पुणे गणेश विसर्जन 2026: 33 घंटे 27 मिनट की ऐतिहासिक शोभायात्रा, सवा 6 लाख से अधिक गणपतियों को विदाई
सारांश
मुख्य बातें
पुणे में 25-26 सितंबर 2026 को आयोजित गणेश विसर्जन शोभायात्रा कुल 33 घंटे 27 मिनट तक चली — जो शहर की गणेशोत्सव परंपरा में एक उल्लेखनीय अध्याय बन गई। ढोल-ताशों की गूँज और गुलाल की रंग-बिरंगी बरसात के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने बप्पा को भावभीनी विदाई दी। पुलिस आँकड़ों के अनुसार, इस पूरे आयोजन में 4,170 सार्वजनिक और 6,24,685 घरेलू गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
शोभायात्रा का आगाज़ और समापन
मुख्य विसर्जन शोभायात्रा 25 सितंबर की सुबह 8 बजकर 43 मिनट पर श्री कसबा गणपति की भव्य सवारी के साथ आरंभ हुई। कसबा गणपति को पुणे के 'मान के पहले गणपति' का दर्जा प्राप्त है। एक के बाद एक विभिन्न गणेश मंडलों की शोभायात्राएँ विसर्जन मार्ग पर आगे बढ़ती रहीं। अंततः 26 सितंबर की शाम 6 बजकर 10 मिनट पर मुख्य विसर्जन शोभायात्रा शांतिपूर्वक संपन्न हुई।
ऐतिहासिक लक्ष्मी रोड से निकली मान के पाँचों गणपतियों की शोभायात्रा को देखने के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब सड़कों के दोनों ओर उमड़ पड़ा। रातभर भक्तगण बप्पा के जयकारे लगाते हुए सड़कों पर डटे रहे।
मुख्य मंडलों की शोभायात्राओं की अवधि
पाँच प्रमुख 'मनाचे गणपतियों' में सर्वाधिक समय केसरी वाडा गणपति की शोभायात्रा में लगा, जो 8 घंटे 46 मिनट तक चली। कसबा गणपति की शोभायात्रा करीब 8 घंटे चली और नटेश्वर घाट पर विसर्जन हुआ। तुलशीबाग गणपति की शोभायात्रा 8 घंटे 10 मिनट, तांबडी जोगेश्वरी गणपति की 7 घंटे 44 मिनट और गुरुजी तालीम गणपति की 7 घंटे 26 मिनट तक चली।
प्रसिद्ध श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति की विसर्जन शोभायात्रा शाम 4 बजकर 18 मिनट पर निकली और 4 घंटे 9 मिनट में पूरी हुई। वहीं, श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति की शोभायात्रा सबसे लंबी — 11 घंटे 8 मिनट — रही और इनका विसर्जन 26 सितंबर की सुबह संपन्न हुआ। अखिल मंडई मंडल की यात्रा 9 घंटे 29 मिनट, हुतात्मा बाबू गेणू मंडळ की 7 घंटे 22 मिनट और जिलब्या मारुती मंडळ की 7 घंटे 10 मिनट तक चली।
विसर्जन के आँकड़े
पुलिस द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, डेढ़ दिन से लेकर अनंत चतुर्दशी और अंतिम दिन तक कुल 6,28,855 गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया, जिनमें 4,170 सार्वजनिक और 6,24,685 घरेलू प्रतिमाएँ शामिल थीं। सबसे अधिक विसर्जन 11वें दिन — यानी अनंत चतुर्दशी — को हुआ, जब 2,41,548 घरेलू और 2,927 सार्वजनिक गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इसके अतिरिक्त 35 सार्वजनिक गणपतियों का विसर्जन मौके पर ही संपन्न कराया गया। विसर्जन नटेश्वर और पांचाळेश्वर घाट पर किए गए।
सुरक्षा व्यवस्था और गिरफ्तारी
विशाल आयोजन के दौरान पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। इस बीच एक मामले में शिवाजीनगर पुलिस थाने में 26 सितंबर की सुबह 7 बजे भारतीय न्याय संहिता के साथ शस्त्र अधिनियम और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। जाँच में 11 आरोपियों की पहचान के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उनके पास से करीब ₹30 लाख 57 हज़ार 50 का सामान जब्त किया गया।
पुलिस उपायुक्त (विशेष शाखा), पुणे शहर, डॉ. प्रशांत अमृतकर ने बताया कि गणेशोत्सव और विसर्जन का पूरा आयोजन बिना किसी बड़ी अप्रिय घटना के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन को लेकर हर साल बहस तेज़ होती है। आने वाले दिनों में पुणे नगर निगम और पुलिस प्रशासन इस वर्ष के आयोजन की समीक्षा कर अगले वर्ष के लिए बेहतर प्रबंधन की रूपरेखा तैयार करेगा। गणेशोत्सव पुणे की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है और हर वर्ष यह उत्सव नई ऊँचाइयाँ छूता है।