26 सितंबर 2026
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लालबागचा राजा विसर्जन 2026: गिरगांव चौपाटी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, 11 दिनों बाद भावुक विदाई

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लालबागचा राजा विसर्जन 2026: गिरगांव चौपाटी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, 11 दिनों बाद भावुक विदाई

सारांश

11 दिनों की भक्ति और उत्सव के बाद मुंबई की गिरगांव चौपाटी पर लालबागचा राजा को भावुक विदाई दी गई। हज़ारों श्रद्धालु सुबह से जमे रहे। 1934 से चली आ रही इस परंपरा में इस बार BMC की पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था ने भी सराहना बटोरी।

मुख्य बातें

लालबागचा राजा का विसर्जन 26 सितंबर 2026 को गिरगांव चौपाटी, मुंबई पर संपन्न हुआ।
11 दिनों के गणेशोत्सव के बाद हज़ारों श्रद्धालु सुबह छह बजे से चौपाटी पर जमा हो गए थे।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने छोटी प्रतिमाओं के पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन के लिए विशेष टैंक बनाए।
चिंतामणि का विसर्जन लालबागचा राजा से पहले सम्पन्न हुआ।
श्रद्धालुओं ने 2027 में राजा के पुनः आगमन की कामना की।

मुंबई के गिरगांव चौपाटी पर 26 सितंबर 2026 को लालबागचा राजा के विसर्जन के अवसर पर हज़ारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। 11 दिनों के भव्य गणेशोत्सव की समाप्ति पर भक्तों ने भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना की और उन्हें भावभरी विदाई दी। मुंबई की इस सबसे प्रतिष्ठित गणेश मूर्ति का विसर्जन हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है।

चौपाटी पर श्रद्धालुओं का उत्साह

माहीम-दादर क्षेत्र की निवासी कल्याणी जादव ने बताया, 'हम लोग हर वर्ष पंडाल में पूजा देखने जाते हैं, लेकिन विसर्जन स्थल का मजा अलग होता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, सभी का अपना जज्बा होता है।' उन्होंने कहा कि वे सुबह छह बजे से चौपाटी पर मौजूद थीं और घंटों की प्रतीक्षा के बावजूद थकान का अहसास नहीं हुआ। उनकी प्रार्थना थी कि गणपति बप्पा सभी को खुशहाल रखें, देश की तरक्की हो और समाज में सकारात्मक बदलाव आए।

बीएमसी की व्यवस्था की सराहना

कल्याणी जादव ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की तैयारियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि छोटी गणेश प्रतिमाओं के पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन के लिए BMC ने विशेष टैंक बनाए हैं, जिससे भीड़ का प्रबंधन बेहतर हुआ और समुद्र तट पर प्रदूषण को कम करने में मदद मिली। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों से BMC पर्यावरणीय कारणों से कृत्रिम जलाशयों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है।

भक्तों की भावुक विदाई

विसर्जन स्थल पर मौजूद सुमित ने कहा, 'गणपति बप्पा की 11 दिनों तक बहुत सेवा की और अब विसर्जन से दिल भर आया है, लेकिन विसर्जन करना ज़रूरी है। बप्पा से प्रार्थना की कि शांति बनी रहे, सभी लोग एक-दूसरे से प्रेम बनाए रखें।' उन्होंने यह भी बताया कि चिंतामणि का विसर्जन पहले ही हो चुका था, जबकि लालबागचा राजा की बारी बाद में आई।

एक अन्य श्रद्धालु हर्ष ने कहा कि इस बार के उत्सव में इतना खो गए कि 11 दिन कैसे बीत गए, पता ही नहीं चला। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2027 जल्द आए और 'राजा' फिर दर्शन दें।

लालबागचा राजा की विरासत

लालबागचा राजा मुंबई के सबसे पुराने और सबसे अधिक दर्शनीय गणेश पंडालों में से एक है, जिसकी स्थापना 1934 में हुई थी। यह मूर्ति 'नवसाचा गणपति' यानी मनोकामना पूर्ण करने वाले गणेश के रूप में प्रसिद्ध है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों भक्त इसके दर्शन के लिए आते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पर्यावरणीय दृष्टिकोण से विसर्जन की परंपरा को अधिक टिकाऊ बनाने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।

इस वर्ष भी गिरगांव चौपाटी पर श्रद्धालुओं का उत्साह और भक्ति का ज्वार देखते ही बनता था — जो इस बात का प्रमाण है कि मुंबई की सांस्कृतिक आत्मा में गणेशोत्सव की जड़ें कितनी गहरी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मुंबई की सामूहिक पहचान का वार्षिक उत्सव है — जो 1934 से अनवरत चला आ रहा है। इस वर्ष BMC की कृत्रिम टैंक व्यवस्था पर श्रद्धालुओं की सराहना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन बड़ी प्रतिमाओं का सीधे समुद्र में विसर्जन अभी भी पर्यावरणीय चिंता का विषय बना हुआ है। जब तक नीति और परंपरा के बीच यह खाई नहीं पाटी जाती, 'हरित विसर्जन' की बात अधूरी रहेगी।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लालबागचा राजा का विसर्जन 2026 में कहाँ हुआ?
लालबागचा राजा का विसर्जन 26 सितंबर 2026 को मुंबई के गिरगांव चौपाटी पर हुआ। 11 दिनों के गणेशोत्सव के समापन पर हज़ारों श्रद्धालु यहाँ एकत्रित हुए।
लालबागचा राजा क्या है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
लालबागचा राजा मुंबई का सबसे प्रसिद्ध गणेश पंडाल है, जिसकी स्थापना 1934 में हुई थी। इसे 'नवसाचा गणपति' यानी मनोकामना पूर्ण करने वाले गणेश के रूप में जाना जाता है और हर वर्ष देश-विदेश से लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
BMC ने गणेश विसर्जन के लिए क्या व्यवस्था की थी?
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने इस बार छोटी गणेश प्रतिमाओं के पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन के लिए विशेष टैंक बनाए। श्रद्धालुओं ने इस व्यवस्था की सराहना की और कहा कि इससे भीड़ प्रबंधन और स्वच्छता में मदद मिली।
2026 के गणेशोत्सव में श्रद्धालुओं का अनुभव कैसा रहा?
श्रद्धालुओं ने इस वर्ष के उत्सव को अत्यंत भावुक और यादगार बताया। कई भक्त सुबह छह बजे से चौपाटी पर मौजूद थे और घंटों की प्रतीक्षा के बाद भी उनका उत्साह कम नहीं हुआ। उन्होंने 2027 में राजा के पुनः आगमन की कामना की।
गणेशोत्सव 2026 कितने दिन चला?
गणेशोत्सव 2026 कुल 11 दिनों तक चला। 26 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर विसर्जन के साथ इसका समापन हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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