राजकोट में ड्रोन से 130 वर्ग किमी की स्कैनिंग, 15,377 मच्छर-पनपने की जगहें चिह्नित
सारांश
मुख्य बातें
राजकोट नगर निगम (RMC) ने 14 अक्टूबर 2026 तक शहर के 130.59 वर्ग किमी इलाके का ड्रोन सर्वे और एआई-आधारित निगरानी के ज़रिए परीक्षण पूरा करते हुए 15,377 संभावित मच्छर-प्रजनन स्थलों की पहचान की है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे इस अभियान में अब तक 8,680 स्थानों पर कीटनाशक का छिड़काव किया जा चुका है।
सर्वे का दायरा और तकनीकी दृष्टिकोण
गुजरात के राजकोट शहर का कुल क्षेत्रफल 161.85 वर्ग किमी है, जिसमें से 130.59 वर्ग किमी की ड्रोन-स्कैनिंग 14 अक्टूबर तक पूरी हो चुकी है। ड्रोन सर्वे में विशेष रूप से पानी से भरे इलाकों, नालियों, नदी-किनारों पर बने गड्ढों और उन स्थानों पर ध्यान केंद्रित किया गया जहाँ परंपरागत स्प्रे टीमों की पहुँच मुश्किल या जोखिम भरी होती है।
नगर निगम ने ड्रोन के ज़रिए 236 घंटे तक कीटनाशक का हवाई छिड़काव किया। स्वास्थ्य विभाग की 15 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट के अनुसार, एआई तकनीक ने ऊपर से खींची गई तस्वीरों में जलजमाव वाले क्षेत्रों को स्वतः चिह्नित कर फील्ड टीमों को सटीक निर्देशांक उपलब्ध कराए।
ज़मीनी अभियान और आँकड़े
ड्रोन सर्वे के साथ-साथ फील्ड वर्कर, शहरी आशा कार्यकर्ता और मल्टी-पर्पज हेल्थ वर्कर (MPW) ने 8 से 14 अक्टूबर के बीच 93,686 घरों में लार्वा-रोधी अभियान चलाया। 602 घरों में फॉगिंग की गई, जबकि अधिक मच्छर-घनत्व वाले इलाकों में वाहन-चालित फॉगिंग मशीनों का उपयोग हुआ।
इसी अवधि में स्वास्थ्य कर्मियों ने 2,86,688 लोगों की आबादी का सर्वेक्षण किया, 5,355 क्लोरीन गोलियाँ और 973 ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) पैकेट वितरित किए तथा 3,334 रेज़िड्युअल क्लोरीन टेस्ट किए।
निरीक्षण और नोटिस
नगर निकाय ने निर्माण स्थलों, स्कूलों, अस्पतालों, होटलों, हॉस्टलों, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, कबाड़ गोदामों, बेसमेंट, पार्टी प्लॉट, धार्मिक स्थलों, पेट्रोल पंपों और सरकारी कार्यालयों सहित 317 गैर-आवासीय परिसरों का निरीक्षण किया। मच्छर-प्रजनन स्थल पाए जाने पर आवासीय क्षेत्रों में 274 लोगों और व्यावसायिक क्षेत्रों में 59 लोगों को नोटिस जारी किए गए तथा प्रशासनिक शुल्क भी वसूला गया।
डेंगू का 'एडीज' मच्छर: स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, डेंगू फैलाने वाला 'एडीज' मच्छर दिन के समय काटता है और अपना जीवन-चक्र बेहद तेज़ी से पूरा करता है — विशेषकर जब किसी बर्तन या सतह पर साफ पानी जमा रहे। यही कारण है कि नगर निगम ने घरों के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों पर भी निगरानी बढ़ाई है।
नगर निकाय ने निवासियों से अपील की है कि वे घर के अंदर-बाहर पानी जमा न होने दें, मच्छर-पनपने के स्रोत खत्म करें, पीने का पानी उबालकर या उचित विधि से शुद्ध करके पिएँ और ड्रोन सर्वे के दौरान स्वास्थ्य टीमों का सहयोग करें।
आगे की राह
शेष 31.26 वर्ग किमी इलाके का सर्वे जल्द पूरा किए जाने की संभावना है। गौरतलब है कि अक्टूबर-नवंबर का मौसम मच्छर-जनित बीमारियों के लिहाज़ से सबसे संवेदनशील माना जाता है। इस अभियान की सफलता राजकोट की वेक्टर-कंट्रोल रणनीति को देश के अन्य शहरी निकायों के लिए एक संभावित मॉडल के रूप में स्थापित कर सकती है।