21 जुलाई 2026
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यूपी स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना लॉन्च: ₹2,741 करोड़ की भारत की पहली एयर शेड परियोजना, CM योगी ने दी बड़ी सौगातें

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यूपी स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना लॉन्च: ₹2,741 करोड़ की भारत की पहली एयर शेड परियोजना, CM योगी ने दी बड़ी सौगातें

सारांश

विश्व पर्यावरण दिवस पर CM योगी का बड़ा दांव — ₹2,741 करोड़ की भारत की पहली एयर शेड परियोजना, 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य और बलिया के सुरहा ताल को देश का 100वाँ रामसर साइट घोषित करना। यूपी की वायु गुणवत्ता नीति में यह एक नई पारी की शुरुआत है।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने 5 जून 2026 को विश्व बैंक के सहयोग से ₹2,741 करोड़ की यूपी स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना (यूपी कैंप) लॉन्च की — भारत की पहली एयर शेड आधारित परियोजना।
बलिया का सुरहा ताल देश का 100वाँ और उत्तर प्रदेश का 13वाँ रामसर साइट बना।
'एक पेड़ माँ के नाम' महाभियान 2026 का शुभारंभ; लक्ष्य 35 करोड़ पौधरोपण ।
श्रावस्ती के गुलरा (केन नाला) को बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट घोषित किया गया।
प्रदेश में 100 आर्द्रभूमियों की अधिसूचना और वेटलैंड पोर्टल लॉन्च किया गया।
लोगो प्रतियोगिता में 100 स्कूलों के 2,000 विद्यार्थियों ने भाग लिया; विजेताओं को ₹50,000 तक पुरस्कार।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में विश्व बैंक के सहयोग से ₹2,741 करोड़ की लागत वाली उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना (यूपी कैंप) का शुभारंभ किया — जो भारत की पहली एयर शेड आधारित वायु गुणवत्ता प्रबंधन परियोजना है। इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएँ भी की गईं।

परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

विश्व बैंक की एशिया क्षेत्र की प्रैक्टिस मैनेजर एन. जैनेट ग्लोबर और यूपी कैंप की सीईओ बी. चंद्रकला ने मुख्यमंत्री योगी के समक्ष एमओयू का हस्तांतरण किया। यह परियोजना एयर शेड अवधारणा पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि वायु प्रदूषण को प्रशासनिक सीमाओं के बजाय वायुमंडलीय क्षेत्रों के आधार पर प्रबंधित किया जाएगा — देश में अपनी तरह का यह पहला प्रयोग है।

अन्य प्रमुख घोषणाएँ

सीएम योगी ने 'एक पेड़ माँ के नाम' पौधरोपण महाभियान 2026 का बटन दबाकर शुभारंभ किया, जिसके अंतर्गत 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में 100 आर्द्रभूमियों की अधिसूचना से संबंधित संकलन और वेटलैंड पोर्टल की भी लॉन्चिंग की। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के शुभंकर का अनावरण किया गया।

कार्यक्रम में श्रावस्ती स्थित गुलरा (केन नाला) को बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई। वहीं, बलिया स्थित सुरहा ताल को देश का 100वाँ एवं उत्तर प्रदेश का 13वाँ रामसर साइट घोषित किया गया। वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने मंच पर इसका प्रमाण पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा।

पुरस्कार एवं सम्मान

यूपी कैंप के लोगो डिज़ाइन प्रतियोगिता में 100 स्कूलों के 2,000 विद्यार्थियों सहित पेशेवर डिज़ाइनरों ने भाग लिया। विजेताओं में प्रथम पुरस्कार (₹50,000) माही रजा (कक्षा-7, ललितपुर), द्वितीय पुरस्कार (₹25,000) सुंबुल फातिमा (कक्षा-5, कन्नौज) और तृतीय पुरस्कार (₹10,000) श्रद्धा (कक्षा-10, मीरजापुर) को मिला।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार (₹25,000) दिव्यांग छात्र अजय कुमार दुबे, द्वितीय (₹15,000) सृष्टि शुक्ला और तृतीय (₹10,000) दिव्यांग छात्र सुधाकर को प्रदान किया गया। आर्द्रभूमि अधिसूचना में सहयोग करने वाले 100 ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया गया, जिनमें मंच पर राजकिशोर वर्मा (बाराबंकी), मंटू सिंह (चित्रकूट), मंशाराम (अयोध्या), सुशील कुमार सिंह (बाराबंकी), हरेंद्र सिंह (फर्रुखाबाद) और अनीता देवी (चंदौली) को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के कई शहर — विशेष रूप से लखनऊ, कानपुर और आगरा — राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक में लगातार खराब प्रदर्शन कर रहे हैं। गौरतलब है कि एयर शेड मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी माना जाता है क्योंकि यह प्रदूषण के स्रोतों को भौगोलिक वायुप्रवाह के अनुसार चिह्नित करता है। यूपी कैंप परियोजना के क्रियान्वयन की प्रगति आने वाले वर्षों में प्रदेश की वायु गुणवत्ता नीति की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

741 करोड़ की यह परियोजना कागज़ पर महत्वाकांक्षी है, लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — उत्तर प्रदेश के कई शहर वर्षों से राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन करते आए हैं, और पिछली योजनाएँ ज़मीनी बदलाव लाने में सीमित रही हैं। एयर शेड मॉडल वैज्ञानिक रूप से सही दिशा है, किंतु इसकी सफलता अंतर-जिला समन्वय और निरंतर निगरानी पर निर्भर करेगी। सुरहा ताल का 100वाँ रामसर साइट बनना प्रतीकात्मक उपलब्धि है, पर आर्द्रभूमियों की वास्तविक सुरक्षा के लिए अधिसूचना से आगे सक्रिय संरक्षण ज़रूरी है। विश्व बैंक की भागीदारी जवाबदेही का एक बाहरी ढाँचा प्रदान करती है — यही इस परियोजना को पिछली घोषणाओं से अलग कर सकता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना (यूपी कैंप) क्या है?
यह भारत की पहली एयर शेड आधारित वायु गुणवत्ता प्रबंधन परियोजना है, जिसे विश्व बैंक के सहयोग से ₹2,741 करोड़ की लागत पर लॉन्च किया गया है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक सीमाओं के बजाय वायुमंडलीय प्रवाह क्षेत्रों के आधार पर वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
सुरहा ताल को रामसर साइट का दर्जा क्यों मिला?
बलिया स्थित सुरहा ताल को उसकी जैव विविधता और आर्द्रभूमि महत्व के कारण रामसर साइट घोषित किया गया। यह देश का 100वाँ और उत्तर प्रदेश का 13वाँ रामसर स्थल है।
'एक पेड़ माँ के नाम' महाभियान 2026 क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार का पौधरोपण अभियान है जिसे CM योगी ने 5 जून 2026 को लॉन्च किया। इसके अंतर्गत प्रदेश में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
गुलरा (केन नाला) को बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट क्यों घोषित किया गया?
श्रावस्ती स्थित गुलरा (केन नाला) को उसकी समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण के लिए बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई। यह क्षेत्र दुर्लभ वनस्पति और जीव-जंतुओं का आवास माना जाता है।
यूपी कैंप परियोजना में विश्व बैंक की क्या भूमिका है?
विश्व बैंक इस परियोजना में वित्तीय और तकनीकी सहयोगी है। विश्व बैंक की एशिया क्षेत्र की प्रैक्टिस मैनेजर एन. जैनेट ग्लोबर ने कार्यक्रम में एमओयू का हस्तांतरण किया। बैंक की भागीदारी परियोजना के क्रियान्वयन में बाहरी जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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