भारत की 100वीं रामसर साइट: यूपी के बलिया में सुरहा ताल को मिला ऐतिहासिक दर्जा, PM मोदी ने की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून 2025 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर घोषणा की कि उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) को भारत की 100वीं रामसर साइट का दर्जा प्रदान किया गया है। उन्होंने इसे वेटलैंड संरक्षण की दिशा में देश का एक अहम पड़ाव बताया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'रामसर साइट्स के मामले में शतक। खुशी है कि उत्तर प्रदेश के बलिया में जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) को भारत की 100वीं रामसर साइट घोषित किया गया है। यह वेटलैंड पक्षियों की विविधता से समृद्ध है और यहां कई प्रवासी और स्थानीय पक्षी आते हैं।' उन्होंने इस उपलब्धि को भारत की पर्यावरण संरक्षण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
सुरहा ताल पक्षियों की असाधारण विविधता के लिए जाना जाता है — यहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी और स्थानीय पक्षी प्रतिवर्ष आते हैं। यह आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
वेटलैंड संरक्षण में भारत की प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'हमारे प्राकृतिक परिवेश और खासकर वेटलैंड्स की सुरक्षा के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता इस उपलब्धि में साफ तौर पर दिखाई देती है।' उन्होंने जोड़ा कि पिछले कुछ वर्षों में सामुदायिक भागीदारी, विज्ञान, नवाचार और जागरूकता अभियानों के ज़रिए वेटलैंड्स को बचाने और पुनर्जीवित करने के प्रयास और मज़बूत हुए हैं।
उन्होंने कहा कि ये प्रयास जैव-विविधता को बचाने, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा भविष्य बनाने में सहायक हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस का संदर्भ
यह घोषणा विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर की गई। इस दिन प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य' के सिद्धांत तथा 'मिशन लाइफ' की भावना से प्रेरित होकर स्वच्छ, हरित और टिकाऊ भविष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। गौरतलब है कि विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत 1972 में स्वीडन के स्टॉकहोम में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के मानव पर्यावरण सम्मेलन से हुई थी और इसे पहली बार 1973 में मनाया गया।
आज यह दिवस 150 से अधिक देशों की भागीदारी वाले वैश्विक आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसके तहत वृक्षारोपण, समुद्र तट सफाई, शैक्षिक कार्यक्रम और नीतिगत पहलें आयोजित की जाती हैं।
रामसर साइट क्या होती है
रामसर कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जो आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) के संरक्षण और उनके सतत उपयोग को सुनिश्चित करती है। रामसर साइट का दर्जा मिलने पर उस आर्द्रभूमि को वैश्विक महत्व का माना जाता है और उसके संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान लागू होते हैं। भारत के लिए 100वीं रामसर साइट की उपलब्धि दर्शाती है कि देश वैश्विक जैव-विविधता संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
आगे की राह
यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियाँ वैश्विक स्तर पर गहराती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रामसर साइट्स की बढ़ती संख्या भारत की पर्यावरण नीति की सकारात्मक दिशा को रेखांकित करती है। सुरहा ताल का संरक्षण न केवल स्थानीय जैव-विविधता के लिए, बल्कि क्षेत्रीय पारिस्थितिकी और स्थानीय समुदायों की आजीविका के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।