राजस्थान सीआईडी ने आईएसआई फंडिंग एजेंट रफीक चांद शेख को किया गिरफ्तार, जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान पुलिस की सीआईडी इंटेलिजेंस ने 30 जून 2025 को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए कथित तौर पर फंडिंग चैनल संचालित करने वाले रफीक चांद शेख (निवासी औरंगाबाद, महाराष्ट्र) को गिरफ्तार कर एक बड़े देश-विरोधी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह गिरफ्तारी 'ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923' के तहत चल रही जाँच में एक निर्णायक कड़ी मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
जाँच एजेंसी के अनुसार, रफीक चांद शेख — जो चांद मिया शेख का पुत्र है — कथित तौर पर लगभग चार वर्षों से आईएसआई के एक हैंडलर के संपर्क में था। अधिकारियों का आरोप है कि उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े नेटवर्क के निर्देशों पर अपने और अन्य लोगों के नाम पर कई बैंक खाते खोले, ताकि जासूसी गतिविधियों में कथित तौर पर लिप्त संदिग्धों तक धन पहुँचाया जा सके।
सीआईडी इंटेलिजेंस ने वित्तीय लेन-देन की पुष्टि करने और नेटवर्क में आरोपी की भूमिका स्थापित करने के बाद यह गिरफ्तारी की। अधिकारियों के अनुसार, आईएसआई ऑपरेटिव्स द्वारा रफीक के माध्यम से भारत में संदिग्ध ऑपरेटिव्स तक धन भेजा जाता था।
पूर्व में हुई गिरफ्तारियाँ
यह गिरफ्तारी एक व्यापक जाँच शृंखला की कड़ी है। इससे पहले भारतीय सशस्त्र बलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी आईएसआई हैंडलर्स को कथित तौर पर उपलब्ध कराने के आरोप में राजस्थान के जैसलमेर निवासी झाबरा राम को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा असम के डिब्रूगढ़ स्थित इंडियन एयर फोर्स स्टेशन पर तैनात मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) कर्मचारी सुमित कुमार को भी इसी मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
गौरतलब है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है — जाँच एजेंसी के अनुसार यह एक बहु-राज्यीय नेटवर्क है जो सेना, वायुसेना और वित्तीय चैनलों को एक साथ जोड़ता है।
जाँच का दायरा
सीआईडी इंटेलिजेंस के अधिकारियों ने बताया कि जाँच अभी जारी है और वे उन अन्य व्यक्तियों की पहचान करने में जुटे हैं जो इस कथित आईएसआई फंडिंग नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। अतिरिक्त वित्तीय लेन-देन और संभावित संपर्कों की भी विस्तार से जाँच की जा रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव के बीच खुफिया एजेंसियाँ देश के भीतर सक्रिय जासूसी नेटवर्क को लेकर विशेष सतर्कता बरत रही हैं।
कानूनी पहलू
मामला 'ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923' के तहत दर्ज है, जो संवेदनशील सरकारी सूचनाओं के अनधिकृत प्रकटीकरण और जासूसी से संबंधित अपराधों के लिए कठोर प्रावधान करता है। इस कानून के तहत दोषसिद्धि पर 14 वर्ष तक की सज़ा हो सकती है।
आगे क्या
अधिकारियों के अनुसार, नेटवर्क के पूरे दायरे का पता लगाने और इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान करने का काम जारी है। जाँच एजेंसी अन्य राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय में काम कर रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।