पंजाब IED ब्लास्ट: हरदीप सिंह पुरी का भगवंत मान पर तीखा सवाल — 'CM और DGP के बयानों में विरोधाभास क्यों?'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 6 मई 2026 को पंजाब के अमृतसर और जालंधर में हुए IED विस्फोटों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्य के डीजीपी के परस्पर विरोधी बयानों को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। पुरी ने कहा कि जहाँ मुख्यमंत्री इन धमाकों को 'छोटी घटना' बता रहे हैं, वहीं उन्हीं के डीजीपी ने इसे आईएसआई (ISI) समर्थित ऑपरेशन करार दिया है — और यह अंतर्विरोध गंभीर सुरक्षा सवाल खड़ा करता है।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार की रात पंजाब में दो अलग-अलग विस्फोटों ने हड़कंप मचा दिया। पहला धमाका रात करीब 8 बजे जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के निकट हुआ, जिसे शुरुआत में कुछ सूत्रों ने वाहन में आग लगने की घटना बताया। दूसरा विस्फोट रात 10:50 बजे अमृतसर में खालसा आर्मी कैंप की दीवार के पास हुआ। पुरी के अनुसार, दोनों घटनाएँ पूरी तरह से IED विस्फोट थीं — न कि वाहन अग्निकांड। जालंधर धमाके की जिम्मेदारी खालिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली है।
CM और DGP के बयानों में विरोधाभास
बुधवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन धमाकों को 'छोटी घटना' बताया और इन्हें 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा हिंसा भड़काने की कोशिश से जोड़ा। इसके विपरीत, पंजाब के डीजीपी ने स्पष्ट रूप से इसे सीमा पार, ISI समर्थित कार्रवाई बताया। केंद्रीय मंत्री पुरी ने इसी अंतर्विरोध को रेखांकित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग का प्रभार भी है, और ऐसे में उनके अपने पुलिस प्रमुख के बयान से असहमति जनता को जवाब माँगने का अधिकार देती है।
हरदीप सिंह पुरी का पलटवार
पुरी ने कहा, ''मुख्यमंत्री राज्य के गृह मंत्री भी हैं, लेकिन उनके अपने डीजीपी स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि यह सीमा पार से की गई, ISI समर्थित कार्रवाई है। जब यह घटना रात 8 बजे हुई, तो शुरुआत में किसी ने इसे वाहन में आग लगने की घटना बताया। यह वाहन में आग नहीं थी, बल्कि एक IED विस्फोट था। दूसरी घटना, जो रात 10:50 बजे हुई, वह भी पूरी तरह से IED विस्फोट थी।''
उन्होंने आगे कहा, ''वे अपनी ही नाकामी को राजनीतिक रंग दे रहे हैं। आखिरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है, खासकर सीमावर्ती राज्य में, जहाँ सीमा पार आतंकवाद का इतिहास रहा है। मुख्यमंत्री का यह बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक है।''
सुरक्षा का संदर्भ
पुरी ने याद दिलाया कि पंजाब एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है, जिसका इतिहास सीमा पार से होने वाली हिंसा से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का पड़ोसी देश आतंकवाद को नीति के रूप में इस्तेमाल करता है और उसे बढ़ावा देता है। गौरतलब है कि हमले से पहले सोशल मीडिया पर भी कई संदिग्ध पोस्ट सामने आए थे। पुरी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह देश की सुरक्षा का मामला है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव का माहौल पहले से बना हुआ है और सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर हैं। विपक्ष और केंद्र सरकार दोनों की नज़रें अब भगवंत मान सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं — विशेष रूप से यह देखने के लिए कि क्या राज्य सरकार अपने ही डीजीपी के ISI-कनेक्शन वाले बयान की जाँच को आगे बढ़ाती है।