पी.वी. नरसिम्हा राव के पोते एन.वी. सुभाष का आरोप: 'कांग्रेस ने राव को जानबूझकर मिटाया, गांधी युग समाप्त'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के पोते एन.वी. सुभाष ने 8 जुलाई को हैदराबाद में कांग्रेस पार्टी के मौजूदा नेतृत्व पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 'गांधी युग खत्म हो चुका है' और कांग्रेस ने अपने दादा की ऐतिहासिक उपलब्धियों को जानबूझकर दबाया। सुभाष ने नरसिम्हा राव को एक सच्चा राष्ट्रवादी नेता बताया, जिन्होंने देश को 1991 के सबसे गहरे आर्थिक संकट से निस्वार्थ भाव से उबारा।
राव ने कांग्रेस को एकजुट रखा
सुभाष ने कहा कि राजीव गांधी के निधन के बाद 1991 में पार्टी बिखरने की कगार पर थी। उन्होंने कहा, 'अगर 1991 में वे नहीं होते, तो मुझे नहीं लगता कि पार्टी एकजुट रह पाती। एआईसीसी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद के लिए कई दावेदार थे। एक सच्चे कांग्रेसी के तौर पर, उन्होंने सुनिश्चित किया कि पार्टी मुश्किल दौर से सुरक्षित निकल आए।' सुभाष के अनुसार, शुरुआत में पार्टी के कई लोग राव को अस्थायी व्यवस्था मानते थे, परंतु उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार में दशकों के अनुभव से अपनी काबिलियत साबित की।
आर्थिक सुधारों का श्रेय और उपेक्षा
नरसिम्हा राव का कार्यकाल नई आर्थिक नीति और रुपए के अवमूल्यन जैसे साहसी सुधारों के लिए जाना जाता है, जो व्यापक विरोध के बावजूद लागू किए गए। सुभाष ने आरोप लगाया कि गांधी परिवार के करीबी लोगों के प्रभाव में कांग्रेस ने इन उपलब्धियों को 'जानबूझकर और मनमाने ढंग से' नजरअंदाज किया। उनके अनुसार, 'सभी अच्छे कामों का श्रेय गांधी परिवार को दिया गया और सभी बुरी बातों के लिए नरसिम्हा राव को जिम्मेदार ठहराया गया।' उन्होंने यह भी कहा कि राव ने वंचित वर्गों — खासकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति — को बिना किसी पारिवारिक पक्षपात के आगे बढ़ने में मदद की।
राहुल गांधी की नेतृत्व शैली पर निशाना
सुभाष ने कांग्रेस के अंदरूनी तंत्र को 'पूरी तरह ध्वस्त' बताया। उन्होंने राहुल गांधी की नेतृत्व शैली की तुलना राव के संस्थागत कामकाज के तरीके से करते हुए कहा कि 'बड़ों और साथियों से मिलने-जुलने और सलाह लेने का सिस्टम पूरी तरह खत्म हो गया है।' उनके अनुसार राहुल गांधी 'मतलबी लोगों से घिरे हुए हैं' और उनके पास कोई असली सलाहकार नहीं है। सुभाष ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बार-बार विदेश दौरों से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँच रहा है। उन्होंने कहा, 'आप राजनीतिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का विरोध कर सकते हैं, लेकिन आपको अपने ही देश को नीचा दिखाने का कोई हक नहीं है।' उन्होंने राहुल को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से सीख लेने की सलाह दी, जिन्होंने विपक्ष में रहते हुए भी विदेशों में भारत के हितों का प्रतिनिधित्व किया था।
राहुल के प्रधानमंत्री बनने की संभावना खारिज
सुभाष ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना को 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' जैसा बताया। उन्होंने कहा कि देश के लोग 'पैराशूट' नेता में दिलचस्पी नहीं रखते और परिवारवाद तथा तुष्टीकरण का दौर खत्म हो चुका है। उनके अनुसार, 2004 से अब तक राहुल गांधी को पर्याप्त अवसर मिले, फिर भी वे हिंदी भाषी क्षेत्रों समेत अन्य इलाकों में बार-बार हार का सामना कर चुके हैं।
राजनीतिक माहौल और आगे की दिशा
सुभाष ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि राजनीतिक माहौल अब विकास-केंद्रित नेतृत्व की ओर बढ़ चुका है। उनके अनुसार, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP देश के प्रति समर्पित है और लोगों को यह समझ आ गया है कि देश को एक काबिल और समर्पित नेता की जरूरत है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस पार्टी कई राज्यों में संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है और नरसिम्हा राव की विरासत को लेकर पार्टी के भीतर बहस जारी है।