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पी.वी. नरसिम्हा राव के पोते एन.वी. सुभाष का आरोप: 'कांग्रेस ने राव को जानबूझकर मिटाया, गांधी युग समाप्त'

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पी.वी. नरसिम्हा राव के पोते एन.वी. सुभाष का आरोप: 'कांग्रेस ने राव को जानबूझकर मिटाया, गांधी युग समाप्त'

सारांश

पी.वी. नरसिम्हा राव के पोते एन.वी. सुभाष ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला — आरोप लगाया कि पार्टी ने राव की उपलब्धियाँ जानबूझकर दबाईं, गांधी परिवार का कद बढ़ाने के लिए। साथ ही राहुल गांधी के नेतृत्व और विदेश दौरों को देश की छवि के लिए नुकसानदेह बताया।

मुख्य बातें

सुभाष ने 8 जुलाई को हैदराबाद में कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप लगाया कि पार्टी ने पी.वी.
नरसिम्हा राव की उपलब्धियाँ 'जानबूझकर और मनमाने ढंग से' नजरअंदाज कीं।
सुभाष के अनुसार, 1991 में राव ने कांग्रेस को बिखरने से बचाया और नई आर्थिक नीति व रुपए के अवमूल्यन जैसे साहसी सुधार लागू किए।
राहुल गांधी की नेतृत्व शैली को 'स्वार्थी' और 'बिना सिस्टम के' बताया; कहा कि अनुभवी सलाहकारों से परामर्श की परंपरा खत्म हो गई है।
राहुल गांधी के विदेश दौरों को भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए नुकसानदेह बताया और अटल बिहारी वाजपेयी से सीख लेने की सलाह दी।
राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना को 2004 से लगातार मिली हार का हवाला देते हुए खारिज किया।

पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के पोते एन.वी. सुभाष ने 8 जुलाई को हैदराबाद में कांग्रेस पार्टी के मौजूदा नेतृत्व पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 'गांधी युग खत्म हो चुका है' और कांग्रेस ने अपने दादा की ऐतिहासिक उपलब्धियों को जानबूझकर दबाया। सुभाष ने नरसिम्हा राव को एक सच्चा राष्ट्रवादी नेता बताया, जिन्होंने देश को 1991 के सबसे गहरे आर्थिक संकट से निस्वार्थ भाव से उबारा।

राव ने कांग्रेस को एकजुट रखा

सुभाष ने कहा कि राजीव गांधी के निधन के बाद 1991 में पार्टी बिखरने की कगार पर थी। उन्होंने कहा, 'अगर 1991 में वे नहीं होते, तो मुझे नहीं लगता कि पार्टी एकजुट रह पाती। एआईसीसी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद के लिए कई दावेदार थे। एक सच्चे कांग्रेसी के तौर पर, उन्होंने सुनिश्चित किया कि पार्टी मुश्किल दौर से सुरक्षित निकल आए।' सुभाष के अनुसार, शुरुआत में पार्टी के कई लोग राव को अस्थायी व्यवस्था मानते थे, परंतु उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार में दशकों के अनुभव से अपनी काबिलियत साबित की।

आर्थिक सुधारों का श्रेय और उपेक्षा

नरसिम्हा राव का कार्यकाल नई आर्थिक नीति और रुपए के अवमूल्यन जैसे साहसी सुधारों के लिए जाना जाता है, जो व्यापक विरोध के बावजूद लागू किए गए। सुभाष ने आरोप लगाया कि गांधी परिवार के करीबी लोगों के प्रभाव में कांग्रेस ने इन उपलब्धियों को 'जानबूझकर और मनमाने ढंग से' नजरअंदाज किया। उनके अनुसार, 'सभी अच्छे कामों का श्रेय गांधी परिवार को दिया गया और सभी बुरी बातों के लिए नरसिम्हा राव को जिम्मेदार ठहराया गया।' उन्होंने यह भी कहा कि राव ने वंचित वर्गों — खासकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति — को बिना किसी पारिवारिक पक्षपात के आगे बढ़ने में मदद की।

