राजस्थान सरकार ने जैसलमेर में 'ओरण' संरक्षण के लिए 3666 हेक्टेयर भूमि आरक्षित की

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राजस्थान सरकार ने जैसलमेर में 'ओरण' संरक्षण के लिए 3666 हेक्टेयर भूमि आरक्षित की

सारांश

राजस्थान सरकार ने जैसलमेर में 'ओरण' के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है, जिसमें 3666 हेक्टेयर भूमि का आरक्षण शामिल है। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

Key Takeaways

  • 3666 हेक्टेयर भूमि का आरक्षण जैसलमेर में ओरण के लिए किया गया है।
  • ओरण का संरक्षण पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।
  • स्थानीय समुदाय की परंपराओं का सम्मान किया जाएगा।
  • जैव विविधता को संरक्षित करने में यह पहल महत्वपूर्ण है।
  • राजस्थान सरकार की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

जयपुर, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राजस्थान सरकार ने गुरुवार को जैसलमेर जिले में 'ओरण' (पवित्र उपवन) भूमि को आरक्षित करने की एक बड़ी पहल की है, ताकि मरुस्थलीय क्षेत्र में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखा जा सके।

'ओरण' एक सदियों पुरानी व्यवस्था है जो सामाजिक-धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसके अंतर्गत, स्थानीय समुदाय इन क्षेत्रों में पेड़ों या प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान न पहुंचाकर पवित्र उपवनों की रक्षा करते हैं।

इन स्थानों में पेड़ों को काटना या कुल्हाड़ी का उपयोग करना पारंपरिक रूप से वर्जित है, जिससे यह पारिस्थितिकी तंत्र पीढ़ियों तक स्वाभाविक रूप से संरक्षित रहता है।

ये पवित्र भू-दृश्य आस्था और संरक्षण के एक अनोखे संगम का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस पहल के अंतर्गत, जैसलमेर जिले के विभिन्न गांवों में 'ओरण' के उद्देश्यों के लिए कुल 3,666.2139 हेक्टेयर भूमि आरक्षित की गई है।

रामगढ़ तहसील में, दिलावर के गांव में 124.9502 हेक्टेयर, कुचड़ी में 1,084.8043 हेक्टेयर और पूनम नगर में 583.9876 हेक्टेयर भूमि आरक्षित की गई है। फतेहगढ़ तहसील में, भीमसर में 952.2752 हेक्टेयर और बिनजोता में 96.7716 हेक्टेयर भूमि को 'ओरण' क्षेत्र के रूप में नामित किया गया है।

इसके अतिरिक्त, जैसलमेर तहसील में, मोकला गांव में तीन खंडों में क्रमशः 187.364 हेक्टेयर, 256.2511 हेक्टेयर और 253.4034 हेक्टेयर भूमि आरक्षित की गई है; साथ ही बिरमा कानोड़ में 126.4065 हेक्टेयर भूमि आरक्षित है।

राज्य सरकार 'ओरण' संरक्षण के लिए अतिरिक्त भूमि आरक्षित करने की प्रक्रिया में भी है।

इसमें मोकला गांव (जैसलमेर तहसील) में 1,457.4991 हेक्टेयर, आस्कंद्रा गांव और दीधू गांव (नाचना तहसील) में क्रमशः 225.03 हेक्टेयर और 229.5067 हेक्टेयर, तथा मोहनगढ़ बारानी/पन्नोधराय गांव में 333.9165 हेक्टेयर भूमि शामिल है।

'ओरण' शब्द संस्कृत के 'अरण्य' से लिया गया है, जिसका अर्थ है एक अछूता जंगल। ये क्षेत्र न केवल प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का प्रतिबिंब हैं, बल्कि शुष्क क्षेत्रों में मरुस्थलीकरण को रोकने और जैव विविधता को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस पहल से जैसलमेर में संरक्षण प्रयासों को मज़बूती मिलने की उम्मीद है, साथ ही इससे आस्था के पारंपरिक स्थलों की सुरक्षा होगी और रेगिस्तानी क्षेत्र में हरियाली व जैव विविधता बढ़ेगी।

Point of View

बल्कि यह स्थानीय समुदायों के सामाजिक-धार्मिक मान्यताओं को भी मजबूती प्रदान करेगा।
NationPress
17/04/2026

Frequently Asked Questions

ओरण क्या है?
'ओरण' एक पारंपरिक पवित्र उपवन है जिसे स्थानीय समुदाय पेड़ और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए संरक्षित करते हैं।
राजस्थान सरकार ने कितनी भूमि ओरण के लिए आरक्षित की है?
राजस्थान सरकार ने जैसलमेर जिले में कुल 3666 हेक्टेयर भूमि ओरण के संरक्षण के लिए आरक्षित की है।
ओरण के संरक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
ओरण के संरक्षण का मुख्य उद्देश्य पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना और जैव विविधता की रक्षा करना है।
इस पहल से स्थानीय समुदाय को क्या लाभ होगा?
इस पहल से स्थानीय समुदाय की सामाजिक-धार्मिक मान्यताएँ मजबूत होंगी और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
ओरण का शब्द अर्थ क्या है?
'ओरण' शब्द संस्कृत के 'अरण्य' से लिया गया है, जिसका अर्थ है एक अछूता जंगल।
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