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राजकोट में 319 पाकिस्तानी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता, सीएए के तहत गुजरात में 1,500 से अधिक लाभान्वित

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राजकोट में 319 पाकिस्तानी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता, सीएए के तहत गुजरात में 1,500 से अधिक लाभान्वित

सारांश

राजकोट के प्रमुख स्वामी ऑडिटोरियम में 319 पाकिस्तानी शरणार्थियों की आँखें तब नम हो गईं जब उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा — 'मुस्कुराइए, आज आप भारत के नागरिक हैं।' सीएए के तहत गुजरात में अब 1,500 से अधिक लोग भारतीय नागरिक बन चुके हैं — यह उन परिवारों की दशकों की प्रतीक्षा का अंत है।

मुख्य बातें

राजकोट के प्रमुख स्वामी ऑडिटोरियम में 15 अक्टूबर 2026 को 319 पाकिस्तानी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र दिए गए।
लाभार्थियों में राजकोट से 259 , मोरबी से 53 , कच्छ से 6 और सुरेंद्रनगर से 1 व्यक्ति शामिल हैं।
सीएए के तहत गुजरात में अब तक 1,500 से अधिक लोगों को नागरिकता दी जा चुकी है।
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के निर्णय और सीएए लागू होने का परिणाम बताया।
सांसद पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा — सीएए नागरिकता खत्म करने का नहीं, बल्कि बेसहारा लोगों को इज्जत से बसाने का कानून है।

गुजरात के राजकोट में 15 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक भावपूर्ण समारोह में 319 पाकिस्तानी शरणार्थी परिवारों को भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र सौंपे गए। प्रमुख स्वामी ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में जब गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा — 'मुस्कुराइए, आज से आप भारत के नागरिक हैं' — तो सैकड़ों आँखें नम हो गईं। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत दिए गए ये प्रमाण पत्र उन परिवारों के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक हैं, जो पाकिस्तान में दशकों तक प्रताड़ना झेलने के बाद भारत आए थे।

मुख्य घटनाक्रम

राजकोट जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस समारोह में जिलेवार नागरिकता प्राप्तकर्ताओं की संख्या इस प्रकार रही — राजकोट जिले से 259, मोरबी से 53, कच्छ से 6 और सुरेंद्रनगर से 1 व्यक्ति। ये सभी पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए विस्थापित परिवार हैं, जिन्हें अब तक कानूनी पहचान के अभाव में बुनियादी अधिकारों से वंचित रहना पड़ता था।

गौरतलब है कि जनगणना निदेशक सुजल मयात्रा के अनुसार, सीएए के तहत गुजरात में अब तक 1,500 से अधिक लोगों को नागरिकता दी जा चुकी है। नवरात्रि के इस पर्व पर आयोजित समारोह इन परिवारों के लिए एक दोहरे उत्सव जैसा था।

उपमुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने समारोह में कहा, 'भारतीय नागरिकता पाने वाले 319 बेघर परिवारों के लिए आज दिवाली का त्योहार है। आज आप सभी के घरों में दिवाली के दीये जल रहे हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्के फैसले और सीएए कानून लागू होने की वजह से हुआ है।'

संघवी ने पाकिस्तान में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि थारपारकर जैसी जगहों पर महिलाएँ घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान के हैदराबाद के रानीबाग में फायरिंग के दौरान हिंदुओं को जान बचाने के लिए अपने नाम तक बदलने पड़े थे। अब ये भारतीय नागरिक अपनी बाकी जिंदगी अपने असली नामों के साथ इस देश में रह सकेंगे।'

उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में यह भी कहा कि राजकोट के गरबा पास की कीमत पाकिस्तान के पासपोर्ट से ज़्यादा है।

सांसद और अधिकारियों की आवाज़

समारोह में उपस्थित सांसद पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा, 'सीएए किसी की नागरिकता खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि सालों पहले अपना वतन छोड़कर आए बेसहारा लोगों को इज्जत से बसाने का इंसानियत वाला कानून है। यह कदम केंद्र सरकार की मानवता को दर्शाता है।' उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी।

