14 जुलाई 2026
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ऑपरेशन वज्र: सीबीएन ने पुणे में हाई-टेक मेफेड्रोन लैब ध्वस्त की, उज्जैन-जोधपुर से दो साजिशकर्ता गिरफ्तार

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ऑपरेशन वज्र: सीबीएन ने पुणे में हाई-टेक मेफेड्रोन लैब ध्वस्त की, उज्जैन-जोधपुर से दो साजिशकर्ता गिरफ्तार

सारांश

'ऑपरेशन वज्र' महज एक छापेमारी नहीं — यह फरवरी 2026 से चली आ रही जांच की परिणति है। पुणे की हाई-टेक लैब, फर्जी पहचान पत्र और तीन राज्यों में फैला नेटवर्क बताता है कि मादक पदार्थ तस्करी अब औद्योगिक पैमाने पर हो रही है।

मुख्य बातें

सीबीएन की मध्य प्रदेश इकाई ने 'ऑपरेशन वज्र' के तहत 1 से 10 जुलाई 2026 के बीच अभियान चलाया।
पुणे के डिग्गी-भोसरी क्षेत्र में हाई-टेक मेफेड्रोन निर्माण प्रयोगशाला ध्वस्त की गई।
दो मुख्य साजिशकर्ता उज्जैन (3 जुलाई) और जोधपुर (9 जुलाई) से गिरफ्तार।
जांच की जड़ फरवरी 2026 में मंदसौर से 8.172 किग्रा मेफेड्रोन बरामदगी और महू में 43.820 किग्रा की जब्ती से जुड़ी है।
जब्त सामग्री एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत कब्जे में; गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी।

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की मध्य प्रदेश इकाई ने 'ऑपरेशन वज्र' के तहत महाराष्ट्र के पुणे में चल रही एक हाई-टेक मेफेड्रोन (एमडी) निर्माण प्रयोगशाला का भंडाफोड़ किया है। 1 जुलाई से 10 जुलाई 2026 के बीच चलाए गए इस अभियान में गिरोह के दो मुख्य साजिशकर्ताओं को उज्जैन (मध्य प्रदेश) और जोधपुर (राजस्थान) से गिरफ्तार किया गया। यह अंतर्राज्यीय मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ सीबीएन की अब तक की सबसे समन्वित कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

ऑपरेशन की पृष्ठभूमि

यह अभियान फरवरी 2026 में शुरू हुई जांच की कड़ी है। उस दौरान सीबीएन ने मंदसौर में एक यात्री बस से 8.172 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद किया था। इसके बाद महू के थावलाय क्षेत्र में छापेमारी में एक अवैध लैब मिली, जहाँ से 43.820 किलोग्राम मेफेड्रोन, 261.320 किलोग्राम प्रीकर्सर रसायन और अत्याधुनिक निर्माण उपकरण जब्त किए गए थे। गौरतलब है कि उसी जांच के सूत्र खींचते हुए एजेंसी ने पुणे तक अपना दायरा फैलाया।

मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी

जांच में सामने आया कि गिरोह का मुख्य फरार आरोपी फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर लगातार ठिकाने बदल रहा था। उज्जैन पुलिस के सहयोग से गहन निगरानी के बाद उसे 3 जुलाई 2026 की देर रात उज्जैन से दबोचा गया। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि गिरोह ने पुणे के डिग्गी-भोसरी क्षेत्र में नई हाई-टेक एमडी लैब स्थापित की थी, जिसे जोधपुर स्थित एक अन्य सहयोगी संचालित कर रहा था।

समन्वित छापेमारी और लैब का भंडाफोड़

9 जुलाई 2026 की रात सीबीएन ने पुणे और जोधपुर में एक साथ समन्वित छापेमारी की। भोसरी क्षेत्र में स्थित अवैध प्रयोगशाला से अत्याधुनिक डिजिटल मशीनरी, प्रयोगशाला उपकरण, प्रीकर्सर रसायन और सुरक्षा उपकरण जब्त किए गए। दूसरे साजिशकर्ता को जोधपुर से गिरफ्तार किया गया और लैब को ध्वस्त कर दिया गया। जब्त सामग्री को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत कब्जे में लिया गया है।

आगे की जांच

सीबीएन के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। यह ऑपरेशन इस बात की पुष्टि करता है कि अवैध मादक पदार्थ निर्माण नेटवर्क अब एकाधिक राज्यों में फैले हुए हैं और परिष्कृत तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नेटवर्क को तोड़ने के लिए बहु-राज्यीय समन्वय और निरंतर खुफिया साझेदारी अनिवार्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक चेतावनी है — मादक पदार्थ निर्माण अब कुटीर उद्योग से निकलकर डिजिटल मशीनरी और फर्जी पहचान पत्रों वाले संगठित नेटवर्क में तब्दील हो चुका है। सीबीएन की यह सफलता बहु-राज्यीय समन्वय की ताकत दर्शाती है, लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसे नेटवर्क को प्रीकर्सर रसायन कहाँ से और कितनी आसानी से मिल रहे हैं। जब तक आपूर्ति श्रृंखला पर नकेल नहीं कसी जाती, लैब बंद होती रहेंगी और नई खुलती रहेंगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीएन का 'ऑपरेशन वज्र' क्या है?
'ऑपरेशन वज्र' केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की मध्य प्रदेश इकाई द्वारा 1 से 10 जुलाई 2026 के बीच चलाया गया अंतर्राज्यीय मादक पदार्थ-रोधी अभियान है। इसमें पुणे की हाई-टेक मेफेड्रोन लैब ध्वस्त की गई और दो मुख्य साजिशकर्ता गिरफ्तार किए गए।
पुणे में जब्त की गई सामग्री में क्या-क्या शामिल था?
पुणे के भोसरी-डिग्गी क्षेत्र की अवैध प्रयोगशाला से अत्याधुनिक डिजिटल मशीनरी, प्रयोगशाला उपकरण, प्रीकर्सर रसायन और सुरक्षा उपकरण जब्त किए गए। सभी सामग्री एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत कब्जे में ली गई है।
यह जांच कब और कैसे शुरू हुई?
जांच फरवरी 2026 में शुरू हुई जब सीबीएन ने मंदसौर में एक यात्री बस से 8.172 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद किया। इसके बाद महू के थावलाय क्षेत्र में छापेमारी में 43.820 किलोग्राम मेफेड्रोन और 261.320 किलोग्राम प्रीकर्सर रसायन मिले, जिसने जांच को पुणे तक विस्तारित किया।
गिरफ्तार आरोपी पकड़ से कैसे बचते रहे?
जांच के अनुसार मुख्य आरोपी फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर लगातार ठिकाने बदलता रहा। गहन निगरानी और उज्जैन पुलिस के सहयोग से 3 जुलाई 2026 की देर रात उसे उज्जैन से गिरफ्तार किया जा सका।
क्या इस गिरोह के और सदस्य हैं?
सीबीएन के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। दोनों गिरफ्तार साजिशकर्ताओं से पूछताछ से नेटवर्क के और सूत्र सामने आने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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