राहुल गांधी की नेतृत्व शैली पर निशाना

सुभाष ने कांग्रेस के अंदरूनी तंत्र को 'पूरी तरह ध्वस्त' बताया। उन्होंने राहुल गांधी की नेतृत्व शैली की तुलना राव के संस्थागत कामकाज के तरीके से करते हुए कहा कि 'बड़ों और साथियों से मिलने-जुलने और सलाह लेने का सिस्टम पूरी तरह खत्म हो गया है।' उनके अनुसार राहुल गांधी 'मतलबी लोगों से घिरे हुए हैं' और उनके पास कोई असली सलाहकार नहीं है। सुभाष ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बार-बार विदेश दौरों से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँच रहा है। उन्होंने कहा, 'आप राजनीतिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का विरोध कर सकते हैं, लेकिन आपको अपने ही देश को नीचा दिखाने का कोई हक नहीं है।' उन्होंने राहुल को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से सीख लेने की सलाह दी, जिन्होंने विपक्ष में रहते हुए भी विदेशों में भारत के हितों का प्रतिनिधित्व किया था।

राहुल के प्रधानमंत्री बनने की संभावना खारिज

सुभाष ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना को 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' जैसा बताया। उन्होंने कहा कि देश के लोग 'पैराशूट' नेता में दिलचस्पी नहीं रखते और परिवारवाद तथा तुष्टीकरण का दौर खत्म हो चुका है। उनके अनुसार, 2004 से अब तक राहुल गांधी को पर्याप्त अवसर मिले, फिर भी वे हिंदी भाषी क्षेत्रों समेत अन्य इलाकों में बार-बार हार का सामना कर चुके हैं।

राजनीतिक माहौल और आगे की दिशा

सुभाष ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि राजनीतिक माहौल अब विकास-केंद्रित नेतृत्व की ओर बढ़ चुका है। उनके अनुसार, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP देश के प्रति समर्पित है और लोगों को यह समझ आ गया है कि देश को एक काबिल और समर्पित नेता की जरूरत है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस पार्टी कई राज्यों में संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है और नरसिम्हा राव की विरासत को लेकर पार्टी के भीतर बहस जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और राव को भारत रत्न देने में दशकों की देरी इस बहस को विश्वसनीयता देती है। परंतु ध्यान देने योग्य यह है कि यह बयान एक ऐसे व्यक्ति का है जो BJP के प्रति स्पष्ट रूप से सहानुभूति रखता है — जिससे इसकी राजनीतिक प्रेरणा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपनी विरासत के इस अध्याय के साथ ईमानदारी से जुड़ेगी, या पारिवारिक राजनीति की जड़ें इतनी गहरी हैं कि आत्म-मूल्यांकन संभव ही नहीं? राव की विरासत पर बहस दरअसल कांग्रेस के उस बुनियादी संकट को उजागर करती है जो संगठन बनाम व्यक्तित्व की राजनीति के बीच फँसी पार्टी को आज भी हल नहीं कर पाई है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एन.वी. सुभाष कौन हैं और उन्होंने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
एन.वी. सुभाष पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के पोते हैं। उन्होंने 8 जुलाई को हैदराबाद में कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी ने गांधी परिवार का कद बढ़ाने के लिए राव की उपलब्धियाँ जानबूझकर दबाईं और उनके कार्यकाल को नजरअंदाज किया।
पी.वी. नरसिम्हा राव का 1991 में कांग्रेस के लिए क्या योगदान था?
1991 में राजीव गांधी के निधन के बाद कांग्रेस में नेतृत्व का गंभीर संकट था। नरसिम्हा राव ने पार्टी को एकजुट रखा और नई आर्थिक नीति तथा रुपए के अवमूल्यन जैसे साहसी सुधार लागू किए, जिन्होंने भारत को गहरे आर्थिक संकट से उबारा।
सुभाष ने राहुल गांधी की नेतृत्व शैली पर क्या कहा?
सुभाष ने राहुल गांधी की नेतृत्व शैली को 'स्वार्थी' और 'बिना किसी सिस्टम के' बताया। उनके अनुसार, राहुल के पास कोई असली सलाहकार नहीं है और वे 'मतलबी लोगों से घिरे हुए हैं'; अनुभवी नेताओं से परामर्श की परंपरा पूरी तरह खत्म हो गई है।
सुभाष ने राहुल गांधी के विदेश दौरों पर क्या आपत्ति जताई?
सुभाष ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेश में भारतीय संविधान और देश के लोगों के खिलाफ बोलते हैं, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचता है। उन्होंने राहुल को अटल बिहारी वाजपेयी से सीख लेने की सलाह दी, जो विपक्ष में रहते हुए भी विदेशों में भारत के हितों का प्रतिनिधित्व करते थे।
क्या सुभाष ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना को खारिज किया?
हाँ, सुभाष ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना को 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' जैसा बताया। उन्होंने कहा कि 2004 से अब तक राहुल को पर्याप्त अवसर मिले, फिर भी वे हिंदी भाषी क्षेत्रों समेत कई इलाकों में बार-बार हार का सामना कर चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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