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राजकोट पुलिस ने ₹9.61 करोड़ की निवेश धोखाधड़ी में इंदौर से आरोपी हार्दिक तन्ना को दबोचा

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राजकोट पुलिस ने ₹9.61 करोड़ की निवेश धोखाधड़ी में इंदौर से आरोपी हार्दिक तन्ना को दबोचा

सारांश

राजकोट पुलिस ने इंदौर से हार्दिक तन्ना को गिरफ्तार किया, जिस पर 'द्वारकाधीश एंटरप्राइज' के नाम पर निवेशकों से ₹9.61 करोड़ ठगने का आरोप है। 2023 से चली इस कथित योजना में पहले छोटे रिटर्न देकर भरोसा जीता गया, फिर बड़ी रकम लेकर आरोपी फरार हो गया।

मुख्य बातें

राजकोट सिटी पुलिस ने हार्दिक तन्ना को इंदौर के विजय नगर से गिरफ्तार किया।
आरोपी पर 'द्वारकाधीश एंटरप्राइज' के जरिए निवेशकों से ₹9,61,91,492 की धोखाधड़ी का आरोप है।
कथित ठगी 2023 में शुरू हुई; डेबिट कार्ड स्वाइप और लोन के नाम पर निवेश जुटाया गया।
19 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(5) और गुजरात जमाकर्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 3 के तहत मामला दर्ज।
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर अपराध स्वीकार किया; आगे की कानूनी कार्रवाई जारी।

राजकोट सिटी पुलिस ने 25 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश के इंदौर से हार्दिक तन्ना को गिरफ्तार किया, जिस पर 'द्वारकाधीश एंटरप्राइज' नामक फर्म के माध्यम से शिकायतकर्ता और कई निवेशकों से कुल ₹9,61,91,492 रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अधिक रिटर्न का प्रलोभन देकर निवेशकों का विश्वास अर्जित किया और बाद में रकम लेकर राजकोट से फरार हो गया।

धोखाधड़ी का तरीका

पुलिस के अनुसार, कथित धोखाधड़ी 2023 में शुरू हुई थी। तन्ना ने निवेशकों को बताया कि द्वारकाधीश एंटरप्राइज विभिन्न डेबिट कार्ड स्वाइप करने और उनके एवज में लोन देने का कारोबार करती है। कथित तौर पर उसने अच्छे रिटर्न का भरोसा दिलाकर लोगों को निवेश के लिए राजी किया।

शुरुआती चरण में आरोपी ने निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें रिटर्न के रूप में कुछ राशि वापस भी की। भरोसा कायम होने के बाद उसने और अधिक मुनाफे का वादा करते हुए बैंक खातों एवं नकद — दोनों माध्यमों से अतिरिक्त निवेश जुटाया। अंततः उसने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया और राजकोट से भाग गया।

गिरफ्तारी की कार्रवाई

19 अगस्त को गांधीग्राम-2 (यूनिवर्सिटी) पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(5) और गुजरात प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट्स ऑफ डिपॉजिटर्स (इन फाइनेंशियल एस्टेब्लिशमेंट्स) एक्ट, 2003 की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया।

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस इंस्पेक्टर के.के. गोहिल ने पुलिस सब-इंस्पेक्टर आर.आर. कोठिया और उनकी टीम को आरोपी का पता लगाने का निर्देश दिया। तकनीकी और गुप्त स्रोतों से जानकारी मिली कि तन्ना इंदौर में है, जिसके बाद टीम को वहाँ भेजा गया और उसे विजय नगर इलाके से गिरफ्तार किया गया।

आरोपी का कबूलनामा

पूछताछ के दौरान हार्दिक तन्ना ने कथित तौर पर अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसे राजकोट वापस लाया गया और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका

पुलिस ने बताया कि यह पूरा ऑपरेशन राजकोट सिटी पुलिस कमिश्नर ब्रजेशकुमार झा और एडिशनल पुलिस कमिश्नर चैतन्य मांडलिक के निर्देशन में चलाया गया। यह मामला उन निवेशकों के लिए चेतावनी है जो अनियमित और अपंजीकृत फर्मों में असाधारण रिटर्न के वादे पर भरोसा करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बार-बार दोहराया जाता है। असली सवाल यह है कि ₹9.61 करोड़ जुटाने की प्रक्रिया में कितने निवेशक शामिल थे और क्या उनकी रकम वापसी की कोई ठोस कानूनी व्यवस्था है — जो अक्सर इन मामलों में सबसे कमज़ोर कड़ी साबित होती है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हार्दिक तन्ना पर क्या आरोप हैं?
हार्दिक तन्ना पर 'द्वारकाधीश एंटरप्राइज' के माध्यम से निवेशकों को अधिक रिटर्न का लालच देकर ₹9,61,91,492 की धोखाधड़ी करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, उसने 2023 से यह कथित ठगी शुरू की और बाद में राजकोट से फरार हो गया।
राजकोट पुलिस ने आरोपी को कहाँ से और कैसे गिरफ्तार किया?
तकनीकी और गुप्त स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर गांधीग्राम-2 (यूनिवर्सिटी) पुलिस स्टेशन की टीम ने हार्दिक तन्ना को मध्य प्रदेश के इंदौर के विजय नगर इलाके से गिरफ्तार किया। पुलिस इंस्पेक्टर के.के. गोहिल के निर्देश पर सब-इंस्पेक्टर आर.आर. कोठिया की टीम ने यह कार्रवाई की।
द्वारकाधीश एंटरप्राइज की कथित धोखाधड़ी का तरीका क्या था?
आरोपी ने दावा किया कि फर्म डेबिट कार्ड स्वाइप करने और उनके बदले लोन देने का काम करती है। पहले निवेशकों को थोड़े रिटर्न देकर भरोसा जीता गया, फिर बैंक खातों और नकद दोनों माध्यमों से बड़ी रकम जुटाई गई और बाद में पैसे वापस नहीं किए गए।
इस मामले में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
19 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(5) और गुजरात प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट्स ऑफ डिपॉजिटर्स (इन फाइनेंशियल एस्टेब्लिशमेंट्स) एक्ट, 2003 की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
निवेशकों को इस तरह की धोखाधड़ी से कैसे बचना चाहिए?
वित्तीय नियामकों के अनुसार, किसी भी अपंजीकृत फर्म में असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का वादा एक खतरे का संकेत है। निवेश से पहले फर्म का सेबी (SEBI) या आरबीआई (RBI) के साथ पंजीकरण जाँचना और लिखित अनुबंध लेना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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