क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत के 52 संस्थान, IIT दिल्ली 118वें स्थान पर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 18 जून 2026 को जानकारी दी कि क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत के 52 संस्थानों को स्थान मिला है और 13 भारतीय विश्वविद्यालयों ने ग्लोबल टॉप 550 में जगह बनाई है। यह भारतीय उच्च शिक्षा क्षेत्र की वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण है।
मुख्य घटनाक्रम
IIT दिल्ली लगातार दूसरे वर्ष भारत का सर्वोच्च रैंकिंग वाला संस्थान बना है। इसने 2026 के 123वें स्थान से सुधार करते हुए 2027 में 118वाँ स्थान हासिल किया है। इसके अलावा IIT बॉम्बे और IIT मद्रास भी इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह उपलब्धि अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय संस्थानों की बढ़ती वैश्विक पहचान को दर्शाती है।
धर्मेंद्र प्रधान की प्रतिक्रिया
प्रधान ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "शिक्षा के क्षेत्र में भारत की वैश्विक उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। यह उपलब्धि हमारे उच्च शिक्षा इकोसिस्टम की बढ़ती ताकत और उत्कृष्टता के प्रति हमारे संस्थानों, संकाय, शोधकर्ताओं और छात्रों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।"
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत परिवर्तनकारी सुधारों से प्रेरित होकर भारत ज्ञान और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने देश को गौरवान्वित करने वाले सभी संस्थानों को बधाई दी और कहा कि भारत साथ मिलकर वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनने की यात्रा को आगे बढ़ाएगा।
क्यूएस रैंकिंग का महत्व
क्वाक्वेरेली साइमंड्स (QS) द्वारा प्रतिवर्ष प्रकाशित यह रैंकिंग दुनिया की शीर्ष विश्वविद्यालयों की सबसे प्रतिष्ठित सूचियों में से एक मानी जाती है। यह छात्रों को वैश्विक उच्च शिक्षा संस्थानों के चयन में सहायता करती है और संस्थानों की शैक्षणिक प्रतिष्ठा, शोध उत्पादकता तथा उद्योग से जुड़ाव के आधार पर मूल्यांकन करती है।
गौरतलब है कि भारत की इस उपलब्धि का संदर्भ ऐसे समय में आया है जब सरकार 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य पर ज़ोर दे रही है और उच्च शिक्षा को इस लक्ष्य का केंद्रीय स्तंभ मान रही है।
आम जनता और छात्रों पर असर
इस रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की बढ़ती उपस्थिति से देश के छात्रों को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त डिग्री और शोध अवसर मिलने की संभावना बढ़ती है। साथ ही विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक साझेदारी और अनुसंधान सहयोग के नए द्वार खुलते हैं।
क्या होगा आगे
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार भारत का लक्ष्य आने वाले वर्षों में और अधिक संस्थानों को वैश्विक शीर्ष सूचियों में स्थान दिलाना है। NEP 2020 के क्रियान्वयन के साथ-साथ अनुसंधान एवं नवाचार में निवेश बढ़ाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता इस लक्ष्य को और मज़बूती देती है।