₹88 करोड़ की निवेश ठगी का मास्टरमाइंड अविनाश राठौड़ यूएई से प्रत्यर्पित, पुणे पुलिस ने किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने ₹88 करोड़ की कथित निवेश धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी अविनाश अर्जुन राठौड़ को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रत्यर्पित कर 23 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर लिया। राठौड़ पर आरोप है कि उन्होंने बाणेर, पुणे स्थित एपीएस वेल्थ वेंचर्स एलएलपी के ज़रिए निवेशकों को अधिक रिटर्न का प्रलोभन देकर करोड़ों रुपये की ठगी की।
मामले का पूरा घटनाक्रम
इस प्रकरण की शुरुआत 20 अप्रैल 2023 को हुई, जब चतुःश्रृंगी पुलिस स्टेशन, पुणे में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने कंपनी में ₹86 लाख 37 हज़ार 500 का निवेश किया था, जो वापस नहीं किया गया। जाँच आगे बढ़ने पर स्पष्ट हुआ कि यह मामला केवल एक निवेशक तक सीमित नहीं था — बड़ी संख्या में लोगों से इसी तरह निवेश कराया गया और कुल मिलाकर ₹88 करोड़ की कथित धोखाधड़ी की गई। इसके बाद जाँच आर्थिक अपराध शाखा, पुणे शहर को सौंप दी गई।
फरारी और अंतरराष्ट्रीय तलाश
मामला दर्ज होते ही अविनाश राठौड़ और उनकी पत्नी विशाखा अविनाश राठौड़ फरार हो गए। पुलिस को आशंका थी कि दोनों देश छोड़कर विदेश भाग सकते हैं, इसलिए 24 अप्रैल 2024 को दोनों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया। पुणे के विशेष एमपीआईडी न्यायालय, शिवाजीनगर ने स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया और भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया भी आरंभ की। दोनों के पासपोर्ट निलंबित कर दिए गए और न्यायालय में दोषारोप पत्र भी दाखिल किया गया। देशभर में तलाश के बाद भी सफलता न मिलने पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद ली गई और 4 जून 2026 को दोनों आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया।
प्रत्यर्पण और गिरफ्तारी
रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर यूएई की संबंधित एजेंसियों ने अविनाश राठौड़ को हिरासत में लिया। 23 जुलाई 2026 को उन्हें भारत प्रत्यर्पित किया गया। मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। इसके बाद आरोपी को पुणे लाकर अदालत में पेश किया गया, जहाँ न्यायालय ने विस्तृत पूछताछ के लिए 10 दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की।
जाँच का दायरा और आगे की कार्रवाई
आर्थिक अपराध शाखा अब यह पता लगाने में जुटी है कि निवेशकों से जुटाए गए ₹88 करोड़ कहाँ और किस तरह खर्च किए गए। जाँचकर्ता यह भी पड़ताल कर रहे हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल थे, कितनी संपत्तियाँ खरीदी गईं, रकम विदेश भेजी गई या नहीं, और अन्य सहयोगियों की क्या भूमिका रही। पुणे पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जो अन्य आरोपी अभी भी विदेश में छिपे हैं, उन्हें भी कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत लाने की कार्रवाई जारी है और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय युद्धस्तर पर चल रहा है।