2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मध्य प्रदेश ड्रग्स मामला: 90 से अधिक पुलिसकर्मियों पर एफआईआर, कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मध्य प्रदेश ड्रग्स मामला: 90 से अधिक पुलिसकर्मियों पर एफआईआर, कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा

सारांश

मध्य प्रदेश का ड्रग्स मामला अब पुलिस के ही कटघरे में खड़ा है — अदालत के आदेश पर 2 पूर्व एसएचओ समेत 90 से अधिक पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज हुई। कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार की नाकामी बताया। एक राज्य की पुलिस का दूसरे राज्य में इस पैमाने पर आपराधिक कार्रवाई का सामना करना दुर्लभ है।

मुख्य बातें

28 जनवरी 2026 को राजस्थान के झालावाड़ जिले के घटाखेड़ी गाँव में अगर मालवा पुलिस के छापे पर विवाद के बाद यह मामला सामने आया।
पुलिस ने छापे में ₹5 करोड़ के नशीले पदार्थ, रसायन और मशीनरी जब्त करने का दावा किया था।
अदालत के निर्देश पर जांच के बाद दो पूर्व एसएचओ शशि उपाध्याय और रूप सिंह राजपूत समेत 90 से अधिक पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज।
एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं — धमकी, पद का दुरुपयोग, कदाचार और साक्ष्य से छेड़छाड़ — के तहत दर्ज।
पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने भाजपा सरकार पर ड्रग नेटवर्क खत्म करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

मध्य प्रदेश के अगर मालवा से जुड़े एक विवादित ड्रग्स जब्ती मामले में दो पूर्व स्टेशन हाउस अधिकारियों (एसएचओ) समेत 90 से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। न्यायालय के निर्देश पर हुई जांच के बाद राजस्थान के झालावाड़ जिले के दाग पुलिस स्टेशन ने यह कार्रवाई की, जिससे मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार और विपक्षी कांग्रेस के बीच सियासी तकरार तेज हो गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा विवाद 28 जनवरी 2026 को राजस्थान के झालावाड़ जिले के घटाखेड़ी गाँव में अगर मालवा पुलिस द्वारा चलाए गए एक अभियान से जुड़ा है। उस दौरान पुलिस ने दावा किया था कि उसने एक एमडी ड्रग निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया और लगभग ₹5 करोड़ के नशीले पदार्थ, रसायन और मशीनरी जब्त की। इस अभियान को राज्य के नशा-विरोधी अभियान की बड़ी सफलता बताया गया था और दो लोगों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था।

अदालत तक कैसे पहुँचा मामला

आरोपियों के परिजनों और स्थानीय निवासी हामिद खान ने बाद में चौमहला स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि छापा फर्जी था और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं का यह भी दावा है कि पुलिस की एक बड़ी टीम अभियान के दौरान परिवार के कई सदस्यों को गाँव से अपने साथ ले गई थी। अदालत ने इस पर झालावाड़ के पुलिस उपाधीक्षक को जांच का आदेश दिया।

जांच रिपोर्ट और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त आधार पाए और राजस्थान पुलिस को कार्रवाई का निर्देश दिया।

किन पर दर्ज हुई एफआईआर

अदालत के आदेश के बाद झालावाड़ के दाग पुलिस स्टेशन ने अगर कोतवाली के पूर्व एसएचओ शशि उपाध्याय और रूप सिंह राजपूत, पुलिसकर्मी राखी गुर्जर, तीन अन्य नामजद व्यक्तियों तथा लगभग 90 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत यह एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें धमकी देना, पद का दुरुपयोग, कदाचार और साक्ष्य से छेड़छाड़ से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। गौरतलब है कि अदालत के निर्देश पर हुई जांच के बाद एक राज्य के इतने बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों का दूसरे राज्य में आपराधिक कार्रवाई का सामना करना दुर्लभ घटना मानी जाती है।

कांग्रेस का हमला

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया, 'राज्य तेजी से मादक पदार्थों के निर्माण और तस्करी का केंद्र बनता जा रहा है। इस खतरे को रोकने के लिए जिम्मेदार पुलिस बल खुद ही धोखाधड़ी में लिप्त है।' नाथ ने यह भी कहा कि 'भाजपा सरकार नशीले पदार्थों के रैकेटों को खत्म करने या भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। निर्दोष लोगों को नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों में फंसाया जा रहा है, जबकि असली तस्कर अपना अवैध धंधा चलाते जा रहे हैं।'

आगे क्या होगा

यह मामला अब राजस्थान और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गर्माता दिख रहा है। एफआईआर में नामजद और अज्ञात पुलिसकर्मियों की जांच आगे बढ़ने के साथ भाजपा सरकार पर विपक्ष का दबाव और बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में न्यायिक निगरानी की भूमिका आगे भी निर्णायक रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत जवाबदेही की व्यापक कमज़ोरी का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में नशा-विरोधी अभियानों की विश्वसनीयता पहले से ही सवालों के घेरे में है। कांग्रेस का हमला राजनीतिक है, लेकिन सवाल असली है — जब जांच एजेंसी खुद आरोपी बन जाए, तो असली तस्करों की जवाबदेही कौन तय करेगा? न्यायिक निगरानी के बिना यह मामला सिर्फ एक और फाइल बनकर रह सकता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश ड्रग्स मामले में पुलिसकर्मियों पर एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
राजस्थान के झालावाड़ जिले में 28 जनवरी 2026 को अगर मालवा पुलिस द्वारा किए गए ड्रग छापे को फर्जी बताते हुए आरोपियों के परिजनों ने अदालत में याचिका दायर की थी। अदालत के निर्देश पर हुई जांच में प्रथम दृष्टया आपराधिक साक्ष्य मिलने पर 90 से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
किन पुलिसकर्मियों के नाम एफआईआर में दर्ज हैं?
एफआईआर में अगर कोतवाली के पूर्व एसएचओ शशि उपाध्याय और रूप सिंह राजपूत, पुलिसकर्मी राखी गुर्जर और तीन अन्य नामजद व्यक्तियों के साथ-साथ लगभग 90 अज्ञात पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है।
इस मामले में क्या आरोप लगाए गए हैं?
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की उन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है जो धमकी देने, पद के दुरुपयोग, कदाचार और साक्ष्य से छेड़छाड़ से संबंधित हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि छापा फर्जी था और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
कांग्रेस ने इस मामले पर क्या रुख अपनाया है?
पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने भाजपा सरकार पर मध्य प्रदेश में ड्रग नेटवर्क को खत्म करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है जबकि असली तस्कर अपना अवैध धंधा जारी रखे हुए हैं।
यह मामला कानूनी दृष्टि से इतना असामान्य क्यों है?
अदालत के निर्देश पर जांच के बाद एक राज्य के इतने बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों का दूसरे राज्य में आपराधिक कार्रवाई का सामना करना दुर्लभ माना जाता है। इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की भूमिका इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 20 घंटे पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले