अहिल्यानगर: ₹1.61 करोड़ की निवेश ठगी में फरार आरोपी सागर पवार गिरफ्तार, EOW की कस्टडी में

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अहिल्यानगर: ₹1.61 करोड़ की निवेश ठगी में फरार आरोपी सागर पवार गिरफ्तार, EOW की कस्टडी में

सारांश

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में ₹1.61 करोड़ की निवेश ठगी का फरार आरोपी सागर पवार चालीसगांव में चाचा के घर से गिरफ्तार। 'एंसिटेक सॉल्यूशंस' में भारी रिटर्न का झांसा देकर की गई थी ठगी। आरोपी अब EOW की हिरासत में है।

मुख्य बातें

सागर सुधाकर पवार को 17 मई 2026 को चालीसगांव के मोतीबाग नगर से गिरफ्तार किया गया।
आरोपी पर अवधूत विनायक केदार से ' एंसिटेक सॉल्यूशंस ' में निवेश के नाम पर ₹1.61 करोड़ से अधिक ठगने का आरोप है।
मामला पहले शेवगांव थाने में दर्ज हुआ, बाद में अहिल्यानगर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपा गया।
API योगेश जाधव की टीम और चालीसगांव पुलिस ने गोपनीय सूचना के आधार पर संयुक्त कार्रवाई की।
आरोपी फिलहाल अहिल्यानगर EOW की हिरासत में है, आगे की जाँच जारी है।

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में ₹1.61 करोड़ से अधिक की निवेश धोखाधड़ी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी सागर सुधाकर पवार को पुलिस ने 17 मई 2026 को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को अब अहिल्यानगर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की हिरासत में रखा गया है।

मुख्य घटनाक्रम

संभाजीनगर के डोंगांव निवासी सागर सुधाकर पवार पर आरोप है कि उसने अहिल्यानगर के शेवगांव क्षेत्र के 46 वर्षीय निवासी अवधूत विनायक केदार को 'एंसिटेक सॉल्यूशंस' नामक फर्म में निवेश पर भारी रिटर्न का झांसा देकर ₹1.61 करोड़ से अधिक की राशि ठग ली। शिकायत मिलने के बाद शेवगांव थाने में मामला दर्ज किया गया, जिसे बाद में अहिल्यानगर आर्थिक अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दिया गया।

गिरफ्तारी की कार्रवाई

EOW को गोपनीय सूत्रों से जानकारी मिली कि फरार आरोपी चालीसगांव सिटी पुलिस थाने की सीमा में छिपा हुआ है। इस पर असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर योगेश जाधव अपनी टीम के साथ तत्काल चालीसगांव पहुँचे।

चालीसगांव सिटी थाने के पुलिस इंस्पेक्टर अमित कुमार मानेल के मार्गदर्शन में पुलिस कांस्टेबल अशोक नाना पाटिल और आशुतोष सोनवणे ने जाँच शुरू की। गोपनीय जानकारी के आधार पर पता चला कि आरोपी चालीसगांव के मोतीबाग नगर इलाके में हनुमान मंदिर के पास अपने चाचा के घर पर रह रहा है। पुलिस ने तत्काल जाल बिछाया और आरोपी को दबोच लिया।

आरोपी की सुपुर्दगी

गिरफ्तारी के बाद सागर पवार को पहले चालीसगांव सिटी पुलिस स्टेशन लाया गया और फिर API योगेश जाधव की टीम को सौंप दिया गया। फिलहाल आरोपी अहिल्यानगर आर्थिक अपराध शाखा की हिरासत में है।

आम जनता पर असर

यह मामला उन निवेश धोखाधड़ी योजनाओं की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है जिनमें फर्जी कंपनियों के नाम पर असामान्य रिटर्न का वादा करके आम नागरिकों की जमा-पूँजी लूटी जाती है। महाराष्ट्र EOW ऐसे मामलों में सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रही है। मामले में आगे की जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भरोसे का दुरुपयोग, और फिर फरारी। अहिल्यानगर EOW की यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि अंतर-जिला समन्वय काम करता है, लेकिन असली सवाल यह है कि पीड़ित की ₹1.61 करोड़ की राशि की वसूली कब और कैसे होगी। महाराष्ट्र में ऐसे निवेश घोटालों की बढ़ती संख्या यह भी संकेत देती है कि वित्तीय साक्षरता और सतर्कता अभियानों की ज़रूरत अभी पूरी नहीं हुई है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहिल्यानगर ठगी मामले में किसे गिरफ्तार किया गया?
संभाजीनगर के डोंगांव निवासी सागर सुधाकर पवार को गिरफ्तार किया गया है। वह 'एंसिटेक सॉल्यूशंस' फर्म में निवेश पर भारी रिटर्न का वादा करके ₹1.61 करोड़ से अधिक ठगने के आरोप में फरार था।
एंसिटेक सॉल्यूशंस ठगी क्या है?
'एंसिटेक सॉल्यूशंस' एक फर्म है जिसमें निवेश पर असामान्य रिटर्न का झांसा देकर अहिल्यानगर के शेवगांव निवासी अवधूत विनायक केदार से ₹1.61 करोड़ से अधिक की राशि ठगी गई। इस मामले में शेवगांव थाने में केस दर्ज हुआ और बाद में EOW को सौंपा गया।
आरोपी को कहाँ से और कैसे पकड़ा गया?
गोपनीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को पता चला कि आरोपी चालीसगांव के मोतीबाग नगर में हनुमान मंदिर के पास अपने चाचा के घर पर छिपा है। अहिल्यानगर EOW और चालीसगांव पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे वहीं से दबोचा गया।
अब आरोपी की क्या स्थिति है?
गिरफ्तारी के बाद सागर पवार को अहिल्यानगर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की हिरासत में रखा गया है। मामले में आगे की जाँच जारी है।
इस मामले में कौन-से पुलिस अधिकारी शामिल थे?
अहिल्यानगर EOW के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर योगेश जाधव ने अपनी टीम के साथ कार्रवाई की। चालीसगांव सिटी थाने के पुलिस इंस्पेक्टर अमित कुमार मानेल के मार्गदर्शन में कांस्टेबल अशोक नाना पाटिल और आशुतोष सोनवणे ने गोपनीय जानकारी के आधार पर जाँच की।
राष्ट्र प्रेस
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