राजस्थान का वांटेड मेफेड्रोन आरोपी राजुराम बिश्नोई अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने राजस्थान के जालोर जिले के सांचोर तालुका स्थित दंता (बावलिया) गांव के 40 वर्षीय व्यापारी राजुराम बिश्नोई को मेफेड्रोन की अवैध आपूर्ति के सिलसिले में गिरफ्तार किया है। बिश्नोई राजस्थान में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (NDPS) अधिनियम के तहत दर्ज कई मामलों में पहले से वांछित था।
मुख्य घटनाक्रम
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को मिली विशेष सूचना के आधार पर 13 अप्रैल को घी कांटा क्षेत्र स्थित लक्ष्मी मार्केट के नीचे गणेश सिलेक्शन दुकान के पास छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में पुलिस ने मलाराम देवासी (रबारी) और अशोक कुमार दर्जी को मौके पर गिरफ्तार किया।
दोनों आरोपियों के पास कथित तौर पर बिना किसी कानूनी अनुमति या परमिट के 412 ग्राम मेफेड्रोन बरामद हुई, जिसकी बाज़ार कीमत ₹12.36 लाख आंकी गई। जब्ती के बाद डीसीबी पुलिस स्टेशन पार्ट 'सी' में NDPS अधिनियम की धारा 8(सी), 22(सी) और 29 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
राजुराम बिश्नोई की भूमिका और गिरफ्तारी
आगे की जांच में जब्त मेफेड्रोन की आपूर्ति श्रृंखला का सूत्र राजुराम बिश्नोई तक पहुंचा। अधिकारियों ने बताया, "जब्त की गई मेफेड्रोन की खेप की आपूर्ति करने वाले आरोपी का पता राजस्थान के सांचोर तालुका के दंता (बावलिया) गांव में लगाया गया और उसे अहमदाबाद लाकर NDPS अपराध के तहत गिरफ्तार किया गया।"
अधिकारियों के अनुसार बिश्नोई राजस्थान के अबू रोड आरआईआईसीओ पुलिस स्टेशन में NDPS अधिनियम की धारा 8 और 22 के तहत दर्ज एक अन्य मामले में भी पहले से वांछित था।
आरोपी का आपराधिक इतिहास
क्राइम ब्रांच के रिकॉर्ड के अनुसार बिश्नोई पर राजस्थान में पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें शामिल हैं:
2016 में औद्योगिक क्षेत्र पाली पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 379 के तहत चोरी का मामला; 2019 में सांचोर पुलिस स्टेशन में NDPS अधिनियम की धारा 8 और 21 के तहत मामला; 2022 में सांचोर पुलिस स्टेशन में ही धारा 8, 21, 22, 25 और 29 के तहत एक अन्य NDPS मामला; तथा 2022 में ही करदा पुलिस स्टेशन में धारा 8, 22 और 29 के तहत दर्ज मामला।
आगे की जांच
पुलिस ने बताया कि अंतरराज्यीय मादक पदार्थों के नेटवर्क और जब्त मेफेड्रोन के मूल स्रोत का पता लगाने के लिए जांच जारी है। यह मामला राजस्थान-गुजरात के बीच सक्रिय कथित ड्रग सप्लाई चेन की ओर इशारा करता है, जो जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।