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बिहार बाढ़ पर राहुल गांधी का हमला: '17 साल की डबल इंजन सरकार ने स्थायी समाधान क्यों नहीं दिया'

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बिहार बाढ़ पर राहुल गांधी का हमला: '17 साल की डबल इंजन सरकार ने स्थायी समाधान क्यों नहीं दिया'

सारांश

बिहार में बाढ़ का कहर जारी है और राहुल गांधी ने एक्स पर BJP की डबल इंजन सरकार से 17 साल का हिसाब माँगा है। सवाल सिर्फ राहत का नहीं — स्थायी समाधान का है, जो दशकों से अनुत्तरित है।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 4 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर BJP की डबल इंजन सरकार पर 17 साल में स्थायी बाढ़ समाधान न देने का आरोप लगाया।
कोसी, गंडक और बागमती नदियों में उफान से सुपौल, सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर सहित कई जिले बुरी तरह प्रभावित हैं।
इस वर्ष नेपाल से छोड़े गए पानी ने बाढ़ की स्थिति को और बिगाड़ा; लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का काम जारी।
कांग्रेस का आरोप है कि NDA शासन में बाढ़ नियंत्रण के लिए कोई ठोस योजना ज़मीन पर नहीं उतरी।
BJP ने दावा किया कि राहत-बचाव अभियान पूरी तरह जारी है और NDRF टीमें तैनात हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बिहार की बाढ़ को लेकर केंद्र और राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने 4 अक्टूबर को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए सालाना बाढ़ त्रासदी के लिए 17 वर्षों के शासन में कोई ठोस समाधान न होने पर सवाल उठाए। कोसी, गंडक और बागमती नदियों में उफान के कारण सुपौल, सहरसा, दरभंगा और मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों में लाखों लोग प्रभावित हैं।

राहुल गांधी ने क्या कहा

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'बिहार में बाढ़ फिर कहर बनकर टूटी है। लाखों लोग प्रभावित हैं, सैकड़ों गांव डूबे हुए हैं। कई लोगों की मौत और लापता होने की खबर है। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदना है।'

उन्होंने आगे लिखा, 'सबसे दुखद बात यह है कि बिहार में यह संकट नया नहीं है। हर साल बाढ़ आती है, मौतें होती हैं, परिवार उजड़ते हैं और लोग पलायन करते हैं। भाजपा की डबल इंजन सरकार बताए कि पिछले 17 साल में इस सालाना त्रासदी से निपटने के लिए क्या किया? जमीन पर क्या बदला? बिहार के लोगों को हर साल राहत और आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।'

बाढ़ की मौजूदा स्थिति

इस वर्ष मानसून के बाद नेपाल से छोड़े गए पानी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कोसी, गंडक और बागमती नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे सुपौल, सहरसा, दरभंगा और मुजफ्फरपुर जिलों में भारी तबाही हुई है। लाखों की आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का काम जारी बताया जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में बाढ़ प्रबंधन लंबे समय से राजनीतिक विवाद का विषय रहा है। आँकड़ों के अनुसार, बिहार देश के उन राज्यों में से एक है जो प्रतिवर्ष सबसे अधिक बाढ़-प्रभावित होता है।

कांग्रेस का आरोप

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का कहना है कि पिछले 17 वर्षों में बिहार में अधिकतर समय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार रही है, बावजूद इसके बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस योजना ज़मीन पर नहीं उतर सकी। पार्टी के अनुसार, हर साल राहत सामग्री वितरण और हवाई सर्वेक्षण तक ही सरकारी कार्रवाई सीमित रह जाती है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी विपक्षी नेता ने बिहार बाढ़ को स्थायी राजनीतिक विफलता के रूप में रेखांकित किया हो। पिछले कई वर्षों से राज्य में बाढ़-राहत बनाम बाढ़-नियंत्रण की बहस चलती आ रही है।

BJP का पक्ष

BJP नेताओं ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि सरकार राहत एवं बचाव अभियान में पूरी तरह जुटी हुई है। उनके अनुसार केंद्र की ओर से राज्य को हरसंभव सहायता भेजी जा रही है और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं।

आगे क्या होगा

राहुल गांधी की इस पोस्ट के बाद बिहार की सियासत तेज़ हो गई है और विपक्ष राज्य सरकार तथा केंद्र पर बाढ़ प्रबंधन को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। यह मामला आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक बहस में और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि बाढ़ का पानी अभी भी नहीं उतरा है और प्रभावित आबादी की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बाढ़ नियंत्रण की विफलता केवल पिछले 17 वर्षों की नहीं, बल्कि दशकों पुरानी संरचनात्मक समस्या है — जिसमें नेपाल से जल-साझेदारी, तटबंध नीति और केंद्र-राज्य समन्वय सभी शामिल हैं। विपक्ष 'स्थायी समाधान' की माँग करता है, पर ठोस वैकल्पिक नीति-खाका शायद ही कभी सामने रखा जाता है। जब तक नेपाल के साथ जल-प्रबंधन समझौते और राज्य की तटबंध-नीति पर बेबाक बहस नहीं होती, तब तक हर साल बाढ़ के बाद यही आरोप-प्रत्यारोप का चक्र चलता रहेगा — और बिहार के आम लोग हर साल बाढ़ का दंश झेलते रहेंगे।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने बिहार बाढ़ पर क्या कहा?
राहुल गांधी ने 4 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर BJP की डबल इंजन सरकार से पूछा कि 17 साल में बिहार की सालाना बाढ़ त्रासदी के लिए कोई स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि लोगों को आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।
बिहार में 2026 में बाढ़ की स्थिति कितनी गंभीर है?
कोसी, गंडक और बागमती नदियों में उफान के कारण सुपौल, सहरसा, दरभंगा और मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों में लाखों लोग प्रभावित हैं। नेपाल से छोड़े गए पानी ने इस वर्ष स्थिति को और बिगाड़ा है तथा कई मौतें और लापता होने की खबरें सामने आई हैं।
BJP ने राहुल गांधी के आरोपों पर क्या जवाब दिया?
BJP नेताओं ने दावा किया कि सरकार राहत और बचाव कार्य में पूरी तरह जुटी है और केंद्र की ओर से हरसंभव सहायता भेजी जा रही है। NDRF की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं।
बिहार में हर साल बाढ़ क्यों आती है?
बिहार की भौगोलिक स्थिति, नेपाल से निकलने वाली नदियों का उफान और तटबंध प्रबंधन की कमियाँ मुख्य कारण माने जाते हैं। नेपाल से छोड़े गए पानी और मानसून के संयोग से कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियाँ हर साल खतरनाक स्तर तक बढ़ जाती हैं।
कांग्रेस का बिहार बाढ़ प्रबंधन पर क्या रुख है?
कांग्रेस का आरोप है कि पिछले 17 वर्षों में NDA शासन के दौरान बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस योजना ज़मीन पर नहीं उतरी। पार्टी का कहना है कि सरकार हर साल केवल राहत सामग्री वितरण और हवाई सर्वेक्षण तक सीमित रह जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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