंडेलवाल ने विपक्षी गठबंधन को 'ठगबंधन' करार देते हुए कहा कि यह अवसरवादी दलों का एक ढीला-ढाला समूह है जिसमें हर पार्टी अपने निजी हितों को प्राथमिकता देती है। उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) के नेता अखिलेश यादव के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि इससे गठबंधन के भीतर एकजुटता की कमी साफ़ झलकती है।
खंडेलवाल ने कहा कि आने वाले समय में यह और स्पष्ट होगा कि यह गठबंधन केवल कागज़ों पर था — ज़मीन पर इसका कोई ठोस आधार नहीं। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता ऐसे अवसरवादी गठजोड़ों को भाँप लेती है और समय पर उचित जवाब देती है।
विकसित भारत 2047 और मोदी की कार्यशैली
खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य महज़ एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय मिशन है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, सांसद, विधायक और सभी जनप्रतिनिधि मिलकर इस लक्ष्य की दिशा में काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हर स्तर पर जिम्मेदारियाँ तय की जा रही हैं और यदि यही समन्वय बना रहा तो भारत 2047 तक निश्चित रूप से विश्व की अग्रणी पंक्ति में खड़ा होगा।
बकरीद दिशा-निर्देशों का स्वागत
खंडेलवाल ने दिल्ली सरकार के उस निर्देश का स्वागत किया जिसमें बकरीद के दौरान गोवंश, गाय, बछड़े, ऊंट और अन्य प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर रोक संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक त्योहार की अपनी मर्यादा होती है और उसी के दायरे में उसे मनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है, इसलिए गोवंश की सुरक्षा अनिवार्य है। खंडेलवाल ने माँग की कि गोवंश की हत्या करने वालों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो और इस संदर्भ में कानून को और अधिक सख्त बनाया जाए।
राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक मर्यादा को लेकर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि विपक्षी दलों पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से इस तरह के हमले हाल के महीनों में बढ़े हैं। आने वाले दिनों में कांग्रेस की प्रतिक्रिया और अजय राय के बयान पर पार्टी का आधिकारिक रुख इस विवाद की दिशा तय करेगा।