चंद्रमा पर पृथ्वी से कहीं अधिक क्रेटर्स क्यों हैं? वायुमंडल की अनुपस्थिति है मुख्य वजह
सारांश
मुख्य बातें
चंद्रमा की सतह पर हजारों की संख्या में क्रेटर्स (गड्ढे) मौजूद हैं, जबकि पृथ्वी पर अब तक केवल 180 के करीब ज्ञात क्रेटर्स दर्ज किए गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि चंद्रमा पर कोई वायुमंडल नहीं है, जिसके चलते उल्कापिंडों के टकराने के निशान अरबों वर्षों तक ज्यों के त्यों बने रहते हैं। 31 मई को आकाश में दिखने वाली पूर्णिमा इस वैज्ञानिक जिज्ञासा को और गहरा कर देती है।
चंद्रमा पर क्रेटर्स की भरमार क्यों
पृथ्वी और चंद्रमा दोनों पिछले 4.5 अरब वर्षों से उल्कापिंडों और क्षुद्रग्रहों के निरंतर प्रहार झेलते आए हैं। फर्क यह है कि पृथ्वी पर मौजूद प्राकृतिक प्रक्रियाएं इन टकराव के निशानों को समय के साथ मिटा देती हैं, जबकि चंद्रमा पर ऐसी कोई प्रक्रिया सक्रिय नहीं है। यही कारण है कि चंद्रमा की सतह पर बने क्रेटर्स करोड़ों-अरबों वर्ष पुराने होने के बावजूद आज भी स्पष्ट दिखाई देते हैं।
पृथ्वी पर गड्ढे क्यों मिट जाते हैं — तीन प्रमुख कारण
पहला कारण — अपरदन: पृथ्वी पर हवा, वर्षा, नदियाँ, समुद्र और वनस्पति निरंतर चट्टानों को घिसती और तोड़ती रहती हैं। इस अपरदन प्रक्रिया के चलते कोई भी क्रेटर धीरे-धीरे भर जाता है या पूरी तरह समतल हो जाता है। चंद्रमा पर वायुमंडल, जल और मौसम का पूर्ण अभाव है, इसलिए एक बार बना गड्ढा लाखों-करोड़ों वर्षों तक अपरिवर्तित बना रहता है — यहाँ तक कि अपोलो अभियान के दौरान अंतरिक्षयात्रियों के पैरों के निशान आज भी चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित हैं।
दूसरा कारण — प्लेट टेक्टोनिक्स: पृथ्वी की भूपर्पटी लगातार गतिशील रहती है — नई चट्टानें बनती हैं और पुरानी चट्टानें पृथ्वी के अंदर धंसती रहती हैं। इस प्रक्रिया में पुराने क्रेटर्स दब जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं। चंद्रमा पर ऐसी कोई भूगर्भीय हलचल नहीं है — वहाँ की सतह अरबों वर्षों से स्थिर है।
तीसरा कारण — ज्वालामुखी गतिविधि: पृथ्वी पर ज्वालामुखी विस्फोट से निकला लावा कई क्रेटर्स को ढक देता है। चंद्रमा पर भी अतीत में ज्वालामुखी सक्रिय थे और उन्होंने कुछ बड़े गड्ढों को ढका था, किंतु पिछले तीन अरब वर्षों से वहाँ कोई ज्वालामुखी गतिविधि नहीं हुई है।
चंद्रमा — प्राकृतिक इतिहास का जीवित संग्रहालय
वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रमा की सतह वास्तव में सौरमंडल के शुरुआती इतिहास का एक अमूल्य अभिलेखागार है। जहाँ पृथ्वी पर प्राकृतिक प्रक्रियाएं अतीत के साक्ष्य मिटाती रहती हैं, वहीं चंद्रमा उन्हें अक्षुण्ण रखता है। यही कारण है कि चंद्रमा के क्रेटर्स का अध्ययन वैज्ञानिकों को प्रारंभिक सौरमंडल की बमबारी की घटनाओं को समझने में मदद करता है।
पूर्णिमा पर चंद्रमा का नजारा और वैज्ञानिक महत्व
31 मई की पूर्णिमा की रात चंद्रमा को नंगी आँखों से देखने पर उसकी सतह पर बने गहरे धब्बे और गड्ढे स्पष्ट दिखाई देंगे। ये धब्बे दरअसल अरबों वर्ष पुराने उल्कापिंड-प्रहार के निशान हैं, जो पृथ्वी पर होते तो कब के मिट चुके होते। चंद्रमा का यह स्वरूप हमें याद दिलाता है कि अंतरिक्ष में हमारा पड़ोसी ग्रह एक अत्यंत भिन्न और निर्जन दुनिया है।