पुरी बीच पर सुदर्शन पटनायक की 25 फीट की धनुष कलाकृति, दीपावली पर इको-फ्रेंडली संदेश
सारांश
मुख्य बातें
पद्म श्री सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने 7 नवंबर को पुरी बीच पर दीपावली के अवसर पर भगवान श्रीराम के 25 फीट लंबे धनुष की विशाल रेत-कलाकृति (सैंड स्कल्पचर) तैयार की और पर्यावरण-अनुकूल त्योहार मनाने का आह्वान किया। इस कलाकृति में भगवान राम की प्रतिमा भी उकेरी गई है, जिसे एक हज़ार से अधिक मिट्टी के दीयों से सजाया गया है।
कलाकृति की विशेषताएँ
समुद्र की लहरों के किनारे रची गई यह रेत-कलाकृति अपने विशाल आकार और बारीक शिल्प के लिए ध्यान आकर्षित कर रही है। 25 फीट के धनुष के साथ भगवान राम की आकृति और उसमें जड़े हज़ारों मिट्टी के दीये रात के समय एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करते हैं। पटनायक ने बताया कि स्कल्पचर में दीयों को विशेष तरीके से 'इंस्टॉल' किया गया है ताकि रोशनी का प्रभाव अधिकतम हो।
इको-फ्रेंडली दिवाली का संदेश
सुदर्शन पटनायक ने इस अवसर पर लोगों से अपील करते हुए कहा, 'पवित्र दीपावली के अवसर पर हम लोगों ने यहाँ पर सैंड स्कल्पचर के माध्यम से 25 फीट लंबा धनुष बनाया है, जो भगवान राम का है और भगवान राम जी का भी स्कल्पचर बना है। हज़ारों से भी ज़्यादा मिट्टी के दीयों को स्कल्पचर में इंस्टॉल किया है।' उन्होंने यह भी कहा, 'हमारा अनुरोध है कि हम सब लोग दिवाली मनाएँ, लेकिन प्रदूषण से बचें। दीपावली को दीयों के साथ मनाएँ और प्रदूषण को अवॉइड करें। इसी संदेश को लेकर यह स्कल्पचर तैयार किया गया है।'
पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भीड़
पुरी बीच पर इस भव्य कलाकृति को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय निवासी उमड़ रहे हैं। लोग इस स्कल्पचर के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं और मिट्टी के दीयों से दिवाली मनाने के संदेश की सराहना कर रहे हैं। त्योहारी सीजन में पुरी बीच पहले से ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहता है, और इस कलाकृति ने उसे और विशेष बना दिया है।
सुदर्शन पटनायक की सामाजिक जागरूकता की परंपरा
गौरतलब है कि पद्म श्री से सम्मानित सुदर्शन पटनायक अपनी रेत-कला के ज़रिए हर प्रमुख पर्व और सामाजिक मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए जाने जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय एकता और मानवीय संवेदना — इन विषयों पर उनकी कलाकृतियाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान पा चुकी हैं। इस बार भी उन्होंने त्योहार की खुशी के साथ-साथ पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण के प्रति सचेत करने का संदेश अपनी कला में पिरोया है।
यह कलाकृति इस बात की याद दिलाती है कि उत्सव और पर्यावरण-चेतना साथ-साथ चल सकते हैं — और पुरी बीच एक बार फिर इस संदेश का जीवंत मंच बना है।