जितेंद्र आव्हाड को जान से मारने की धमकी: पुणे से सिक्योरिटी सुपरवाइजर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जितेंद्र आव्हाड को फोन कॉल और संदेशों के ज़रिए कथित तौर पर जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुणे पुलिस ने 21 अक्टूबर 2026 को एक आरोपी को हिरासत में लिया है। आरोपी की पहचान विशाल माधवराव बिच्चेवाड (39) के रूप में हुई है, जो पुणे के लोणी कंद क्षेत्र में किराए के मकान में रहता था और एक निजी कंपनी में सिक्योरिटी सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, 19 अक्टूबर 2026 की रात एक अज्ञात मोबाइल नंबर से आव्हाड को बार-बार कॉल किए गए और आपत्तिजनक संदेश भेजे गए। कथित तौर पर कॉल करने वाले ने उन्हें गालियां देते हुए जान से मारने की खुली धमकी दी। इस घटना के बाद ठाणे के वर्तक नगर पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।
मकान मालिक की सतर्कता बनी गिरफ्तारी की कुंजी
जांच में एक अहम मोड़ तब आया जब आव्हाड ने धमकी भरे मोबाइल नंबर का विवरण सोशल मीडिया पर साझा किया। यह पोस्ट देखने के बाद विशाल बिच्चेवाड के मकान मालिक अनिल कंद ने उस नंबर की पहचान अपने किरायेदार के रूप में की। इसके बाद उन्होंने आरोपी को स्वयं लोणी कंद पुलिस स्टेशन पहुंचाया और पुलिस को सूचित किया।
गौरतलब है कि यह नागरिक सहयोग का एक उल्लेखनीय उदाहरण है, जिसने पुलिस की जांच को त्वरित गति दी और आरोपी तक पहुंचना संभव बनाया।
पुलिस की कार्रवाई
लोणी कंद पुलिस स्टेशन की वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुनीता रोकडे ने बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस ने नंबर और आरोपी की पहचान का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया। पुष्टि होने पर तुरंत ठाणे के वर्तक नगर पुलिस स्टेशन को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद ठाणे पुलिस की एक विशेष टीम पुणे पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर ठाणे ले गई।
जांच का दायरा
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बिच्चेवाड ने एक वरिष्ठ राजनेता को धमकी देने की हिम्मत क्यों की, उसका असल मकसद क्या था और क्या इस षड्यंत्र में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका है। फिलहाल आरोपी से गहन पूछताछ जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक तनाव का माहौल है और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की घटनाओं पर नज़र रखी जा रही है।
आगामी दिनों में जांच के निष्कर्षों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि यह धमकी किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा थी अथवा एकल व्यक्ति की कार्रवाई।