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राजनाथ सिंह: राष्ट्रीय सुरक्षा अब सेना के आकार नहीं, स्वदेशी क्षमता से तय होगी

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राजनाथ सिंह: राष्ट्रीय सुरक्षा अब सेना के आकार नहीं, स्वदेशी क्षमता से तय होगी

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संदेश साफ है — भारत की सुरक्षा अब टैंकों की गिनती नहीं, अपनी तकनीक बनाने की क्षमता से मापी जाएगी। ₹38,424 करोड़ का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात और 60% से ज़्यादा की छलाँग इस बदलाव की असली तस्वीर है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 9 अक्टूबर 2026 को SIDM चैंपियंस पुरस्कार समारोह , नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा की नई परिभाषा रखी।
उन्होंने कहा — सुरक्षा अब सेना के आकार नहीं, बल्कि स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता से तय होती है।
वित्त वर्ष 2025 26 में भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा — पिछले वर्ष से 60% से अधिक वृद्धि।
इस निर्यात में सार्वजनिक क्षेत्र का योगदान 54.84% और निजी क्षेत्र का 45.16% रहा।
सरकार ने उद्योगों को तकनीक, बाज़ार और साझेदार चुनने की पूर्ण स्वायत्तता देने की बात कही।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा बदल चुकी है — अब यह सिर्फ सेना के आकार से नहीं, बल्कि देश की अपनी रक्षा निर्माण क्षमता और तकनीकी स्वायत्तता से तय होती है। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के चैंपियंस पुरस्कार समारोह में यह उद्गार व्यक्त किए।

सुरक्षा की नई परिभाषा

राजनाथ सिंह ने कहा कि सेना जिन क्षमताओं पर निर्भर करती है, उन्हें स्वयं विकसित और तैयार कर पाने की योग्यता ही अब असली सुरक्षा है। उन्होंने जोर दिया कि देश की जरूरत के हथियारों का निर्माण और उनका नियंत्रण अपने हाथ में होना अनिवार्य है। उनके अनुसार, "जब देश की सुरक्षा की बात आए, तो गति सबसे ज्यादा मायने रखती है।"

उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे उत्पादन क्षमता को आवश्यकतानुसार बढ़ाने के लिए "नए, नवाचारी और क्रांतिकारी समाधान" लेकर आएं।

रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल

रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025 26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ तक पहुँच गया — पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि। इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का योगदान 54.84 प्रतिशत रहा, जबकि निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 45.16 प्रतिशत रही।

राजनाथ सिंह ने इसे ऐतिहासिक बदलाव करार देते हुए कहा, "एक समय था जब भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में गिना जाता था। लेकिन आज हम उन्नत सैन्य उपकरणों के एक विश्वसनीय और भरोसेमंद निर्यातक के रूप में उभर रहे हैं।"

आत्मनिर्भरता की नीतिगत पृष्ठभूमि

रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 में सरकार बनने के समय से ही प्रधानमंत्री का विशेष ध्यान रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर रहा है। उन्होंने रक्षा खरीद प्रक्रिया, रक्षा खरीद नियमावली, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची, सृजन पोर्टल और रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (iDEX) जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सबका एकमात्र उद्देश्य निजी रक्षा उद्योगों की क्षमताओं को "उड़ान देना" है।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा आयात पर कई प्रतिबंध लगाते हुए स्वदेशी विनिर्माण को प्राथमिकता दी है, जिसका प्रतिफल अब निर्यात के आँकड़ों में दिख रहा है।

उद्योग को स्वायत्तता का संदेश

राजनाथ सिंह ने उद्योग जगत को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार अब "भागीदारी के दृष्टिकोण" से आगे बढ़कर उद्योगों को पूरी "स्वायत्तता" दे रही है। उनके अनुसार उद्योग अब स्वयं तय कर सकते हैं कि कौन सी तकनीक विकसित करनी है, किस बाजार में जाना है और किसके साथ साझेदारी करनी है।

उन्होंने कहा, "सरकार ने नीतियाँ बनाईं, प्रक्रियाओं को सरल किया और उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के साथ नए अवसर उपलब्ध कराए हैं — सरकार हर मामले में आपके साथ खड़ी है।" SIDM के चैंपियंस पुरस्कार समारोह का यह संस्करण ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू राजनीतिक तनाव के बीच रक्षा आत्मनिर्भरता का सवाल कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

424 करोड़ का रक्षा निर्यात आँकड़ा निस्संदेह उल्लेखनीय है, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह वृद्धि टिकाऊ है या कुछ बड़े सौदों पर आधारित एकमुश्त उछाल। सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों और iDEX जैसी नीतियों ने दिशा तो दी है, पर क्रियान्वयन की गति अभी भी असमान है। यह ऐसे समय में आया है जब निजी क्षेत्र की 45% हिस्सेदारी संकेत देती है कि उद्योग जगत सक्रिय है — लेकिन उद्योगों की 'स्वायत्तता' तभी अर्थपूर्ण होगी जब रक्षा अनुसंधान एवं विकास में निवेश का पारदर्शी ढाँचा हो। बिना सत्यापनयोग्य बेंचमार्क के, ये भाषण प्रेरक ज़रूर लगते हैं, पर नीति की परख मैदान पर होती है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा की नई परिभाषा क्या बताई?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सेना के आकार से नहीं, बल्कि देश की अपनी रक्षा निर्माण क्षमता और तकनीकी स्वायत्तता से तय होती है। उनका कहना है कि देश की ज़रूरत के हथियारों का निर्माण और उनका नियंत्रण स्वयं के हाथ में होना अनिवार्य है।
भारत का रक्षा निर्यात 2025 26 में कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025 26 में भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र का योगदान 54.84% और निजी क्षेत्र का 45.16% रहा।
SIDM चैंपियंस पुरस्कार समारोह क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) का चैंपियंस पुरस्कार समारोह भारतीय रक्षा उद्योग जगत के उत्कृष्ट योगदानकर्ताओं को सम्मानित करने का वार्षिक आयोजन है। यह समारोह 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि थे।
भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में उद्योगों को कौन सी स्वायत्तता दी है?
राजनाथ सिंह के अनुसार, सरकार अब उद्योगों को तकनीक चुनने, बाज़ार तय करने और साझेदार चुनने की पूर्ण स्वायत्तता दे रही है। रक्षा खरीद प्रक्रिया, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची, सृजन पोर्टल और iDEX जैसी नीतियाँ इसी दिशा में हैं।
भारत कब से रक्षा आयातक से निर्यातक बना?
रक्षा मंत्री के अनुसार, 2014 के बाद से आत्मनिर्भरता पर फोकस के चलते भारत धीरे धीरे दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में से एक की छवि से बाहर निकल रहा है। वित्त वर्ष 2025 26 में ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड निर्यात के साथ भारत अब उन्नत सैन्य उपकरणों का विश्वसनीय निर्यातक बन रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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