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पंजाब का ऋण बोझ: ₹42,481 करोड़ की चुकौती लागत कुल राजस्व के 23% से अधिक — मनीष तिवारी

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पंजाब का ऋण बोझ: ₹42,481 करोड़ की चुकौती लागत कुल राजस्व के 23% से अधिक — मनीष तिवारी

सारांश

पंजाब हर कमाए गए रुपए में से 23 पैसे सिर्फ कर्ज़ चुकाने में खर्च कर रहा है — और विकास के लिए बचता है मात्र 5.6%। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के ये आँकड़े राज्य की वित्तीय नींव पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं, जबकि BJP ने AAP सरकार पर 'प्रशासनिक आपातकाल' का आरोप लगाया है।

मुख्य बातें

पंजाब की ऋण चुकौती लागत (ब्याज + मूलधन) लगभग ₹42,481 करोड़ है, जो कुल राजस्व के 23% से अधिक है।
राजस्व व्यय में से ऋण चुकौती घटाने के बाद केवल 71.4% बचता है; पूंजीगत व्यय मात्र 5.6% है।
पंजाब का ऋण-जीडीएसपी अनुपात 2024-25 में 39.9% दर्ज किया गया, जो 2019-20 के 36.2% से अधिक है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने संसदीय स्थायी समिति की बैठक के बाद ये आँकड़े सार्वजनिक किए।
पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने AAP सरकार पर कर्मचारियों से वादे न निभाने और 'प्रशासनिक आपातकाल' का आरोप लगाया।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 6 अगस्त को खुलासा किया कि पंजाब की ऋण चुकौती लागत — ब्याज और मूलधन दोनों मिलाकर — लगभग ₹42,481 करोड़ है, जो राज्य के कुल राजस्व के 23 प्रतिशत से अधिक है। चंडीगढ़ से तीन बार निर्वाचित और पूर्व केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री तिवारी ने यह बात केंद्र और राज्यों के दीर्घकालिक सार्वजनिक वित्त तथा ऋण की समीक्षा के लिए बुलाई गई संसदीय स्थायी समिति की बैठक में भाग लेने के बाद कही।

राजस्व का गणित: हर रुपए में 23 पैसे कर्ज़ में

तिवारी ने लिखा, 'इसका मतलब है कि पंजाब द्वारा अर्जित प्रत्येक एक रुपए राजस्व में से 23 पैसे केवल ऋण चुकाने में खर्च हो जाते हैं — राजस्व व्यय में से ऋण चुकाने की लागत घटाने पर 71.4 प्रतिशत बचता है।' उन्होंने आगे प्रश्न उठाया कि जब पूंजीगत व्यय — यानी भविष्य की परिसंपत्तियाँ बनाने वाला विकास खर्च — मात्र 5.6 प्रतिशत रह जाता है, तो क्या यह एक टिकाऊ वित्तीय मॉडल है।

कोविड के बाद ऋण-जीडीपी अनुपात में उछाल

तिवारी ने वित्त वर्ष 2019-20 और 2022-23 के बीच की अवधि का हवाला देते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 9.2 प्रतिशत हो गया था। पंजाब में भी, जहाँ उस दौरान कांग्रेस सरकार थी, राज्य का ऋण-जीडीएसपी अनुपात 2019-20 में 36.2 प्रतिशत से बढ़कर 41.3 प्रतिशत तक पहुँच गया। इसके बाद मामूली सुधार हुआ, परंतु 2024-25 में यह फिर बढ़कर 39.9 प्रतिशत दर्ज किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की वित्तीय स्थिरता पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।

भाजपा का आप सरकार पर हमला

एक दिन पहले, पंजाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकारी कर्मचारियों से किए गए वित्तीय वादे पूरे न होने के कारण राज्य में 'प्रशासनिक आपातकाल' जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। ढिल्लों के अनुसार, सत्ता में आने से पहले AAP ने कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित मुद्दों को सुलझाने के आश्वासन दिए थे, जो कथित तौर पर अब तक पूरे नहीं किए गए।

