14 जुलाई 2026
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पुणे में एमडी ड्रग्स लैब का दावा झूठा — सीबीएन ने किया खंडन, केवल उपकरण मिले थे दिघी में

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पुणे में एमडी ड्रग्स लैब का दावा झूठा — सीबीएन ने किया खंडन, केवल उपकरण मिले थे दिघी में

सारांश

पुणे के दिघी में हाईटेक एमडी ड्रग्स लैब की खबरें गलत निकलीं — सीबीएन ने स्पष्ट किया कि वहाँ केवल उपकरण मिले थे। असली लैब जोधपुर में थी और मुख्य आरोपी राजस्थान का निवासी है। 'ऑपरेशन वज्र' के तहत मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई कार्रवाई की आँच पुणे तक पहुँची, लेकिन वहाँ कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

मुख्य बातें

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने 14 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि पुणे के दिघी में कोई सक्रिय एमडी ड्रग्स लैब नहीं मिली थी।
दिघी से केवल ड्रग्स निर्माण के उपकरण बरामद हुए, जो सीलबंद बक्सों में छिपाए गए थे।
मुख्य आरोपी जोधपुर, राजस्थान का निवासी है और मेफेड्रोन लैब वहीं संचालित थी।
'ऑपरेशन वज्र' (फरवरी 2026) के तहत मंदसौर से 8.17 किग्रा और महू से 43.82 किग्रा मेफेड्रोन व 261.32 किग्रा प्रीकर्सर केमिकल्स जब्त हुए।
पुणे के रिश्तेदारों को उपकरणों के उद्देश्य की जानकारी नहीं थी, इसलिए वहाँ से कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।
सीबीएन ने जनता से अपुष्ट खबरों पर भरोसा न कर केवल आधिकारिक स्रोतों पर विश्वास करने की अपील की।

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने 14 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि पुणे के दिघी-भोसरी क्षेत्र में कोई सक्रिय या हाईटेक मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स उत्पादन प्रयोगशाला नहीं मिली थी — वहाँ से केवल ड्रग्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद हुए थे, जिन्हें मुख्य आरोपी ने सीलबंद बक्सों में छिपाकर रखा था। विभाग ने प्रेस नोट जारी कर इस विषय में फैली भ्रामक खबरों का खंडन किया है।

ऑपरेशन वज्र से जुड़ा है मामला

सीबीएन, नीमच (मध्य प्रदेश) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला फरवरी 2026 में चलाए गए 'ऑपरेशन वज्र' से जुड़ा है। इस अभियान के तहत सबसे पहले मध्य प्रदेश के मंदसौर में छापेमारी की गई, जिसमें 8.17 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद हुआ।

जाँच आगे बढ़ने पर अधिकारियों ने महू (मध्य प्रदेश) में कार्रवाई करते हुए 43.82 किलोग्राम मेफेड्रोन, 261.32 किलोग्राम प्रीकर्सर केमिकल्स तथा ड्रग्स निर्माण में उपयोग होने वाले उपकरण जब्त किए।

मुख्य आरोपी जोधपुर का, लैब भी वहीं थी

जाँच में सामने आया कि इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी राजस्थान के जोधपुर का निवासी है और मेफेड्रोन उत्पादन की प्रयोगशाला वहीं संचालित की जा रही थी। आरोपी ने एमडी निर्माण में काम आने वाले कुछ उपकरण पुणे में अपने एक रिश्तेदार के घर पर छिपाकर रखे थे।

इसी सूचना के आधार पर सीबीएन ने जोधपुर और पुणे में एक साथ छापेमारी की। पुणे के दिघी इलाके में कार्रवाई के दौरान उपकरण बरामद हुए, जो सीलबंद बक्सों में रखे गए थे।

पुणे से कोई गिरफ्तारी नहीं, रिश्तेदार अनजान थे

सीबीएन की जाँच में यह भी स्पष्ट हुआ कि जिन रिश्तेदारों के घर ये उपकरण रखे गए थे, उन्हें उनके वास्तविक उपयोग या उद्देश्य की कोई जानकारी नहीं थी। इसी कारण पुणे से किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं की गई।

भ्रामक खबरों पर सीबीएन की चेतावनी

विभाग ने स्पष्ट किया कि पुणे (दिघी) में एमडी ड्रग्स का उत्पादन शुरू होने या कोई सक्रिय ड्रग्स लैब संचालित होने संबंधी खबरें भ्रामक हैं और इनसे आम जनता में गलतफहमी पैदा हो सकती है। सीबीएन ने लोगों से अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करने और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की है।

गौरतलब है कि मेफेड्रोन (एमडी) एक सिंथेटिक मादक पदार्थ है जिसकी तस्करी और निर्माण पर भारत में सख्त प्रतिबंध है। 'ऑपरेशन वज्र' जैसे अभियान देश में ड्रग्स नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में सीबीएन के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं। आगे की जाँच जारी है और मुख्य आरोपी पर कार्रवाई की स्थिति आधिकारिक बयान के ज़रिये सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तथ्यों को नुकसान पहुँचाता है। इस मामले में वास्तविक सफलता मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई कार्रवाई थी, जहाँ से भारी मात्रा में मेफेड्रोन और प्रीकर्सर केमिकल्स जब्त हुए — पुणे कनेक्शन महज एक भंडारण कड़ी थी। मीडिया को चाहिए कि ऑपरेशन के विभिन्न चरणों को स्पष्ट रूप से अलग कर रिपोर्ट करे, ताकि जनता में अनावश्यक भय न पैदा हो और जाँच एजेंसियों की विश्वसनीयता भी बनी रहे।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पुणे के दिघी में सच में एमडी ड्रग्स लैब मिली थी?
नहीं। सीबीएन ने स्पष्ट किया है कि पुणे के दिघी इलाके में कोई सक्रिय या हाईटेक मेफेड्रोन उत्पादन प्रयोगशाला नहीं मिली थी। वहाँ से केवल ड्रग्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद हुए थे, जो सीलबंद बक्सों में छिपाए गए थे।
ऑपरेशन वज्र क्या था और इसमें क्या बरामद हुआ?
ऑपरेशन वज्र फरवरी 2026 में सीबीएन द्वारा चलाया गया अभियान था। इसके तहत मध्य प्रदेश के मंदसौर से 8.17 किलोग्राम मेफेड्रोन और महू से 43.82 किलोग्राम मेफेड्रोन व 261.32 किलोग्राम प्रीकर्सर केमिकल्स जब्त किए गए।
इस ड्रग्स नेटवर्क का मुख्य आरोपी कौन है और लैब कहाँ थी?
जाँच के अनुसार मुख्य आरोपी राजस्थान के जोधपुर का निवासी है और मेफेड्रोन उत्पादन की लैब वहीं संचालित की जा रही थी। उसने कुछ उपकरण पुणे में अपने रिश्तेदार के घर छिपाए थे।
पुणे से किसी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
सीबीएन की जाँच में सामने आया कि पुणे में जिन रिश्तेदारों के घर उपकरण रखे गए थे, उन्हें उनके वास्तविक उपयोग या उद्देश्य की कोई जानकारी नहीं थी। इसी कारण वहाँ से किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई।
सीबीएन ने जनता से क्या अपील की है?
सीबीएन ने लोगों से अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करने और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी को ही सही मानने की अपील की है। विभाग ने कहा कि पुणे में एमडी लैब संबंधी खबरें भ्रामक हैं और इनसे जनता में गलतफहमी पैदा हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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