गिफ्ट सिटी डेटा फर्म धोखाधड़ी: 33,000 निवेशक प्रभावित, ₹400 करोड़ से अधिक का कथित घोटाला

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गिफ्ट सिटी डेटा फर्म धोखाधड़ी: 33,000 निवेशक प्रभावित, ₹400 करोड़ से अधिक का कथित घोटाला

सारांश

गिफ्ट सिटी से संचालित 'शूट स्पेस डिजिटल' पर 33,000 निवेशकों को ठगने का आरोप — ₹400 करोड़ से अधिक का कथित घोटाला, दो महीने से रिटर्न बंद, कंपनी मालिक उत्पल पटेल फरार। पुलिस जांच जारी, CID क्राइम के शामिल होने की संभावना।

मुख्य बातें

शूट स्पेस डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड पर गिफ्ट सिटी, गांधीनगर से संचालित हाई-रिटर्न निवेश धोखाधड़ी का आरोप।
कथित तौर पर 33,000 से अधिक निवेशक प्रभावित, कुल घोटाला ₹400 करोड़ से अधिक का अनुमानित।
कंपनी ने 5% मासिक रिटर्न का वादा किया था; तीन वर्षों तक भुगतान होता रहा, फिर लगभग दो महीने पहले बंद हो गया।
प्रत्येक निवेशक का निवेश ₹5 लाख से ₹3 करोड़ तक; कुछ को ₹50–85 लाख का भुगतान अभी बाकी।
कंपनी मालिक उत्पल पटेल का गांधीनगर स्थित घर बंद मिला, पुलिस टीमें तलाश में।
अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं ; डभोडा पुलिस बयान दर्ज कर रही है, CID क्राइम के शामिल होने की संभावना।

गांधीनगर में गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) से संचालित कंपनी 'शूट स्पेस डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड' के खिलाफ हाई-रिटर्न निवेश योजना में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के आरोप सामने आए हैं। 7 मई 2026 को अधिकारियों ने बताया कि कई राज्यों में 33,000 से अधिक निवेशक प्रभावित हो सकते हैं और कथित धोखाधड़ी की कुल राशि ₹400 करोड़ से भी अधिक हो सकती है।

निवेश योजना का स्वरूप

पुलिस की शुरुआती जांच और निवेशकों की शिकायतों के अनुसार, कंपनी ने कथित तौर पर 'डिजिटल डेटा स्टोरेज स्पेस' (टेराबाइट्स में मापा जाने वाला) में निवेश की एक योजना का प्रचार किया, जिसमें लगभग 5% मासिक रिटर्न देने का वादा किया गया था। यह मॉडल गुजरात, हरियाणा और गोवा के निवेशकों को आकर्षित करने में सफल रहा।

शुरुआती भुगतान लगभग तीन वर्षों तक नियमित रूप से किए गए, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा और उन्होंने और अधिक रकम इस योजना में लगाई। बताया जाता है कि प्रत्येक निवेशक का निवेश ₹5 लाख से ₹3 करोड़ तक था, और कुछ शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्हें अभी भी ₹50 लाख से ₹85 लाख तक का भुगतान मिलना बाकी है।

भुगतान बंद होने के बाद बढ़ा तनाव

मामला तब गंभीर हो गया जब कथित तौर पर लगभग दो महीने पहले भुगतान बंद हो गए और कंपनी के अधिकारियों से संपर्क करना भी मुश्किल हो गया। इसके बाद बुधवार की शाम को निवेशकों के कई समूह गिफ्ट सिटी स्थित कंपनी के दफ्तर के बाहर एकत्रित हो गए, जिससे तनावपूर्ण माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए डभोडा पुलिस स्टेशन से पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

कई निवेशकों ने दावा किया है कि उन्होंने अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी, कर्ज और संपत्ति बेचकर मिली रकम इस योजना में लगाई थी।

पुलिस की प्रतिक्रिया और जांच की स्थिति

डभोडा पुलिस इंस्पेक्टर अनिल चौहान ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया,

संपादकीय दृष्टिकोण

जो हाल के वर्षों में गुजरात और अन्य राज्यों में बार-बार देखा गया है। तीन वर्षों तक नियमित भुगतान और फिर अचानक बंद होना — यह क्लासिक पॉन्जी संरचना की पहचान है। असली चिंता यह है कि कंपनी के दफ्तर गिफ्ट सिटी, नोएडा और जम्मू-कश्मीर में होने के बावजूद नियामक तंत्र इतने लंबे समय तक इसे क्यों नहीं पकड़ सका।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शूट स्पेस डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड घोटाला क्या है?
यह गिफ्ट सिटी, गांधीनगर से संचालित एक कंपनी पर लगा धोखाधड़ी का आरोप है, जिसमें कथित तौर पर 'डिजिटल डेटा स्टोरेज स्पेस' में निवेश के बदले 5% मासिक रिटर्न का वादा किया गया था। लगभग दो महीने पहले भुगतान बंद होने के बाद 33,000 से अधिक निवेशकों ने शिकायत दर्ज कराई है।
इस धोखाधड़ी से कितने लोग प्रभावित हुए हैं और कितनी रकम फंसी है?
शुरुआती अनुमानों के अनुसार गुजरात, हरियाणा और गोवा सहित कई राज्यों में 33,000 से अधिक निवेशक प्रभावित हो सकते हैं। कथित धोखाधड़ी की कुल राशि ₹400 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।
क्या इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई है?
डभोडा पुलिस इंस्पेक्टर अनिल चौहान के अनुसार अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस बयान दर्ज कर रही है और अब तक 32-33 आवेदन मिले हैं। जांच के नतीजों के आधार पर राज्य की CID क्राइम भी इसमें शामिल हो सकती है।
कंपनी के मालिक उत्पल पटेल कहाँ हैं?
पुलिस के अनुसार कंपनी के मालिक के रूप में पहचाने गए उत्पल पटेल का गांधीनगर स्थित घर बंद मिला और उनका कोई अता-पता नहीं है। पुलिस की टीमें उनकी तलाश कर रही हैं।
क्या यह पॉन्जी स्कीम थी?
जांचकर्ता वित्तीय लेन-देन और निवेशकों के साथ हुए समझौतों की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह एक व्यवस्थित 'पॉन्जी-टाइप' व्यवस्था थी। तीन वर्षों तक नियमित भुगतान और फिर अचानक बंद होने का पैटर्न हाल के महीनों में गुजरात में रिपोर्ट की गई अन्य हाई-रिटर्न योजनाओं से मेल खाता है।
राष्ट्र प्रेस
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