राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से आत्महत्या रोकने का संदेश: अजय राय
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल ने उन छात्रों को जीवन की राह दिखाई है जो परीक्षा के दबाव में आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर विवश हो जाते हैं। 20 जून को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में राय ने इस कार्यक्रम को देशभर के युवाओं के लिए एक निर्णायक मोड़ बताया।
कोटा में हुई शुरुआत, बड़ा संदेश गया
अजय राय ने बताया कि 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का पहला बड़ा आयोजन राजस्थान के कोटा में हुआ, जहाँ बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से देशभर के छात्रों तक यह संदेश पहुँचा है कि संघर्ष करना है, लड़ना है — आत्महत्या कोई विकल्प नहीं है। राय के अनुसार, राहुल गांधी ने छात्रों को वह रास्ता दिखाया है जिस पर चलकर वे अपना भविष्य संवार सकते हैं।
प्रयागराज, पटना और दिल्ली में भी होंगे आयोजन
राय ने बताया कि आने वाले दिनों में इसी श्रृंखला के अंतर्गत प्रयागराज, पटना और दिल्ली में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो अभी प्रस्तावित हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इन आयोजनों में उन क्षेत्रों के बड़ी संख्या में छात्र भाग लेंगे जो मानसिक तनाव और शैक्षणिक दबाव से जूझ रहे हैं। यह कार्यक्रम कोटा जैसे कोचिंग हब की पृष्ठभूमि में विशेष महत्व रखता है, जहाँ छात्र आत्महत्या की घटनाएँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर कांग्रेस का हमला
इसी बातचीत में अजय राय ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित घपलेबाजी के मामले पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसआईटी तो गठित की गई है, लेकिन अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। राय ने सवाल उठाया कि बिना एफआईआर के जाँच किसकी हो रही है, और इसे 'चीजों को भ्रमित करने की कोशिश' करार दिया।
एसआईटी की निष्पक्षता पर सवाल
राय ने आरोप लगाया कि एसआईटी में शामिल अधिकारी विजय विश्वास पंत — जो पहले प्रयागराज में कमिश्नर रह चुके हैं और जिनके कार्यकाल में भगदड़ की घटना हुई थी — को सरकार ने उस घटना के बाद कोई कार्रवाई किए बिना इस एसआईटी में शामिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि यह एसआईटी जाँच के लिए नहीं, बल्कि आरोपियों को क्लीनचिट देने के लिए बनाई गई है। यह आरोप कांग्रेस का पक्ष है; सरकार या एसआईटी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
आने वाले हफ्तों में प्रयागराज, पटना और दिल्ली में प्रस्तावित 'छात्रों की गूंज' आयोजनों से यह देखना होगा कि क्या यह कार्यक्रम छात्र मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर दीर्घकालिक नीतिगत बहस को भी जन्म दे पाता है।