राजनाथ सिंह: राष्ट्रीय सुरक्षा अब सेना के आकार नहीं, स्वदेशी क्षमता से तय होगी
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा बदल चुकी है — अब यह सिर्फ सेना के आकार से नहीं, बल्कि देश की अपनी रक्षा निर्माण क्षमता और तकनीकी स्वायत्तता से तय होती है। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के चैंपियंस पुरस्कार समारोह में यह उद्गार व्यक्त किए।
सुरक्षा की नई परिभाषा
राजनाथ सिंह ने कहा कि सेना जिन क्षमताओं पर निर्भर करती है, उन्हें स्वयं विकसित और तैयार कर पाने की योग्यता ही अब असली सुरक्षा है। उन्होंने जोर दिया कि देश की जरूरत के हथियारों का निर्माण और उनका नियंत्रण अपने हाथ में होना अनिवार्य है। उनके अनुसार, "जब देश की सुरक्षा की बात आए, तो गति सबसे ज्यादा मायने रखती है।"
उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे उत्पादन क्षमता को आवश्यकतानुसार बढ़ाने के लिए "नए, नवाचारी और क्रांतिकारी समाधान" लेकर आएं।
रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल
रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025 26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ तक पहुँच गया — पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि। इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का योगदान 54.84 प्रतिशत रहा, जबकि निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 45.16 प्रतिशत रही।
राजनाथ सिंह ने इसे ऐतिहासिक बदलाव करार देते हुए कहा, "एक समय था जब भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में गिना जाता था। लेकिन आज हम उन्नत सैन्य उपकरणों के एक विश्वसनीय और भरोसेमंद निर्यातक के रूप में उभर रहे हैं।"
आत्मनिर्भरता की नीतिगत पृष्ठभूमि
रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 में सरकार बनने के समय से ही प्रधानमंत्री का विशेष ध्यान रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर रहा है। उन्होंने रक्षा खरीद प्रक्रिया, रक्षा खरीद नियमावली, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची, सृजन पोर्टल और रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (iDEX) जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सबका एकमात्र उद्देश्य निजी रक्षा उद्योगों की क्षमताओं को "उड़ान देना" है।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा आयात पर कई प्रतिबंध लगाते हुए स्वदेशी विनिर्माण को प्राथमिकता दी है, जिसका प्रतिफल अब निर्यात के आँकड़ों में दिख रहा है।
उद्योग को स्वायत्तता का संदेश
राजनाथ सिंह ने उद्योग जगत को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार अब "भागीदारी के दृष्टिकोण" से आगे बढ़कर उद्योगों को पूरी "स्वायत्तता" दे रही है। उनके अनुसार उद्योग अब स्वयं तय कर सकते हैं कि कौन सी तकनीक विकसित करनी है, किस बाजार में जाना है और किसके साथ साझेदारी करनी है।
उन्होंने कहा, "सरकार ने नीतियाँ बनाईं, प्रक्रियाओं को सरल किया और उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के साथ नए अवसर उपलब्ध कराए हैं — सरकार हर मामले में आपके साथ खड़ी है।" SIDM के चैंपियंस पुरस्कार समारोह का यह संस्करण ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू राजनीतिक तनाव के बीच रक्षा आत्मनिर्भरता का सवाल कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है।