3 अक्टूबर 2026
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बिहार बाढ़: वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने सारण में पहुंचाई 10 टन राहत सामग्री, 6 जिलों में 4.93 लाख प्रभावित

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बिहार बाढ़: वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने सारण में पहुंचाई 10 टन राहत सामग्री, 6 जिलों में 4.93 लाख प्रभावित

सारांश

गंडक और कोसी नदियों के उफान ने बिहार के 6 जिलों की 144 पंचायतों को जलमग्न किया। भारतीय वायुसेना ने 2 अक्टूबर से हेलीकॉप्टरों के जरिए 10 टन राहत सामग्री पहुंचाई। 5.22 लाख लोगों को सामुदायिक रसोई से भोजन, 323 नावें तैनात — लेकिन 4.93 लाख लोग अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं।

मुख्य बातें

भारतीय वायुसेना की मध्य वायु कमान के हेलीकॉप्टरों ने सारण जिले में करीब 10 टन राहत सामग्री पहुंचाई।
बिहार के 6 जिलों के 30 प्रखंडों की 144 ग्राम पंचायतों में 4.93 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित।
अब तक 68,600 पॉलीथिन शीट व 64,100 ड्राई राशन पैकेट वितरित; 5.22 लाख लोगों को सामुदायिक रसोई से भोजन।
NDRF की 14 और SDRF की 28 टीमें तैनात; 323 नावें परिचालन में।
3 अक्टूबर सुबह तक कोसी बराज और सोन बराज पर डिस्चार्ज में गिरावट, स्थिति में क्रमिक सुधार के संकेत।

भारतीय वायुसेना की मध्य वायु कमान (CAC) के हेलीकॉप्टरों ने 3 अक्टूबर 2026 को बिहार के सारण जिले के बाढ़ग्रस्त इलाकों में करीब 10 टन आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई। नेपाल और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई अत्यधिक वर्षा के बाद गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि और तटबंधों में दरार के चलते राज्य के 6 जिलों में बाढ़ की गंभीर स्थिति बनी हुई है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार इस बाढ़ से अब तक 4.93 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं।

राहत अभियान का विस्तार

वायुसेना के हेलीकॉप्टरों को 2 अक्टूबर को अल्प सूचना पर पटना से संचालित करते हुए तैनात किया गया। दिनभर की उड़ानों के दौरान इन हेलीकॉप्टरों ने सारण जिले के चकिया, पृथ्वीपुर, सतजोड़ा, करचोलिया और मकेर सहित कई प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरित की। रक्षा प्रकोष्ठ के अनुसार विषम परिस्थितियों और कठिन भूभाग के बावजूद यह अभियान निर्बाध रूप से जारी है तथा प्राकृतिक आपदा में नागरिक प्रशासन को समर्थन देना वायुसेना की प्राथमिकता है।

प्रभावित जिले और पंचायतें

आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, दरभंगा और मुजफ्फरपुर — इन छह जिलों के 30 प्रखंडों की 144 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का असर दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि बिहार हर वर्ष मानसून के दौरान नेपाल से आने वाली नदियों के उफान से बाढ़ की चपेट में आता है, और इस बार गंडक, कोसी व सोन नदियों के एक साथ उच्च जलस्तर ने राहत कार्य को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

ज़मीनी राहत प्रयास

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार प्रभावित लोगों के बीच अब तक करीब 68,600 पॉलीथिन शीट और 64,100 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं, और वितरण का कार्य अभी जारी है। आवागमन और निष्क्रमण को सुगम बनाने के लिए कुल 323 नावें तैनात की गई हैं, जिनकी संख्या आवश्यकतानुसार बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

242 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित हैं, जिनके माध्यम से अब तक करीब 5.22 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 2 बाढ़ राहत शिविर चल रहे हैं जहाँ लगभग 100 लोगों के लिए आवासन, भोजन और चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हैं। राहत एवं बचाव कार्य के लिए NDRF की 14 टीमें और SDRF की 28 टीमें मैदान में तैनात हैं।

नदियों की स्थिति और जल प्रवाह

जल संसाधन विभाग की 3 अक्टूबर सुबह 8 बजे की रिपोर्ट के अनुसार वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 71,730 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया और रुझान स्थिर बताया गया है। कोसी बराज, वीरपुर से 87,545 क्यूसेक और सोन बराज, इंद्रपुरी से 46,991 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। दोनों बैराजों पर डिस्चार्ज में गिरावट दर्ज की गई है, जो स्थिति में क्रमिक सुधार का संकेत देती है।

आगे की राह

प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहा है। नदियों के घटते डिस्चार्ज से राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि निचले इलाकों में जलजमाव की समस्या बने रहने की आशंका है। वायुसेना का राहत अभियान आवश्यकता के अनुसार जारी रखने की तैयारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक अनुमानित चक्र है। फिर भी हर बार राहत-तंत्र को 'अल्प सूचना' पर सक्रिय होना पड़ता है, जो दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन और तटबंध रखरखाव में संरचनागत चूक की ओर इशारा करता है। वायुसेना की तैनाती सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि गंडक तटबंध बार-बार टूटते क्यों हैं और ज़मीनी पूर्व-चेतावनी तंत्र उतना प्रभावी क्यों नहीं जितना होना चाहिए।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में 2026 की बाढ़ से कितने जिले और लोग प्रभावित हैं?
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, दरभंगा और मुजफ्फरपुर — 6 जिलों की 144 ग्राम पंचायतों में करीब 4.93 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। यह स्थिति सितंबर के अंतिम सप्ताह में अत्यधिक वर्षा और गंडक तटबंध में दरार के कारण उत्पन्न हुई।
भारतीय वायुसेना बिहार बाढ़ राहत में क्या भूमिका निभा रही है?
भारतीय वायुसेना की मध्य वायु कमान के हेलीकॉप्टरों को 2 अक्टूबर को पटना से तैनात किया गया और उन्होंने सारण जिले के चकिया, पृथ्वीपुर, सतजोड़ा, करचोलिया व मकेर में करीब 10 टन राहत सामग्री पहुंचाई। रक्षा प्रकोष्ठ के अनुसार यह अभियान जारी है।
बाढ़ राहत के लिए अब तक क्या-क्या वितरित किया गया है?
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार अब तक 68,600 पॉलीथिन शीट और 64,100 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। 242 सामुदायिक रसोई केंद्रों के माध्यम से 5.22 लाख लोगों को भोजन कराया गया है और 2 राहत शिविरों में करीब 100 लोगों के लिए आवासन व चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है।
बिहार की नदियों का जलस्तर अभी कैसा है?
जल संसाधन विभाग की 3 अक्टूबर सुबह 8 बजे की रिपोर्ट के अनुसार वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 71,730 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज स्थिर है। कोसी बराज, वीरपुर से 87,545 क्यूसेक और सोन बराज, इंद्रपुरी से 46,991 क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज किया गया है, और दोनों बैराजों पर गिरावट का रुझान है।
बचाव अभियान में कितनी NDRF और SDRF टीमें तैनात हैं?
राहत एवं बचाव कार्य के लिए NDRF की 14 टीमें और SDRF की 28 टीमें प्रतिनियुक्त की गई हैं। इसके अलावा 323 नावें तैनात हैं और आवश्यकता के अनुसार संख्या बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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