राजस्थान लोक लेखा समिति का 8 दिवसीय अध्ययन दौरा शुरू, लद्दाख से चंडीगढ़ तक का कार्यक्रम
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान विधानसभा की लोक लेखा समिति 8 जून 2026 को जयपुर से एक आठ दिवसीय अध्ययन दौरे पर रवाना हुई, जो 16 जून तक लेह-लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा तक चलेगा। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रशासनिक कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अध्ययन करना और संबंधित विधानसभा समितियों के साथ अनुभव साझा करना है।
समिति की संरचना और नेतृत्व
इस समिति का नेतृत्व नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली कर रहे हैं। उनके साथ समिति सदस्य सुरेश ढाकड़, अर्जुन लाल जिंजर, अनीता बाघेल, चंद्रभान सिंह चौहान और विश्वनाथ मेघवाल भी इस यात्रा में शामिल हैं। जूली ने बताया कि इस दौरे का मकसद अन्य राज्यों की बेहतर कार्यप्रणाली को समझकर राजस्थान में भी उसे लागू करने की संभावनाएँ तलाशना है।
मुख्य कार्यक्रम और यात्रा-क्रम
समिति 8 से 10 जून तक लद्दाख में रहेगी, जहाँ स्थानीय विकास योजनाओं और प्रशासनिक नवाचारों पर चर्चा होगी। इस दौरान लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के साथ बैठक भी प्रस्तावित है।
इसके बाद 11 और 12 जून को दल जम्मू-कश्मीर का दौरा करेगा और वहाँ की विधानसभा समितियों के साथ बैठकों में भाग लेगा। 13 जून को समिति वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन करेगी।
14 जून को दल अमृतसर पहुँचेगा। 15 जून को चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों तथा विधायकों के साथ संयुक्त विचार-विमर्श का कार्यक्रम है। दौरा 16 जून को चंडीगढ़ में समाप्त होगा और समिति उसी दिन जयपुर वापस लौटेगी।
दौरे का उद्देश्य और महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान सरकार प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय पारदर्शिता को प्राथमिकता दे रही है। लोक लेखा समितियाँ सरकारी व्यय की संसदीय निगरानी का प्रमुख माध्यम होती हैं, और अन्य राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना इस निगरानी को और प्रभावी बना सकता है। गौरतलब है कि लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेश में विकास की अनूठी चुनौतियाँ और प्रशासनिक मॉडल राजस्थान के दूरदराज़ ज़िलों के लिए प्रासंगिक सबक दे सकते हैं।
आगे की राह
दौरे से लौटने के बाद समिति अपने अवलोकन और सुझाव राजस्थान विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अंतर-राज्यीय अध्ययन दौरे विधायी समितियों की कार्यक्षमता और नीति-निर्माण की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक होते हैं।