28 जुलाई 2026
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बलवंत सिंह राजोआना की फांसी उम्रकैद में बदले: चंदूमाजरा ने पंजाब राज्यपाल से उठाई मांग

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बलवंत सिंह राजोआना की फांसी उम्रकैद में बदले: चंदूमाजरा ने पंजाब राज्यपाल से उठाई मांग

सारांश

शिरोमणि अकाली दल (पुनार सुरजीत) के नेता चंदूमाजरा ने पंजाब राज्यपाल से मिलकर राजोआना की फांसी उम्रकैद में बदलने, जगतार सिंह की पैरोल, एसजीपीसी चुनाव और करतारपुर कॉरिडोर जैसे लंबित पंथिक मुद्दे उठाए। राज्यपाल ने मामला केंद्रीय गृह मंत्री तक पहुँचाने का आश्वासन दिया।

मुख्य बातें

प्रेम सिंह चंदूमाजरा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने 28 जुलाई 2026 को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की।
बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा उम्रकैद में बदलने की माँग दोहराई गई; राजोआना 1995 में मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी हैं।
जगतार सिंह की बीमार माँ से मिलने के लिए मानवीय आधार पर पैरोल देने का अनुरोध किया गया।
राज्यपाल ने इन मुद्दों को केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया।
एसजीपीसी चुनाव जल्द कराने और करतारपुर साहिब कॉरिडोर को सुचारू रखने की माँग भी रखी गई।
चंदूमाजरा ने पंजाब सरकार से फार्मेसी पेपर लीक पर जवाबदेही तय करने की माँग की।

शिरोमणि अकाली दल (पुनार सुरजीत) के वरिष्ठ नेता प्रेम सिंह चंदूमाजरा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने 28 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की और पंथिक तथा पंजाब से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने, जगतार सिंह की पैरोल, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के चुनाव और करतारपुर साहिब कॉरिडोर को सुचारू रूप से खोलने की माँगें राज्यपाल के समक्ष रखीं।

मुख्य माँगें और मुद्दे

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि जगतार सिंह की माँ गंभीर रूप से बीमार हैं और मानवीय आधार पर उन्हें पैरोल दी जानी चाहिए ताकि वे अपनी माँ से मिल सकें। चंदूमाजरा ने कहा कि राज्यपाल ने इस मामले को केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष उठाने और समाधान का प्रयास करने का आश्वासन दिया है।

प्रतिनिधिमंडल ने बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की माँग भी दोहराई। गौरतलब है कि 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में राजोआना को दोषी ठहराया गया था और यह मामला वर्षों से लंबित है।

एसजीपीसी चुनाव और करतारपुर कॉरिडोर

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के आम चुनाव जल्द कराने की माँग भी राज्यपाल के समक्ष रखी गई। चंदूमाजरा ने कहा कि ये सभी पंथिक मुद्दे लंबे समय से अनसुलझे हैं और इन पर गंभीरता से निर्णय लिया जाना चाहिए। इसके साथ ही करतारपुर साहिब कॉरिडोर को निर्बाध रूप से खुला रखने की माँग भी रखी गई।

पेपर लीक पर केंद्र की सराहना, पंजाब सरकार पर निशाना

चंदूमाजरा ने हालिया पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि छात्रों की माँग स्वीकार कर देश को संभावित अराजकता से बचाने का प्रयास किया गया है और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर निष्काम भावना से उठाया जाए तो उसका समाधान संभव है।

वहीं, पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने सवाल किया कि राज्य में फार्मेसी परीक्षा का पेपर लीक होने के बावजूद संबंधित मंत्री से इस्तीफा क्यों नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) और उसका राष्ट्रीय नेतृत्व यह दावा करता रहा है कि पंजाब में कोई पेपर लीक नहीं हुआ, जबकि फार्मेसी परीक्षा का मामला सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है।

युवाओं के भविष्य पर जोर

चंदूमाजरा ने स्पष्ट कहा कि युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि विवादों का समाधान संवाद, तर्क और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए ताकि जनता का भरोसा बना रहे।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पंजाब में पंथिक मुद्दों पर राजनीतिक सरगर्मी तेज है और एसजीपीसी चुनावों की माँग विभिन्न दलों की ओर से लगातार उठाई जा रही है। आगामी दिनों में राज्यपाल की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ इन मुद्दों पर संवाद की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ठोस परिणाम नहीं आता। राज्यपाल का 'गृह मंत्री को उठाएंगे' वाला आश्वासन नया नहीं है; असली सवाल यह है कि केंद्र इस बार कोई समयसीमा देगा या नहीं। एसजीपीसी चुनावों की लंबित स्थिति सिख धार्मिक प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलवंत सिंह राजोआना कौन हैं और उनकी फांसी की सजा का मामला क्या है?
बलवंत सिंह राजोआना को 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था और उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी। अकाली दल सहित कई पंथिक संगठन लंबे समय से इस सजा को उम्रकैद में बदलने की माँग करते आ रहे हैं।
चंदूमाजरा ने राज्यपाल से मुलाकात में कौन-कौन से मुद्दे उठाए?
प्रतिनिधिमंडल ने चार प्रमुख मुद्दे उठाए — बलवंत सिंह राजोआना की फांसी उम्रकैद में बदलना, जगतार सिंह को मानवीय आधार पर पैरोल, एसजीपीसी के आम चुनाव जल्द कराना और करतारपुर साहिब कॉरिडोर को सुचारू रखना। इसके अलावा पंजाब में पेपर लीक पर जवाबदेही की माँग भी रखी गई।
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने प्रतिनिधिमंडल को क्या आश्वासन दिया?
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे जगतार सिंह की पैरोल और राजोआना की सजा के मामले को केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष उठाएंगे और समाधान का प्रयास करेंगे।
जगतार सिंह की पैरोल की माँग क्यों उठाई गई?
चंदूमाजरा के अनुसार जगतार सिंह की माँ गंभीर रूप से बीमार हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मानवीय आधार पर पैरोल देने का अनुरोध किया ताकि वे अपनी माँ से मिल सकें, भले ही कानूनी प्रक्रियाओं में कोई बाधा हो।
चंदूमाजरा ने पंजाब सरकार पर क्या आरोप लगाए?
चंदूमाजरा ने कहा कि पंजाब में फार्मेसी परीक्षा का पेपर लीक होने के बावजूद AAP सरकार ने संबंधित मंत्री से इस्तीफा नहीं लिया और न ही जवाबदेही तय की। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ पर स्पष्ट जवाब दे।
राष्ट्र प्रेस
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