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विश्व रक्तदान दिवस 2025: मिथकों से घिरा 'महादान', स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताई सच्चाई

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विश्व रक्तदान दिवस 2025: मिथकों से घिरा 'महादान', स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताई सच्चाई

सारांश

14 जून, विश्व रक्तदान दिवस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया — 'रक्तदान से कमज़ोरी आती है' जैसे मिथक ही असली बाधा हैं। 18 से 65 वर्ष के स्वस्थ व्यक्ति हर कुछ महीनों में सुरक्षित रक्तदान कर सकते हैं, और एक यूनिट रक्त कई ज़िंदगियाँ बचा सकता है।

मुख्य बातें

हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है; इस वर्ष भ्रांतियाँ दूर करना मुख्य लक्ष्य है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 'रक्तदान से शरीर कमज़ोर होता है' — यह धारणा पूरी तरह गलत है।
18 से 65 वर्ष की आयु के व्यक्ति, जिनका हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम/डेसीलीटर या अधिक हो, रक्तदान कर सकते हैं।
पुरुष हर 3 महीने और महिलाएँ हर 4 महीने में रक्तदान कर सकती हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) नागरिकों से स्वैच्छिक रक्तदान अपनाने की अपील कर रहा है।
स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

विश्व रक्तदान दिवस हर वर्ष 14 जून को मनाया जाता है, और इस बार भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक अहम चिंता उठाई है — समाज में फैले मिथक और भ्रांतियाँ लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान से दूर रख रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ये गलत धारणाएँ दूर हो जाएँ, तो देश में रक्त की उपलब्धता की समस्या काफी हद तक सुलझाई जा सकती है।

सबसे आम मिथक और उनकी हकीकत

सबसे प्रचलित भ्रांति यह है कि रक्तदान करने से शरीर कमज़ोर हो जाता है और दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है। चिकित्सकों का स्पष्ट कहना है कि यह धारणा तथ्यों पर आधारित नहीं है। एक स्वस्थ व्यक्ति का शरीर रक्तदान के बाद कुछ ही हफ्तों में रक्त की पूर्ति कर लेता है, और पूरी प्रक्रिया चिकित्सकीय निगरानी में सुरक्षित रूप से संपन्न होती है।

इसके अतिरिक्त, विशेषज्ञ बताते हैं कि रक्तदान शरीर में नई लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को प्रोत्साहित करता है, जो दीर्घकालिक दृष्टि से लाभकारी भी हो सकता है।

रक्तदान की पात्रता और प्रक्रिया

18 से 65 वर्ष की आयु के वे व्यक्ति रक्तदान कर सकते हैं जिनका हीमोग्लोबिन स्तर कम से कम 12.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो। रक्तदान से पूर्व डोनर की हीमोग्लोबिन, रक्तचाप और सामान्य स्वास्थ्य की जाँच की जाती है — केवल पूर्णतः स्वस्थ व्यक्ति को ही रक्तदान की अनुमति दी जाती है।

चिकित्सकों के अनुसार, पुरुष हर तीन महीने में और महिलाएँ हर चार महीने में रक्तदान कर सकती हैं। पूरी प्रक्रिया केवल कुछ मिनटों में पूरी होती है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अपील

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) लगातार नागरिकों से आग्रह कर रहा है कि वे भ्रांतियों से बाहर निकलकर स्वैच्छिक रक्तदान को अपनाएँ। NHM के अनुसार, यदि अधिक लोग नियमित रूप से रक्तदान करें तो देश में रक्त की कमी की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।

यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण है जब दुर्घटनाओं, सर्जरी और प्रसव जैसी आपात स्थितियों में रक्त की माँग निरंतर बनी रहती है। एक यूनिट रक्त कई मरीजों के उपचार में उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

जागरूकता अभियान और रक्तदान शिविर

स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न सामाजिक संस्थान स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित कर रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य युवाओं और आम नागरिकों को इस सामाजिक दायित्व से जोड़ना है।

गौरतलब है कि जागरूकता की कमी और मिथकों का प्रचलन ही सबसे बड़ी बाधा है — न कि इच्छाशक्ति की। विशेषज्ञों का मानना है कि सही और सुलभ जानकारी उपलब्ध कराना इस अंतर को पाटने की कुंजी है।

आगे की राह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि नागरिक इन भ्रांतियों को पीछे छोड़ दें और नियमित रूप से रक्तदान को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएँ, तो देश में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। विश्व रक्तदान दिवस 2025 इस संकल्प को दोहराने का अवसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी देश में रक्त की कमी बनी रहती है। असली सवाल यह है कि जागरूकता अभियान केवल 'दिवस' तक सीमित क्यों रहते हैं? NHM और स्वास्थ्य विभाग के शिविर तब तक प्रभावी नहीं होंगे जब तक ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थायी रक्तदान केंद्र और डिजिटल जागरूकता नहीं पहुँचती। मिथक तोड़ना ज़रूरी है, लेकिन उससे भी ज़रूरी है एक ऐसी प्रणाली जो साल के 365 दिन रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करे।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व रक्तदान दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व रक्तदान दिवस हर वर्ष 14 जून को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना और लोगों को रक्तदान के महत्व के प्रति जागरूक करना है।
क्या रक्तदान करने से शरीर कमज़ोर हो जाता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा पूरी तरह गलत है। एक स्वस्थ व्यक्ति का शरीर रक्तदान के बाद कुछ ही हफ्तों में रक्त की पूर्ति कर लेता है और इसका कोई दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव नहीं होता।
रक्तदान के लिए पात्रता क्या है?
18 से 65 वर्ष की आयु के वे व्यक्ति रक्तदान कर सकते हैं जिनका हीमोग्लोबिन स्तर कम से कम 12.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो और जो पूर्णतः स्वस्थ हों। रक्तदान से पहले हीमोग्लोबिन, रक्तचाप और सामान्य स्वास्थ्य की जाँच की जाती है।
कितने समय बाद दोबारा रक्तदान किया जा सकता है?
चिकित्सकों के अनुसार पुरुष हर तीन महीने में और महिलाएँ हर चार महीने में रक्तदान कर सकती हैं। पूरी प्रक्रिया केवल कुछ मिनटों की होती है।
रक्तदान की सबसे अधिक ज़रूरत कब पड़ती है?
दुर्घटनाओं, सर्जरी और प्रसव जैसी आपात स्थितियों में रक्त की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार एक यूनिट रक्त कई मरीजों के उपचार में उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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