इजरायल चुनाव 2026: नेतन्याहू के लिकुड गुट को 53 सीटें, त्रिशंकु नेसेट में सरकार गठन पेचीदा
सारांश
मुख्य बातें
यरूशलेम में सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (CEC) ने 30 अक्टूबर 2026 को इजरायल के 2026 संसदीय चुनावों के अंतिम नतीजे घोषित किए, जिनमें 26वीं नेसेट (संसद) में किसी भी गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले लिकुड गुट ने 53 सीटें जीती हैं, जबकि विपक्षी गुट और अरब पार्टियाँ मिलकर भी बहुमत के नज़दीक पहुँचने में सक्षम नहीं हुई हैं।
चुनाव नतीजों का ब्यौरा
गादी आइसेनकोट की 'यशार' पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को 48 सीटें हासिल हुई हैं, जबकि शेष 19 सीटें अरब गुटों के खाते में गई हैं। नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटें आवश्यक हैं — जो तीनों प्रमुख गुटों में से कोई भी हासिल नहीं कर पाया। इस चुनाव में 77.9 प्रतिशत पात्र मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो पिछले कई दशकों में सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है।
सरकार गठन की चुनौती
रिपोर्टों के अनुसार, अगली सरकार के गठन की प्रक्रिया अत्यंत जटिल हो सकती है और इसमें दो महीने से अधिक का समय लग सकता है। त्रिशंकु जनादेश के कारण गठबंधन वार्ता में कई दलों की भागीदारी अनिवार्य होगी। नेतन्याहू और आइसेनकोट, दोनों ने ही अगली सरकार बनाने का दावा ठोका है।
नेताओं की प्रतिक्रिया
यरूशलेम में लिकुड पार्टी के चुनाव मुख्यालय में समर्थकों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने 'मजबूत दक्षिणपंथी सरकार' बनाने का आह्वान किया था। उन्होंने उन पार्टियों की कड़ी आलोचना की जो अरब पार्टियों के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं, और ऐसी किसी व्यवस्था को 'शर्मनाक' करार दिया। दूसरी ओर, इजरायल के राष्ट्रपति ने राजनीतिक नेताओं से बुधवार को अपील की कि वे खुले मन से सरकार गठन की प्रक्रिया में भाग लें।
'द टाइम्स ऑफ इजरायल' के अनुसार, राष्ट्रपति ने कहा, 'खासकर कल के नतीजों के बाद, हमें एक और चुनाव से बचने के लिए हर मुमकिन कोशिश करनी चाहिए। इसलिए, मेरी उम्मीद है कि जो भी यहाँ आए, वह खुले मन के साथ आए।'
ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि मंगलवार को हुए ये चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद पहली बार संपन्न हुए हैं। 2022 के चुनावों के बाद से इजरायली राजनीतिक परिदृश्य में व्यापक बदलाव आए हैं और मतदाताओं की प्राथमिकताओं को तय करने वाले मुद्दे भी काफी बदल गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब इजरायल कई मोर्चों पर भू-राजनीतिक दबाव झेल रहा है और युद्धकालीन राजनीति घरेलू चुनावी गणनाओं को गहराई से प्रभावित कर रही है।
आगे क्या होगा
इजरायल में परंपरागत रूप से राष्ट्रपति सबसे बड़े दल के नेता को सरकार बनाने का पहला अवसर देते हैं। यदि नेतन्याहू निर्धारित समयसीमा में बहुमत जुटाने में विफल रहते हैं, तो आइसेनकोट को यह मौका मिल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि शीघ्र सहमति नहीं बनी तो इजरायल एक और मध्यावधि चुनाव की दिशा में जा सकता है।