कार्यक्रम के दौरान एक किशोरी ने अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए उपमुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए उनके हाथ पर कुमकुम का तिलक लगाया और राखी बाँधी — एक भावुक क्षण जिसने समारोह की गहराई को और उजागर किया।

पुलिस की तारीफ और कानून-व्यवस्था

उपमुख्यमंत्री संघवी ने इस अवसर पर राजकोट पुलिस की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि राजकोट में एक लूट-हत्या के मामले में आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया गया। राजकोट सिटी पुलिस कमिश्नर, क्राइम ब्रांच और अन्य जिलों की करीब 50 टीमों ने दिन-रात काम करके आरोपियों को जरूरी सामान के साथ पकड़ा, ताकि नवरात्रि और गरबा उत्सव में कोई बाधा न आए।

आगे की राह

यह समारोह ऐसे समय में आया है जब सीएए के क्रियान्वयन को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। गुजरात में 1,500 से अधिक लोगों को नागरिकता मिलने से राज्य प्रशासन की सक्रियता स्पष्ट होती है। अब नई नागरिकता पाए इन परिवारों के समक्ष अगली चुनौती सरकारी दस्तावेज़ीकरण — आधार, मतदाता पहचान पत्र और भूमि अधिकार — को शीघ्र पूरा करने की है, ताकि उनका सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास सुनिश्चित हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि नागरिकता प्रमाण पत्र के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया कितनी तेज़ और सुव्यवस्थित होगी। आधार, मतदाता पहचान, भूमि और रोज़गार तक पहुँच — ये वे पड़ाव हैं जहाँ प्रशासनिक वादे अक्सर धीमे पड़ जाते हैं। गुजरात में 1,500 से अधिक नागरिकता-प्राप्तकर्ताओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की स्वतंत्र निगरानी ज़रूरी है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कागज़ी पहचान व्यावहारिक अधिकारों में बदले।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजकोट में 319 लोगों को भारतीय नागरिकता कैसे मिली?
ये 319 लोग पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए शरणार्थी हैं, जिन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत 15 अक्टूबर 2026 को राजकोट जिला प्रशासन द्वारा आयोजित समारोह में प्रमाण पत्र सौंपे गए। यह समारोह प्रमुख स्वामी ऑडिटोरियम में हुआ जहाँ उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी उपस्थित थे।
सीएए के तहत गुजरात में अब तक कितने लोगों को नागरिकता मिली है?
जनगणना निदेशक सुजल मयात्रा के अनुसार, सीएए के तहत गुजरात में अब तक 1,500 से अधिक लोगों को भारतीय नागरिकता दी जा चुकी है। 15 अक्टूबर के समारोह में दिए गए 319 प्रमाण पत्र इसी क्रम का हिस्सा हैं।
नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) क्या है?
सीएए भारत का वह कानून है जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का मार्ग प्रशस्त करता है। सांसद पुरुषोत्तम रूपाला ने इसे 'किसी की नागरिकता खत्म करने का नहीं, बल्कि बेसहारा लोगों को इज्जत से बसाने का कानून' बताया।
इन शरणार्थियों को पाकिस्तान में किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था?
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के अनुसार, पाकिस्तान के थारपारकर जैसी जगहों पर महिलाएँ घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। पाकिस्तान के हैदराबाद के रानीबाग में फायरिंग के दौरान हिंदुओं को जान बचाने के लिए अपने नाम तक बदलने पड़े थे।
नागरिकता मिलने के बाद इन परिवारों की अगली चुनौतियाँ क्या हैं?
नागरिकता प्रमाण पत्र मिलने के बाद इन परिवारों को आधार, मतदाता पहचान पत्र, भूमि अधिकार और रोज़गार जैसे बुनियादी दस्तावेज़ और सुविधाएँ हासिल करनी होंगी। प्रशासनिक पुनर्वास प्रक्रिया की गति और पारदर्शिता ही यह तय करेगी कि कानूनी पहचान व्यावहारिक जीवन-सुधार में कब और कैसे बदलती है।
राष्ट्र प्रेस
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