शशि थरूर का दावा: इजरायल में नेतन्याहू सरकार के दिन गिने-चुने, सोमवार तक नई सरकार संभव
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 7 नवंबर को इजरायल की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं। थरूर के अनुसार, रविवार या सोमवार तक इजरायल में एक वैकल्पिक सरकार का गठन संभव है।
इजरायल की राजनीतिक व्यवस्था की पृष्ठभूमि
तिरुवनंतपुरम से बात करते हुए थरूर ने इजरायल की आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली को समझाया। उन्होंने बताया कि इजरायल में चुनाव के दौरान पार्टियों को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी अनुपात में उन्हें संसद — जिसे नेसेट कहा जाता है — में सीटें आवंटित की जाती हैं। इस व्यवस्था के कारण किसी एक दल को अकेले स्पष्ट बहुमत मिलना लगभग असंभव होता है, और सरकार बनाने के लिए कई दलों को मिलकर गठबंधन बनाना पड़ता है।
मुख्य राजनीतिक समीकरण
थरूर ने बताया कि चुनाव पूर्व बने दोनों प्रमुख गठबंधन अब सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। इसके साथ ही अरब-इजरायली दलों के एक गठबंधन को भी कुछ सीटें मिली हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण और जटिल हो गए हैं।
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, अरब दलों ने गादी आइजनकोट को समर्थन देने का फैसला किया है। वहीं, नेतन्याहू के गठबंधन में शामिल यूनाइटेड तोराह यहूदी धर्म पार्टी ने मतदान में भाग न लेने — यानी तटस्थ रहने — का निर्णय लिया है। इन घटनाक्रमों के बाद आइजनकोट के समर्थकों ने इजरायल के राष्ट्रपति से उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने की मांग की है।
राष्ट्रपति की भूमिका और विश्वास मत
थरूर ने स्पष्ट किया कि इजरायल के राष्ट्रपति अभी सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से बातचीत करना चाहते हैं, और उसके बाद ही अंतिम निर्णय लेंगे कि किसे सरकार बनाने का न्योता दिया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि इजरायल में राष्ट्रपति द्वारा चुने गए नेता को नेसेट में विश्वास मत हासिल करना अनिवार्य होता है, तभी नई सरकार आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आती है।
थरूर का आकलन और आगे का रास्ता
कांग्रेस सांसद थरूर ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि नेतन्याहू सरकार का अंत निकट है। उनके अनुसार, इजरायल से आने वाली राजनीतिक खबरों पर अगले एक-दो दिन विशेष ध्यान देना ज़रूरी होगा। यह ऐसे समय में आया है जब इजरायल पहले से ही क्षेत्रीय संघर्षों के कारण वैश्विक ध्यान के केंद्र में है। गौरतलब है कि इजरायल में गठबंधन राजनीति की जटिलता के कारण सरकार गठन की प्रक्रिया अक्सर लंबी खिंचती रही है।
राष्ट्रपति के विभिन्न दलों से परामर्श के बाद यह स्पष्ट होगा कि अगली सरकार किसके नेतृत्व में बनेगी — और क्या नेतन्याहू युग का वास्तव में अंत होने वाला है।