ऑपरेशन वज्र: सीबीएन ने पुणे में हाई-टेक मेफेड्रोन लैब ध्वस्त की, उज्जैन-जोधपुर से दो साजिशकर्ता गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की मध्य प्रदेश इकाई ने 'ऑपरेशन वज्र' के तहत महाराष्ट्र के पुणे में चल रही एक हाई-टेक मेफेड्रोन (एमडी) निर्माण प्रयोगशाला का भंडाफोड़ किया है। 1 जुलाई से 10 जुलाई 2026 के बीच चलाए गए इस अभियान में गिरोह के दो मुख्य साजिशकर्ताओं को उज्जैन (मध्य प्रदेश) और जोधपुर (राजस्थान) से गिरफ्तार किया गया। यह अंतर्राज्यीय मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ सीबीएन की अब तक की सबसे समन्वित कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
ऑपरेशन की पृष्ठभूमि
यह अभियान फरवरी 2026 में शुरू हुई जांच की कड़ी है। उस दौरान सीबीएन ने मंदसौर में एक यात्री बस से 8.172 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद किया था। इसके बाद महू के थावलाय क्षेत्र में छापेमारी में एक अवैध लैब मिली, जहाँ से 43.820 किलोग्राम मेफेड्रोन, 261.320 किलोग्राम प्रीकर्सर रसायन और अत्याधुनिक निर्माण उपकरण जब्त किए गए थे। गौरतलब है कि उसी जांच के सूत्र खींचते हुए एजेंसी ने पुणे तक अपना दायरा फैलाया।
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
जांच में सामने आया कि गिरोह का मुख्य फरार आरोपी फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर लगातार ठिकाने बदल रहा था। उज्जैन पुलिस के सहयोग से गहन निगरानी के बाद उसे 3 जुलाई 2026 की देर रात उज्जैन से दबोचा गया। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि गिरोह ने पुणे के डिग्गी-भोसरी क्षेत्र में नई हाई-टेक एमडी लैब स्थापित की थी, जिसे जोधपुर स्थित एक अन्य सहयोगी संचालित कर रहा था।
समन्वित छापेमारी और लैब का भंडाफोड़
9 जुलाई 2026 की रात सीबीएन ने पुणे और जोधपुर में एक साथ समन्वित छापेमारी की। भोसरी क्षेत्र में स्थित अवैध प्रयोगशाला से अत्याधुनिक डिजिटल मशीनरी, प्रयोगशाला उपकरण, प्रीकर्सर रसायन और सुरक्षा उपकरण जब्त किए गए। दूसरे साजिशकर्ता को जोधपुर से गिरफ्तार किया गया और लैब को ध्वस्त कर दिया गया। जब्त सामग्री को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत कब्जे में लिया गया है।
आगे की जांच
सीबीएन के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। यह ऑपरेशन इस बात की पुष्टि करता है कि अवैध मादक पदार्थ निर्माण नेटवर्क अब एकाधिक राज्यों में फैले हुए हैं और परिष्कृत तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नेटवर्क को तोड़ने के लिए बहु-राज्यीय समन्वय और निरंतर खुफिया साझेदारी अनिवार्य है।