ढिल्लों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बिजली और आवश्यक प्रशासनिक कार्य बुरी तरह बाधित हुए हैं, और नागरिकों को रोज़मर्रा के कामों के लिए एक सरकारी कार्यालय से दूसरे के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब महत्वपूर्ण विभागों के कर्मचारी हड़ताल पर हों, तब आवश्यक सेवाएँ निर्बाध कैसे रह सकती हैं।

आगे की राह

तिवारी ने पंजाब के राजनेताओं से आग्रह किया कि वे राज्य की वित्तीय स्थिति पर 'गंभीरता से विचार' करें। गौरतलब है कि पंजाब का यह ऋण संकट कोई नई घटना नहीं है — राज्य दशकों से राजकोषीय दबाव में है, और हर सरकार ने इसे अगली सरकार पर छोड़ दिया है। संसदीय स्थायी समिति की इस बैठक के निष्कर्ष भविष्य में केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों की समीक्षा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल सवाल यह है कि पंजाब की यह वित्तीय दुर्दशा किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि दशकों की राजनीतिक लापरवाही की देन है — कांग्रेस, अकाली दल और अब AAP, सभी ने इस बोझ को बढ़ाया है। जब पूंजीगत व्यय मात्र 5.6% हो, तो 'विकास' का नारा खोखला लगता है। BJP का 'प्रशासनिक आपातकाल' वाला बयान राजनीतिक है, लेकिन कर्मचारी हड़तालों की वास्तविकता को नकारा नहीं जा सकता। असली जवाबदेही तब होगी जब संसदीय समिति के निष्कर्ष नीतिगत बदलाव में तब्दील हों — अब तक ऐसी रिपोर्टें अलमारियों में बंद होती रही हैं।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब की ऋण चुकौती लागत कितनी है और यह कितनी चिंताजनक है?
पंजाब की ऋण चुकौती लागत (ब्याज और मूलधन दोनों) लगभग ₹42,481 करोड़ है, जो राज्य के कुल राजस्व के 23% से अधिक है। इसका अर्थ है कि राज्य हर कमाए गए एक रुपए में से 23 पैसे सिर्फ कर्ज़ चुकाने में खर्च कर देता है, जिससे विकास कार्यों के लिए बेहद कम राशि बचती है।
मनीष तिवारी ने यह जानकारी कहाँ और क्यों साझा की?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 6 अगस्त को केंद्र और राज्यों के दीर्घकालिक सार्वजनिक वित्त तथा ऋण की समीक्षा के लिए बुलाई गई संसदीय स्थायी समिति की बैठक में भाग लेने के बाद यह आँकड़े सार्वजनिक किए। उनका उद्देश्य पंजाब की वित्तीय स्थिरता पर सवाल उठाना और राज्य के राजनेताओं को इस पर गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित करना था।
पंजाब का ऋण-जीडीपी अनुपात कोविड के बाद कैसे बदला?
पंजाब का ऋण-जीडीएसपी अनुपात 2019-20 में 36.2% था, जो कोविड महामारी के दौरान बढ़कर 41.3% तक पहुँच गया। इसके बाद मामूली सुधार हुआ, लेकिन 2024-25 में यह फिर 39.9% दर्ज किया गया, जो दर्शाता है कि राज्य का ऋण बोझ अभी भी ऊँचे स्तर पर बना हुआ है।
BJP ने AAP सरकार पर 'प्रशासनिक आपातकाल' का आरोप क्यों लगाया?
पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने आरोप लगाया कि AAP सरकार सत्ता में आने से पहले सरकारी कर्मचारियों से किए गए वित्तीय वादे पूरे नहीं कर पाई, जिससे कर्मचारी हड़ताल और विरोध प्रदर्शन पर उतर आए। उनके अनुसार स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली जैसी आवश्यक सेवाएँ बुरी तरह बाधित हुई हैं।
पंजाब में पूंजीगत व्यय इतना कम क्यों है?
राजस्व व्यय और ऋण चुकौती की भारी लागत के कारण पंजाब के पास पूंजीगत व्यय — यानी सड़क, बुनियादी ढाँचे और अन्य दीर्घकालिक परिसंपत्तियों के निर्माण — के लिए मात्र 5.6% बचता है। यह स्थिति राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए गंभीर चुनौती है और दशकों की राजकोषीय अनुशासनहीनता का परिणाम मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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